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आखिर हम अपने आने  वाली पीढ़ी को कैसी धरती सौंप कर जाएंगे ?

आखिर हम अपने आने  वाली पीढ़ी को कैसी धरती सौंप कर जाएंगे ?

क्या धर्म केवल पर्व की कुरीतियों को द्विगुणित करना मात्र है ?

पंकज चतुर्वेदी

कल “एक्स” पर एक लेख साझा किया था जिसमें दीपावली के अगले दिन कृत्रिम बारिश से तेजाबी बरसात के खतरे की बात थी- उस पर एक कमेन्ट था ” भग भोस–के ” सज्जन का परिचय देखा तो घोर मोदी भक्त ।

उस लेख को फ़ेसबुक पर देश के प्रख्यात पत्रकार अरविन्द कुमार सिंह  ने साझा किया तो उस पर एक कमेन्ट आया- “कभी बकरा ईद पर ऐसा लेख लिखो” – यानि |हमारी फूली को देखना नहीं , दूसरे की कानी में उंगली करेंगे “

जब धर्म केवल तमाशा बन जाता है तो उससे मूल्य का क्षरण होने लगता हैं । पर्व और त्योहार हमारे पूर्वजों के पौरुष, पराक्रम, संयम सदाचारित के स्मरण में होने वाले अवसर होते हैं । जिनमें भरत सा भरोसा नहीं कि भले 14 साल हो राम लौट कर आएंगे और शासन उन्हें सौंपना हैं – वे सबसे अधिक चीख से जी श्री राम के नारे उछाल रहे हैं ।

कल रात दिल्ली एनसीआर में सुप्रीम कोर्ट अर्थात भारत के लोकतंत्र के तीन में से एक शीर्ष स्तम्भ को कलपते देखा — लगा जैसे कानून का सामूहिक बलात्कार किया जा रहा हैं — बीते दस सालों के सर्वाधिक आतिशबाजी चली और देर रात दो बजे तक , ग्रीन आतिशबाजी गायब थी और पारंपरिक चीनी आतिशबाजी का जोर था ।

विदित हो उच्चतम न्यायालय ने 15 अक्टूबर को कुछ शर्तों के साथ दिल्ली-एनसीआर में हरित पटाखों की बिक्री और उनके इस्तेमाल की अनुमति दे दी थी । इसके तहत दिवाली से एक दिन पहले और त्योहार के दिन सुबह छह बजे से शाम सात बजे के बीच और फिर रात आठ बजे से 10 बजे तक हरित पटाखे फोड़ने की अनुमति दी गई थी ।

बीमार, बुजुर्ग, बच्चे बेहाल थे – साथ में पक्षी और गाय, कुत्ते जैसे निराश्रित जानवर भी – ऐसे में आग लगना, चोट लगना आम बात है ही ।

क्या धर्म केवल पर्व की कुरीतियों को द्विगुणित करना मात्र है ? क्या किसी के घर पर पूजा के साथ उन आख्यानों को याद किया गया जिसके कारण दीपोत्सव होता है ?

सबने लक्ष्मी से खूब सारा धन मांगा — लेकिन यह आशीष मिला केवल डॉक्टर और दवा विक्रेता को — तैयार रहिए – आने वाले दिन सांस के बीमारी, हड्डियों में दर्द से ले कर बहुत से अवसर देंगे जिससे लक्ष्मी जिसे चपला कहते हैं, आपके पास से खिसक कर अस्पताल के द्वार तक जाएगी ।

तनिक देखिए वसुंधरा में ओज़ोन का स्तर 6 है । ओज़ोन का 6 ppm स्तर सांस लेने पर फेफड़ों के ऊतकों को क्षति पहुंचाता है और श्वसन नलियों में सूजन पैदा करता है। इसके लक्षणों में सीने में दर्द, खांसी, गले में जलन, सांस लेने में कठिनाई, मतली और कंजेशन शामिल हैं । ​लंबे समय तक संपर्क अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, वातस्फीति (Emphysema) और हृदय रोगों की संभावना को बढ़ाता है ।

साकेत में पी एम-10 का स्तर 265 हैं । जब आज हवा चल नहीं रही हैं और वायु में विभिन रासायनिक कान बरकरार हैं ऐसे में इस स्तर के कण होने का अर्थ है आंखों, गले और फेफड़ों में जलन, अस्थमा, हृदय या श्वसन रोग से पीड़ित व्यक्तियों के लिए यह स्थिति खतरनाक साबित हो सकती है ।

दुर्भाग्य है कि कतिपय न्यूज एंकर , बीजेपी प्रवक्ता जैसे समाज को प्रभावित करने वाले लोग कल शाम से आतिश बाजियाँ  अधिक से अधिक चल कर हिन्दू जागरण की बेतुकी, गैर वैज्ञानिक, सामुदायिक स्वास्थ्य के भीषण नुकसान को प्रोत्साहित कर रहे थे और ये सभी लोग नरेंद्र मोदी द्वारा पोषित हैं ।

आज सुबह गाजियाबाद के वसुंधरा से ले कर दिल्ली के साकेत तक हवा में जहर है । दोनों जगह शिक्षित लोग रहते हैं । सुबह आठ बजे के आँकड़े देखें और विचार करें कि हम आने वाली पीढ़ी को कैसी धरती दे कर जा रहे हैं !

