जंगलों की आग से जहरीली हो रही हवा

जंगलों की आग से जहरीली हो रही हवा

रोहित कौशिक      औद्योगीकरण और मानवीय गतिविधियों के कारण हवा प्रदूषित होने की खबरें अक्सर प्रकाश में आती रहती हैं लेकिन जंगलों की आग भी […]

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भारत में डिजिटल तकनीकों, सस्ते इंटरनेट और स्मार्टफोन की सुलभता ने दैनिक जीवन को आसान तो बनाया है, लेकिन इसके साथ ही एक गहरा और अदृश्य संकट भी खड़ा कर दिया है। इसे डिजिटल कचरा कहा जाता है। हर दिन हमारे मोबाइल और कंप्यूटर पर आने वाले अनगिनत अनावश्यक ईमेल, वॉट्सऐप पर मिलने वाले प्रचार संदेश, विज्ञापनों के ढेर और क्लाउड पर संग्रहित बेकार डेटा इस नए कचरे का निर्माण करते हैं। भौतिक कचरे की तरह यह आँखों से दिखाई नहीं देता, इसलिए लोग इसे हानिरहित मान लेते हैं। जबकि हकीकत यह है कि यह अदृश्य कचरा हमारे देश के ऊर्जा संसाधनों का भारी व्यय कर रहा है और पर्यावरण पर कार्बन उत्सर्जन का एक गहरा बोझ डाल रहा है। यह लेख इस अनछुए विषय पर है ।

फिजूल के संदेश बढ़ाते  पर्यावरणीय  संकट

पंकज चतुर्वेदी आम भारतीय इन दिनों व्हाट्सएप, टेलीग्राम और ईमेल पर ऐसे संदेशों से परेशान  हैं जो या तो अग्रेषित होते हैं , व्यापारिक उद्देश्य […]

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धरती के बढ़ते तापमान का सीधा असर गलेशयर पर हो रहा है और इन बर्फ के बादलों की गलने से नदियों में प्रवाह बढ़ रहा है और अनियमित भी हो रहा है । यह लेख इसी चिंता पर है

बढ़ती तपन के  गलन में  हो  रहे इजाफे से अनियंतिरत होतीं हिमालय की नदियां

पंकज चतुर्वेदी धरती के बढ़ते तापमान का सबसे प्रत्यक्ष और चिंताजनक असर आज हिमालय के ग्लेशियरों पर दिखाई दे रहा है। दुनिया का तीसरा ध्रुव […]

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256 मौतें, एक सवाल: आखिर कब बचेंगे ओडिशा के गजराज?

पंकज चतुर्वेदी ओडिशा में 22 सितंबर 2026, मंगलवार को विधानसभा में जब राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने एक लिखित सवाल […]

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निकोबार में खनन की अनुमति के साथ पारिस्थितिकी और जनजातियों पर मंडराता संकट

पंकज चतुर्वेदी अंडमान और निकोबार द्वीप समूह अपनी प्राचीन जैव-विविधता, अद्वितीय उष्णकटिबंधीय वर्षावनों और अति-संवेदनशील आदिम जनजातियों के लिए विश्वभर में जाने जाते हैं। हाल […]

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धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर पर इन दिनों जलवायु परिवर्तन का साया लगातार गहराता जा रहा है।

धरती के स्वर्ग पर गहराता जलवायु परिवर्तन का साया

पंकज चतुर्वेदी धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर पर इन दिनों जलवायु परिवर्तन का साया लगातार गहराता जा रहा है। जिस घाटी की पहचान उसकी […]

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विश्व आवास दिवस (5 अक्टूबर) पर विशेष

सबको घर चाहिए, पर हर जगह एक-सा घर नहीं

पंकज चतुर्वेदी भारत में करोड़ों लोगों को घर की ज़रूरत है और इसे टाला नहीं जा सकता। लेकिन घर बनाते समय यह भी देखना होगा […]

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विश्व प्रकृति दिवस_ Earth in Our Hands

प्रकृति का बढ़ता क्रंदन: आत्ममंथन की घड़ी

पंकज चतुर्वेदी 3 अक्टूबर का दिन आज के दौर में एक विशेष चेतावनी लेकर आता है—यह हमें ठहरकर यह सोचने पर विवश करता है कि हमने […]

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