महासागरों की कार्बन सोखने की क्षमता, जलवायु परिवर्तन के कारण हो रही कमज़ोर

© UNDP/TCAP समुद्री जलस्तर में वृद्धि की वजह से तुवालु समेत अन्य देशों पर अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है. 29 अक्टूबर 2026जलवायु और […]

Read more
पर्वत तो धरती के लिए जल खजाना  हैं

पर्वत तो धरती के लिए जल खजाना  हैं

धीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी पहाड़ प्रकृति की प्राचीनतम संरचनाओं में से एक हैं, वे दृढ़ और राजसी हैं, वे आकाश के सामने खड़े हैं, इतने बड़े […]

Read more
इस बार देश के बड़े हिस्से में बरसात अनियमित हुई है । अल नीनो असर के चलते कम बरसात हुई और कुछ देर में ही आती वर्ष हुई । इसके चलते देश के पानी का रिजर्व स्टॉक बहुत कम रह गया है। मप्र और महाराष्ट्र सरकार ने अभी से कुछ पबनियाँ लगा दी हैं ताकि आने वाले दिनों के लिए कुछ पानी बचाया जा सके। यह लेख आने वाले जल संकट पर हैं ।

सावधान! जल संकट सिर पर खड़ा है

पंकज चतुर्वेदी जलवायु परिवर्तन और प्रशांत महासागर में अल नीनो की सक्रियता के कारण इस बार मानसून के दौरान बारिश का वितरण अत्यंत असमान रहा […]

Read more

जहरीली हवा की गिरफ्त में जिंदगी

रोहित कौशिक      यह दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि दिल्ली और एनसीआर की वायु गुणवत्ता एक बार फिर खराब श्रेणी में पहुंच गई है। हर साल […]

Read more
यह लेख नागालेंड में अमूर बाज के लिए एक इलाके को सायलेंट जॉन घोषित करने के शानदार पहल पर है , किस तरह एक विदेशी पक्षी हामरे पर्यावरण की रक्षा करता है और उसका आगमन जरूरी है , इस बात को समझने के बाद स्थानीय समाज ही अब इस पहल पर अमल करता है ।

मेहमान परिंदों के लिए खामोशी का पहरा

अक्तूबर का महीना आते ही नगालैंड के वोखा जिले का पांगती गांव आसमान की ओर देखने लगता है। हजारों किलोमीटर की थका देने वाली उड़ान […]

Read more
जिस साबरमती को आदर्श बताया जा रहा है, पहले उसकी असलियत देख लेनी चाहिए।

यमुना रिवर फ्रन्ट  : नदी है नहीं, महज ज़मीन का सौदा

पंकज चतुर्वेदी दिल्ली सरकार ने यमुना किनारे पल्ला से कालिंदी कुंज तक करीब 52 किलोमीटर लंबा रिवर फ्रंट बनाने की योजना को आगे बढ़ाया है। […]

Read more
महानगरों में अनिवार्य हो बायो-फेंसिंग : प्रकृति की सुरक्षा से ही सुरक्षित होगा भविष्य…

महानगरों में अनिवार्य हो बायो-फेंसिंग : प्रकृति की सुरक्षा से ही सुरक्षित होगा भविष्य…                        

डॉ. स्वप्निल व्यास          पर्यावरणविद, लेखक एवं प्राध्यापक इंदौर  तेजी से बढ़ते शहरीकरण, कंक्रीट के फैलते जंगल, घटते हरित क्षेत्र और प्रदूषित होते जलस्रोतों के […]

Read more
समाज को उजाड़ कर बस ना पाएगी लोकतक झील

समाज को उजाड़ कर बस ना पाएगी लोकतक झील

पंकज चतुर्वेदी देश को मणिपुर की चिंता तब ही होती है जब वहाँ से कोई हिंसा की बात हो लेकिन इस राज्य का अस्तित्व और […]

Read more