सोमवार, यानी दीवाली की शाम भी दिल्ली में 38 निगरानी स्टेशन में से 34 पर प्रदूषण का स्तर ‘रेड जोन’ में दर्ज किया गया था ।  रेड जोन मतलब ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ एयर क्वॉलिटी. वहीं, सोमवार-मंगलवार की दर्मियानी रात दिल्ली में धुंध की मोटी चादर दिखी और औसत AQI 531 दर्ज किया गया है । यह राष्ट्रीय औसत से 1.8 गुना ज्यादा है ।

इतना ही नहीं, नरेला में वायु गुणवत्ता सूचकांक 550 पार कर के 551 तक पहुंचा और अशोक नगर में 493 तक पहुंच गया है । दिवाली की शाम दिल्ली में जमकर पटाखे फोड़े गए हैं । इस बीच एनसीआर के नोएडा और गुरुग्राम में भी हालात कुछ खास अच्छे नहीं रहे, नोएडा का AQI 407 तो वहीं गुरुग्राम का 402 दर्ज किया गया ।

मौसम विभाग का कहना है कि दीपावाली की शाम हवा न चलने के कारण, आसमान में धुंध बनी रही. मंगलवार की सुबह दिल्ली के कई इलाकों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है. 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ‘समीर’ ऐप के अनुसार, चार निगरानी स्टेशन ने पहले से ही वायु गुणवत्ता को ‘गंभीर’ श्रेणी में बताया, जिसमें एक्यूआई का स्तर 400 से ऊपर था. इसमें द्वारका में एक्यूआई 417, अशोक विहार में 404, वजीरपुर में 423 और आनंद विहार में 404 में दर्ज किया गया ।

21 अक्टूबर सुबह 6.00 बजे का AQI

दिल्ली
आनंदविहार: 352
बुराड़ीक्रासिंग: 393
अशोकविहर: 386 
आयानगर: 349
बवाना: 418 
CRRI मथुरा रोड: 341 
चांदनी चौक: 347
NSIT द्वारका: 389
IGI एयरपोर्ट T3: 294
दिलशाद गार्डन: 346 
ITO: 345 
जहांगीरपुरी: 404 
लोधी रोड: 334 
नरेला: 354 
डीयू नॉर्थ कैंपस: 352 
पटपड़गंज: 339 
आरके पुरम: 369 
रोहिणी: 367 
सीरी फोर्ट: 310 
वजीरपुर: 408
विवेक विहार: 367

गाजियाबाद
इंदिरापुरम: 329 
लोनी: 329 
वसुंधरा: 351

नोएडा 
सेक्टर-125: 326 
सेक्टर-1: 322
सेक्टर-116: 340

गुरुग्राम
सेक्टर-51: 346 
NISE- 357

दिल्ली में ग्रैप-2 लागू

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के बीच ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ग्रैप-2 लागू कर दिया गया है । दिवाली से पहले ही दिल्ली की हवा जहरीली हो गई थी । ऐसे में डीजल जनरेटर पर रोक लगाई गई । प्राइवेट गाड़ियों के इस्तेमाल को कम करने के लिए पार्किंग फीस बढ़ाई गई । सीएनजी-इलेक्ट्रिक बसों और मेट्रो की सर्विस बढ़ाई गई । नैचुरल गैस, बायो गैस, एलपीजी से चलने वाले जेनरेटर चलाने पर अनुमति दी गई ।

38 स्थानों पर बेहद खराबAQI

दिल्ली में करीब 30 निगरानी स्टेशन ने एक्यूआई को ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बताया जिसमें इसका स्तर 300 से ऊपर था । आंकड़ों के अनुसार, दोपहर में 38 निगरानी स्टेशन में से 31 पर वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई, जबकि तीन स्टेशन में यह ‘गंभीर’ श्रेणी में थी ।

अगले दो दिन को लेकर अलर्ट

दिल्ली में मंगलवार और बुधवार को वायु गुणवत्ता के ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच जाने की आशंका है । शून्य से 50 के बीच एक्यूआई ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है ।

दूसरे चरण के प्रतिबंध लागू

निर्णय समर्थन प्रणाली (डीएसएस) के आंकड़ों से पता लगा है कि दिल्ली में सोमवार को वायु प्रदूषण में परिवहन उत्सर्जन का योगदान 15.6 प्रतिशत रहा, जबकि उद्योगों सहित अन्य कारकों का योगदान 23.3 प्रतिशत था. इससे पहले, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर में चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (जीआरएपी) के दूसरे चरण के प्रतिबंध लागू कर दिए ।

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