हवा में घुला परागकणों का जहर

दिल्ली और आसपास के इलाकों में गर्मी की आहट के साथ ही हवा का मिजाज बदलने लगा है पंकज चतुर्वेदी मई महीने के पहले हफ्ते […]

Read more

हम आदिवासियों के स्वास्थ्य की जड़ें जंगल में हैं​

कर्नाटक के आदिवासियों के लिए स्वास्थ्य और जीवनयापन के मुद्दे, जंगलों से उनके गहरे रिश्ते और विस्थापन के इतिहास में निहित हैं। इसलिए स्वास्थ्य का […]

Read more

अरावली की महानता ऊंचाई से नही-भौगोलिक, संस्कृति और आध्यात्मिकता से आंकी जाए

अरावली का महत्व उसमें पाए जाने वाले खनिज पदार्थ से भी बढ़ जाता है। पदम चंद गांधी अरावली पर्वतमाला दुनिया के प्राचीनतम वलित (फोल्डेड) पर्वत […]

Read more

जैनधर्म की पर्यावरणीय नैतिकता में पारिस्थितिकी स्थिरता और करुणा का सिद्धान्त

‘परस्परोपग्रहो जीवानाम्‘ जो पारिस्थितिकी विज्ञान का यथार्थ है। पदमचन्द गांधी आज सम्पूर्ण विष्व में पर्यावरण, प्रदूषण और चेतना चेतावनी का विषय बन गया है। मनुष्य […]

Read more

जब नदियाँ छोड़ने लगीं ज़हरीली सांस

ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ता खतरा अजय सहाय नदियों को सदियों से “शीतलता, जीवन और संतुलन” का प्रतीक माना गया है, क्योंकि पारंपरिक रूप से उनका […]

Read more

एनवीस्टेट्स इंडिया: पर्यावरण सांख्यिकी संबंधी अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न, 2026

हितधारकों की क्षमता बढ़ाने और पर्यावरणीय निर्णय प्रक्रिया सुदृढ़ बनाने हेतु संरचित विषयगत ज्ञान संसाधन सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 2018 में संयुक्त राष्ट्र […]

Read more

हीट डोम का कहर

क्या विकास के नाम पर हमने प्रकृति से खिलवाड़ किया अजय सहाय हीट डोम (Heat Dome) आज दुनिया के सबसे खतरनाक जलवायु संकटों में से […]

Read more

इस झुलसन का दोष अकेला जलवायु परिवर्तन पर मत मढ़ो !

इस समय  चरम गर्मी और अव्यवस्थित मौसम की मार से मानवता कराह रही है पंकज चतुर्वेदी भारत में मौसम का बदलता मिजाज और वैशाख के […]

Read more