प्राकृतिक आपदाओं की आवाज सुनिए

रोहित कौशिक      हाल ही में नेपाल में आई बाढ़ ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पर्यावरण से जुड़े इन सवालों पर यदि गंभीरता […]

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हिमालयी सुरंगों के लिए “स्मार्ट टनल लाइफ-सेफ्टी सिस्टम” की जरूरत..

अजय सहाय हिमालयी क्षेत्रों में बार-बार ऐसी घटनाएँ सामने आती हैं कि सुरंग में अचानक पानी घुस गया, मलबा भर गया, सुरंग का हिस्सा धँस […]

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हालांकि इस बार अल नीनो के कारण भारत में बरसात का पेटर्न अनियमित है , बहुत से हिस्सों में बरसात कम हुई लेकिन जहँ भी बरसात हुई वहाँ बाढ़ ने जनजीवन को प्रभावित  किया । यह लेख बाढ़ के बढ़ते दायरे, उसके कारण आदि पर हैं । 

विशेष संपादकीय लेख | जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं      पंकज चतुर्वेदी बाढ़ का बढ़ता दायरा: कारण, विभीषिका और बचाव के उपाय: इस बार भले ही […]

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हिमालयी आपदा राहत केंद्र : “समय कम है—जीवन बचाना सर्वोच्च लक्ष्य”

अजय सहाय हिमालय युवा वलित पर्वत प्रणाली है। तीखी ढाल, भूकंपीय सक्रियता, कमजोर एवं दरारयुक्त चट्टानें, हिमनद, हिमनदीय झीलें, अत्यधिक वर्षा, बादल फटना, भूस्खलन और […]

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जलवायु परिवर्तन की मार से बेहाल सागर

पंकज चतुर्वेदी भारत सरकार के पृथ्वी-विज्ञान मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र बहुत अधिक प्रभावित हो रहे हैं। समझना होगा  कि  […]

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उत्तराखंड का हिमालय…

अजय सहाय उत्तराखंड का हिमालय आज जलवायु परिवर्तन, पीछे हटते हिमनदों, बढ़ती हिमनदीय झीलों, अत्यधिक वर्षा, बादल फटने, भूस्खलन और मलबा-प्रवाह जैसे कई खतरों का […]

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हिमालय में नदी को केवल उसके आज के बहते जल से पहचानना एक गंभीर नियोजन भूल हो सकती है। नदी का वर्तमान चैनल उसका पूरा प्राकृतिक अधिकार क्षेत्र नहीं होता। हजारों वर्षों में नदी अपना रास्ता बदलती है, किनारों को काटती है, नए चैनल बनाती है और अचानक बाढ़ के समय पुराने रास्तों में वापस प्रवेश कर सकती है। इसी तरह पहाड़ी नाले अपने मुहाने पर बार-बार पत्थर, बोल्डर, बजरी, रेत और मिट्टी जमा करके पंखे के आकार का भू-भाग—मलबा-पंख (debris/alluvial fan) बनाते हैं।

अजय सहाय ऐसी जमीन अक्सर अपेक्षाकृत समतल होती है, इसलिए हिमालय में होटल, बाजार, स्कूल, सड़क और कॉलोनी बनाने के लिए आकर्षक दिखाई देती है। […]

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नेपाल की ताजा त्रासदी भारतीय उपमहाद्वीप में हिमालय की गोद में बसे राज्यों में गल रहे ग्लेशियर और उससे बन रही झीलों को ले कर बड़ी चेतावनी हैं । इंसभी की निगरानी और उनको फटने से रोकने के लिए त्वरित ढोस योजनाओं की जरूरत है । यह लेख इन्हीं वैज्ञानिक तथ्यों पर है 

हिमालय की चेतावनी: पिघलती बर्फ, प्रदूषित झीलें पंकज चतुर्वेदी नेपाल की इस ताज़ा आपदा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हिमालय अब और अधिक मानवीय […]

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