सोनम वांगचुक और उनके साथी अहिंसा की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
केसर सिंह
नेचरकीपर एयरलाइंस
” सत्य, अहिंसा और प्रेम किसी भी आंदोलन की सबसे बड़ी शक्ति हैं। लेह-लद्दाख की धरती पर उठे स्वर केवल स्थानीय नहीं, बल्कि पूरे देश की आत्मा से जुड़े हैं। जब कोई आंदोलन न्याय, पर्यावरण और अस्तित्व की रक्षा के लिए खड़ा होता है, तो उस पर दमन की छाया डालना लोकतांत्रिक मूल्यों और देशभक्ति दोनों का अपमान है।
सोनम वांगचुक वही व्यक्ति हैं जिन्होंने भारतीय सेना के लिए कठिन परिस्थितियों में गरम कमरे बनाए, SECMOL (Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh) की स्थापना कर शिक्षा और नवाचार को नई दिशा दी, और सौर ऊर्जा आधारित सीसे (Solar Heated Eco-friendly Buildings) तकनीक से पहाड़ों की कठोर ठंड को आसान बनाया। “
उन्होंने आइस स्तूप (Artificial Ice Stupa) भी विकसित किया—एक कृत्रिम बर्फ़ का ढांचा जो सर्दियों में पानी संचित कर गर्मियों में धीरे-धीरे पिघलता है और खेतों व बस्तियों को जीवन देता है। यह नवाचार आज वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय मिसाल माना जाता है।
ऐसे सेवाभावी और राष्ट्रहितैषी व्यक्ति पर गलत आरोप लगाना न केवल अन्याय है, बल्कि उनकी सेवा-भावना और नवाचार का भी अपमान है।
यदि सरकार हिंसा फैलाने वालों को छोड़कर सत्य और न्याय की राह पर खड़े लोगों पर कार्रवाई करेगी, तो यह लोकतंत्र की नींव कमजोर करेगा। इतिहास गवाह है कि दमन से सत्य दबता नहीं, और अधिक प्रखर होकर सामने आता है।
आज ज़रूरत है अहिंसा और प्रेम के रास्ते पर चलने की। आंदोलन को दबाने की जगह सुनना ही सच्ची देशभक्ति है।
सोनम वांगचुक और उनके साथी अहिंसा की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्हें कुचलना आंदोलन का नहीं, राष्ट्र की आत्मा का अपमान होगा।
सोनम वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया गया है, जैसे सरकार इंतजार कर रही हो कि हिंसा हो और पूरे आंदोलन को दबा दिया जाये.
एक बड़े प्रश्न को लेकर के आंदोलन है, अगर सरकार गलत आरोप लगा करके और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई न करके जो सही मुद्दों के लिए आंदोलनरत हैं, उन पर दमनात्मक कार्रवाई होगी तो इसका उल्टा रिएक्शन होगा।