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राजेश बादल

संरक्षक

राजेश बादल (1 मार्च 1959, छतरपुर, मध्यप्रदेश)

चार दशकों से पत्रकारिता में चर्चित नाम हैं। जनसत्ता, नईदुनिया एवं नवभारत टाईम्स के बाद टीवी की दुनिया में वायस ऑफ़ इंडिया, इंडिया न्यूज, बैग फिल्म्स और आजतक चैनल से जुड़े रहे। “राज्यसभा टी वी” के कार्यकारी निदेशक रहते हुए इनके द्वारा तैयार कार्यक्रम ने सरकारी मीडिया के प्रति लोगों का नजरिया बदल दिया था । रेडियो पत्रकारिता में सौ से ज़्यादा वृतचित्र, दस हज़ार से ज़्यादा टीवी रिपोर्ट्स, पाँच हज़ार से ज़्यादा आलेख, बीस से ज़्यादा विश्वविद्यालयों में अतिथि व्याख्यान दिये। अमेरिका के अनेक शहरों में व्याख्यान और हिंदी के लिए समर्पित। एक दर्जन से अधिक सम्मान । चर्चित पुस्तकें – शब्द सितारे, पंडित परमानन्द , राजेन्द्र माथुर , कहाँ तुम चले गए  आदि ।

संरक्षक

सुधीर सक्सेना (वरिष्ठ पत्रकार)

सुधीर सक्सेना राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पत्रकार हैं, जिन्होंने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की पत्रकारिता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
1978 से आज तक उन्होंने धर्मयुग, दिनमान, रविवार, कल्पना, संडे ऑब्जर्वर, जनसत्ता, नवभारत टाइम्स, अमर उजाला, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, नवभारत, नई दुनिया, पत्रिका, देशबंधु, माया आदि पत्र-पत्रिकाओं में व्यापक लेखन किया है। , वागर्थ, पहल, बहुमत, अक्षर पर्व, समकालीन भारतीय साहित्य, बहुवचन आदि।
सुधीर सक्सेना के 14 काव्य संग्रह, विदेशी और भारतीय भाषाओं में अनुवाद की 11 पुस्तकें और कथेतर गद्य की अन्य 18 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
उन्होंने छत्तीसगढ़ में गांधी, मध्य प्रदेश और आदिवासी में स्वतंत्रता संग्राम, भूमकाल, छत्तीसगढ़ में मुक्तिसंग्राम और आदिवासी, गुंडाधुर एक योद्धा जैसी पुस्तकों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि पर विस्तार से लिखा है।
उन्हें माधवराव सप्रे पुरस्कार, पुश्किन पुरस्कार, वागीश्वरी पुरस्कार, प्रमोद वर्मा पुरस्कार और शमशेर पुरस्कार जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया है। इन दिनों वे पाक्षिक पत्रिका ‘दुनिया इन दिनों’ का संपादन कर रहे हैं।

सुधीर सक्सेना

पंकज चतुर्वेदी

संपादक

पंकज चतुर्वेदी, (एम.एससी, गणितऔर एम.जे.एम.सी.)

