अब दिखने लगा पर्यावरण पर बढ़ते तापमान का असर

रोहित कौशिक      वैज्ञानिक कई वर्षों से यह चेतावनी दे रहे थे कि भविष्य में बढ़ते तापमान के कारण कई तरह के पर्यावरणीय बदलाव होंगे। […]

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झेलम नदी इन दिनों घाटी और जम्मू में तबाही मचाए है । यह नदी  अभी कुछ हफ्ते पहले तक समय से पहले जल स्तर गिरने के लिए चिंता का कारण थी , अचानक इसके रौद्र रूप लेने का असल कारण कुदरती नहीं , मानवीय  दखल है । यह आलेख इसी मसले पर है । 

आखिर क्यों  बिगड़ैल हो जाती है झेलम? पंकज चतुर्वेदी जो नदी अभी कुछ हफ्तों  पहले तक सुस्त , उदास सी थी, अचानक पहली बरसात में ही […]

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कृषि जलवायु परिवर्तन के अनुकूल ढल रही है

VTV.vn – जलवायु की बिगड़ती परिस्थितियों के कारण कई क्षेत्रों के किसानों को फसलें बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, वे ऐसी किस्मों […]

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युद्ध, जलवायु संकट और खेती का भविष्य

पवन नागर वर्तमान समय में दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहाँ एक ओर विज्ञान और तकनीक नई ऊँचाइयों को छू रहे हैं, […]

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सुरक्षित बिजली के रूप में  सौर ऊर्जा को बढ़ावा देते समय हम भूल जा रहे हैं कि आने वाले सालों में इसके संयत्रों से निकलने वाला कचरा सर दर्द बनेगा । अभी तक इसके कचरे के निबटारे के कोई भी वैश्विक उपाय नहीं खोजे जा सके । यह लेख इसी मसले पर हैं 

स्वच्छ ऊर्जा की खोज में कहीं भारी न पड़ जाए यह कचरा पंकज चतुर्वेदी सौर  ऊर्जा को लंबे समय से जीवाश्म ईंधन के विकल्प के […]

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शहरों की झीलों में माइक्रोप्लास्टिक का बढ़ता प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय बन गया है, जिसके मानव स्वास्थ्य और जलीय जीवन पर विनाशकारी प्रभाव पड़ रहे हैं। शोधों से पता चला है कि ये छोटे प्लास्टिक कण विभिन्न स्रोतों से झीलों तक पहुँच रहे हैं, और जलवायु परिवर्तन इस समस्या की गंभीरता को और बढ़ा रहा है। यह लेख इसी विषय पर हाल ही मे हुए शोध पर केंद्रित है । 

झीलों को बीमार कर रहा है माइक्रोप्लास्टिक पंकज चतुर्वेदी अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘एनवायर्नमेंटल साइंस: एडवांसेज’ के ताजे अंक में श्रीनगर की  डल झील में माइक्रोप्लास्टिक […]

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जैव ईंधन : स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत की नई राह।(10 अगस्त दिवस विशेष आलेख)

सुनील कुमार महला हर वर्ष 10 अगस्त को विश्व जैव ईंधन दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य पेट्रोलियम जैसे जीवाश्म ईंधनों के विकल्प के रूप […]

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पीलीभीत से चल कर पूर्वाञ्चल में गंगा में मिलने वाली गोमती नदी पर संकट का अर्थ है मध्य भारत के बड़े हिस्से में जल-जनजीवन- खेती- पर भयावह असर । गोमती की दिक्कत है कि उसकी अधिकांश सहायक नदियां सूख गई, जबकि गोमती की विशालता उसकी सखी-सहेलियों पर ही निर्भर है । यह लेख इसी मसले पर है ।

सहायक नदियों के सूखने से गोमती सूखता आंचल पंकज चतुर्वेदी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को अपने आंचल में समेटे बहने वाली गोमती […]

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