पीलीभीत से चल कर पूर्वाञ्चल में गंगा में मिलने वाली गोमती नदी पर संकट का अर्थ है मध्य भारत के बड़े हिस्से में जल-जनजीवन- खेती- पर भयावह असर । गोमती की दिक्कत है कि उसकी अधिकांश सहायक नदियां सूख गई, जबकि गोमती की विशालता उसकी सखी-सहेलियों पर ही निर्भर है । यह लेख इसी मसले पर है ।

सहायक नदियों के सूखने से गोमती सूखता आंचल पंकज चतुर्वेदी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को अपने आंचल में समेटे बहने वाली गोमती […]

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यूरोप में जंगलों की आग ने खड़े किए कई सवाल

रोहित कौशिक      जलवायु परिवर्तन के कारण पूरे विश्व में कई तरह की समस्याएं पैदा हो रही हैं। ये समस्याएं अंततः हमारी जिंदगी पर किसी […]

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भारत: आन्ध्र प्रदेश में मैन्ग्रोव बने तटीय सुरक्षा कवच…

© UNDP India/Samuel Bathula पानी के किनारे उभरी जड़ों वाली मैन्ग्रोव पेड़ों की एक कतार. 4 अगस्त 2026 जलवायु और पर्यावरण भारत के आन्ध्र प्रदेश राज्य के […]

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गर्मी और स्वास्थ्य

महत्वपूर्ण तथ्यों गर्मी एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय और व्यावसायिक स्वास्थ्य खतरा है। गर्मी से होने वाला तनाव मौसम संबंधी मौतों का एक प्रमुख कारण है और […]

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पर्यावरण के विध्वंस पर विकास की मुहर नहीं लग सकती

पंकज चतुर्वेदी विकास की अंधी दौड़ और पर्यावरण संरक्षण के बीच लंबे समय से चल रहे टकराव के बीच देश के सर्वोच्च न्यायालय का ताजा […]

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प्रकृति के संरक्षण से ही बचेगा जीवन.

   बदलते हुए समय में हम प्रकृति और पर्यावरण का महत्व तो समझ गए हैं लेकिन गंभीरता के साथ प्रकृति को संरक्षित करने के प्रयास […]

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हर साल एक फीसदी घट रहा है असम

पंकज चतुर्वेदी यदि असम सरकार के जल संसाधन विभाग के आंकड़ों को भरोसेमंद माने तो  सन 1950 से अभी तक राज्य की 427,000 हैक्टेयर भूमि […]

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जलवायु संकट: हर दिशा से ख़तरे के संकेत

© Unsplash/Michael Held पुर्तगाल की पहाड़ियों पर धधकती जंगल की आग. (फ़ाइल फ़ोटो) जलवायु और पर्यावरण संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को चेतावनी […]

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