मूल रूप से पत्रकार हैं, सारे देश में घूमते हैं और पानी, तालाब जैसे विषयों पर देशभर के अखबारों, पत्रिकाओं में तीन हजार से ज्यादा आलेख लिख चुके हैं। लगभग सात साल तक एक महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक, एक साल तक जिला साक्षरता समिति, छतरपुर में जिला समन्वयक, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुछ कालेज व डाईट में आमंत्रित प्रवक्ता के साथ साथ राष्ट्रीय साक्षरता मिशन, यूनीसेफ, राज्य संसाधन केंद्र, डी.पी.ई.पी., सर्व शिक्षा अभियान, टेक महेन्द्रा आदि के लिए बतौर सलाहकार व सौ से ज्यादा कार्यशालाओं का संचालन करने वाले श्री चतुर्वेदी ने बच्चों के लिए कई पुस्तकें लिखी और अनूदित की हैं, जिनका प्रकाशन नेशनल बुक ट्रस्ट, सीबीटी, प्रथम बुक्स, रूम टू रीड, नवनीत प्रकाशन, रेमाधव प्रकाशन, वर्चुअस पब्लिकेशंस आदि ने किया है। आई.आई.टी., दिल्ली और राजीव गांधी जल मिशन द्वारा प्रकाशित शोध ग्रंथः ‘बुंदेलखंड का जल संकट’ में लेखक की सामग्री का संदर्भ और संलग्नक में दो आलेख। पत्रकार के तौर पर उनके शोध ‘क्या मुसलमान ऐसे होते हैं?’ (शिल्पायन प्रकाशन, नई दिल्ली), जल मांगता जीवन (आधार प्रकाशन) और ‘दफन होते दरिया (यश प्रकाशन, दिल्ली) पुस्तक के रूप में बेहद चर्चित रहे हैं। इन्हें कई पुरस्कार व सम्मान मिले हैं, जिनमें उल्लेखनीय हैं म.प्र. आंचलिक पत्रकार संघ द्वारा वर्ष 1991 के लिए माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता पुरस्कार, षष्ठम विश्व पर्यावरण महासम्मेलन, 1997 में राष्ट्रीय पर्यावरण सेवा सम्पान’, टीकमगढ़ जिला पत्रकार संघ द्वारा निवाड़ी में नवंबर, 92 में बुंदेलखंड की बेहतरीन पत्रकारिता के लिए सम्मान, चिल्ड्रन बुक ट्रस्ट द्वारा आयोजित छठी वार्षिक प्रतियोगिता में वर्ष 1999 के लिए ऐतिहासिक पारंपरिक’ संवर्ग (9-12 आयुवर्ग) का द्वितीय पुरस्कार, साक्षरता निकेतन, राज्य संसाधन केंद्र द्वारा आयोजित अखिल भारतीय नवसाक्षर लेखन प्रतियोगिता वर्ष 2001 02 में दो पांडुलिपियाँ पुरस्कृत, 7वें अखिल भारतय हिंदी साहित्य सम्मलेन, गाजियाबाद, वर्ष 1999 में युवा लेखक सम्मान’, राजीव गांधी एक्सीलेंसी अवार्ड कान्सटीट्यूशनल क्लब, नई दिल्ली, 29 जून 2011, एनसीईआरटी के लिए तैयार ऑडियो कार्यक्रम को श्रेष्ठ पुरस्कार, वर्ष 2008, कार्यकम वचेन्द्रीपाल आदि। आकाशवाणी, दूरदर्शन व कई टी वी चैनलों पर कई कार्यक्रमों में विशेषज्ञ के रूप में शामिल रहे श्री चतुर्वेदी ने एस.आर.सी, जामिया मिलिया इस्लामिया और एन.सी.ई.आर.टी. के लिए कई ऑडियो और वीडियो कार्यक्रम लिखे हैं।

रोहित कौशिक

संपादक

रोहित कौशिक

देश के लगभग सभी प्रमुख हिन्दी अखबारों के संपादकीय पृष्ठों पर निरन्तर लेखन।

अनेक आलेखों का उर्दू और पंजाबी में अनुवाद।

 लगभग सभी प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

प्रकाशित कृतियाँ- 1. 21वीं सदी: धर्म, शिक्षा, समाज और गाँधी (लेख संग्रह)  

2. इस खण्डित समय में (कविता संग्रह)

3. संवाद के दायरे में साहित्य (साक्षात्कार संग्रह)  

4. जगमग अँधेरे में लोकतंत्र (लेख संग्रह।

सहायक संपादक

मौ वाजिद अली

मौ वाजिद अली (21दिसंबर 1999, दिल्ली) हिन्दी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर दिल्ली विश्विद्यालय से किया। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में विधानसभा चुनाव और नगर निगम चुनाव में फील्ड एक्जीक्यूटिव के तौर पर काम किया। लेखक – लघु कथाएं “असद और रात के 3:45 बजे”, गज़लें और नज़्में – बेरंग दीवारें, तालीम, बरहक, मेहरम, मौत आदि।
प्रकाशित रचनाएं – अदम्य पत्रिका में प्रकाशित कविता “अशिक्षित महिलाएं”, एमेजॉन किंडल पर ई-बुक “बहरहाल।”

मौ वाजिद अली

प्रिंस कुमार

प्रिंस कुमार (ग्राफिक डिजाइनर)

हिंदी में 19 किताबें डिजाइन कीं (आभार अमरूद, अकाल में रोटी, गज्जू चलने लगा, गन्ना, गेंद की खुशी, गुड़ियों की नानी, झारखंड के भोले-बिसरे क्रांतिवीर, खुला संदूक, महेंद्र लाल, मेले में छुटकी, नन्हीं मछली माँ और नीली लहर, पहली यात्रा, पहले जैसी हंसी, रंग पंचमी, सूरज का बिल, उड़ी पतंग, उतवला मेंढक, 7 पूलो का सहर, मशीनों का सत्याग्रह) । कोंकणी में 14 किताबें डिजाइन की गईं (ए हाउस ऑफ बैम्बू, बब्लू की वीरता, छुटकी, फ्रेंड्स, ग्रीट व्हेन वी मीट, हरियाली और पानी, जीरो मीठे, वन डे, पंडित भीमसेन जोशी, रावण रेमेडी, सूरज चंदा साथ, द आउल बॉल, वी) अलग हैं, सफेद घोड़ा) । मैंने ग्राफिक डिजाइनर के रूप में India International & Science Festival 2023 (IISF2023) में भी काम किया, मैंने 7 भाषाओं (मलयालम, बांग्ला, भोजपुरी, मराठी, उर्दू, हिंदी, अंग्रेजी) में समाचार बुलेटिन डिजाइन किया, IISF2023 के हर दिन के समाचार बुलेटिन भी डिजाइन किए।

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