साल 2026 के मार्च का पहला सप्ताह एक ऐसी खामोशी लेकर आया है जिसने पर्यावरणविदों और नीति-निर्धारकों की नींद उड़ा दी पंकज चतुर्वेदी कश्मीर की […]
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आस्था और वास्तविकता के बीच गंगा
ऋषिकेश–हरिद्वार में स्नान योग्य जल पर वैज्ञानिक सवाल अजय सहाय ऋषिकेश और हरिद्वार, जो कि गंगा नदी के हिमालयी उद्गम क्षेत्र के सबसे पवित्र और […]
Read moreगंगा से गोदावरी तक: ‘डूबते’ डेल्टा और संकट में भारत का भविष्य
भारत के प्रमुख नदी डेल्टा और उनके किनारे तेजी से डूब रहे हैं पंकज चतुर्वेदी भारत की नदियां वास्तव में करोड़ों लोगों के लिए जीवनदायिनी […]
Read moreक्या है जल सुरक्षा: भारत की चुनौतियां और समाधान
किसी भी देश की सुरक्षा सिर्फ़ उसकी सीमाओं से संबंधित कारकों पर ही निर्भर नहीं होती। पानी जैसे संसाधनों की स्थिति भी सुरक्षा को प्रभावित […]
Read moreनदियों की कहानी, समुदायों की ज़ुबानी : पूर्वोत्तर जनस्मृति का डिजिटल अभिलेख
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच, नदी किनारे बसे समुदाय मेमोरी मैप्स, ऑडियो नोट्स और तस्वीरों के माध्यम से मौखिक इतिहास और पारंपरिक अनुकूलन रणनीतियों […]
Read moreगंगा जल गुणवत्ता का वैज्ञानिक विश्लेषण
सरकारी मानकों के अनुसार फीकल कोलिफॉर्म, BOD और वास्तविक स्वच्छता की सच्चाई अजय सहाय गंगा नदी की स्वच्छता को समझने के लिए हमें भावनाओं से […]
Read moreजहर होता जीवनदायी जल
इंदौर , फिर गांधी नगर और उसके बाद देश एक कई शहरों से सार्वजनिक जल वितरण में दूषित मिलावट की बातें सामने आ रही हैं […]
Read moreदेवदार से गंगा तक
हिमालयी वनों की जैव-रासायनिक शक्ति, बैक्टीरियोफेज विज्ञान और गंगा की स्व-शुद्धिकरण क्षमता पर विकास का प्रभाव अजय सहाय हिमालय की गोद में स्थित देवदार (Cedrus […]
Read moreनदी पुनर्जीवन मॉडल
वैज्ञानिक आधार, डेटा रिकॉर्ड और 2047 के जल आत्मनिर्भर भारत का विज़न अजय सहाय भारत की नदियाँ केवल बहता हुआ जल नहीं बल्कि देश की […]
Read moreतीरे-तीरे नदिया: हर साल बाढ़ में डूबता भारत
प्राकृतिक असंतुलन और मानवीय हस्तक्षेप ने मिलकर भारत में बाढ़ के जोखिम को लगातार गहरा किया है। यह वार्षिक आपदा अब सामाजिक-आर्थिक क्षति का प्रमुख […]
Read moreझाग-मुक्त नदियाँ, स्वच्छ भविष्य
यमुना से लेकर ब्राज़ील तक जल-रसायन प्रदूषण की वैश्विक चुनौती और भारत का Vision 2047 अजय सहाय दिल्ली की यमुना नदी में इन दिनों झाग […]
Read moreउथली नदियों में कैसे समाता सावन-भादौ !
बिहार के वे जिले जो बाढ़ के लिए कुख्यात हैं पंकज चतुर्वेदी इस साल तो आषाढ़ से बादल बरसने शुरू हुए तो आश्विन माह में […]
Read moreनदियों के संरक्षण और स्वच्छता में स्त्रियों की भूमिका
नदियों के निकट की उर्वर भूमि, जल की निरंतर उपलब्धता, प्राकृतिक संपदा और संसाधन डॉ विभा नायक, दिल्ली विश्वविद्यालय नदियाँ किसी भी संस्कृति का प्राण […]
Read moreगंगा–यमुना का जीवित इकाई दर्ज़ा
25 वर्षों की न्यायिक, नीतिगत और पर्यावरणीय यात्रा अजय सहाय गंगा और यमुना नदियाँ भारतीय संस्कृति, सभ्यता, आस्था, कृषि और जीवनरेखा की प्रतीक मानी जाती […]
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