विश्व वर्षावन दिवस (22 जून): महत्व, उद्देश्य, थीम और संरक्षण के उपाय।

वर्षावनों के संरक्षण तथा पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 22 जून को विश्व वर्षावन दिवस (वर्ल्ड रेन फोरेस्ट डे) मनाया जाता […]

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चमगादड़ अक्सर डर या अंधविश्वास का विषय रहे हैं, लेकिन वास्तव में ये हमारे पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के सबसे महत्वपूर्ण नायकों में से एक हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण चरम  मौसम, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में उनकी भूमिका को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है । यह लेख इस विषय पर हाल के शोध पर आधारित है । 

पारिस्थितिकी के अदृश्य नायक पर जलवायु परिवर्तन का प्रहार पंकज चतुर्वेदी प्रकृति के जटिल ताने-बाने में हर जीव की भूमिका पूर्व-निर्धारित है, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण […]

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बंजर होता बुंदेलखंड

रवीन्द्र व्यास    “भूमि को पुनर्स्थापित करो, अवसरों को खोलो” के थीम के साथ मनाए जा रहे विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस ने बुंदेलखंड […]

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महिलाओं के सिर पर मटका, उद्योगों के हाथ में पानी अन्याय की नई रेखा

भारत में भूजल की स्थिति दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है और इस संकट की ओर कई दशकों से अनदेखी हो रही है। नेशनल ग्रीन […]

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यह कहना अतिषियोक्ति नहीं होगा कि गोवा का अस्तित्व  मैनग्रोव वनों के कारण है , जिसने वहाँ शहरी इलाके में खारे पानी को रोका हुआ है – साथ ही भूमि कटाव, जल- जीवन का आधार भी  मैनग्रोव ही है । पिछले कुछ सालों में कथित विकास के नाम अपर वहाँ  मैनग्रोव को उजाड़ा जा रहा है और यह गोवा के अस्तित्व पर खतरे कि चेतावनी है । यह लेख इसी विषय पर है । 

उजड़ते मैनग्रोव वन से गोवा में तबाही का खतरा पंकज चतुर्वेदी गोवा अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, नदियों के सघन जाल और समृद्ध जैव-विविधता के लिए विश्व […]

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आईआईटी धनबाद (आईआईटी-आईएसएम) के पर्यावरण विज्ञान इंजीनियरिंग विभाग के एक नवीनतम और व्यापक शोध ने इस कड़वी हकीकत को वैज्ञानिक प्रामाणिकता के साथ देश के सामने रखा है। इस अध्ययन के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि पिछले 50 वर्षों के भीतर गंगा नदी बेसिन की करीब 18 लाख छोटी जलधाराएं (स्ट्रीम्स) पूरी तरह से विलीन हो चुकी हैं। यह लेख इस भयावह स्थति से गंगा को उबारने के सुझाव पर हैं । 

गंगा की सूखती असंख्य धाराएं पंकज चतुर्वेदी भारतीय उपमहाद्वीप के भू-पारिस्थितिकी और जनजीवन की नियंता रही गंगा नदी का अस्तित्व आज एक अभूतपूर्व और अदृश्य […]

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हवामान परीवर्तन और कृषि संकट के जलती आग में झुलसती खेती

यह लेख लिखते समय मैं बेहद व्याकुल और बेचैन था। “हवामान परिवर्तन की आग में झुलसती खेती” विषय पर लिखते हुए अचानक मेरी माँ का […]

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प्रशांत की तपिश और मानसून की परीक्षा: सुपर अल-नीनो की चुनौती

पंकज चतुर्वेदी सुपर अल-नीनो जैसी गंभीर जलवायु घटना का खतरा हमारे देश के सर पर खड़ा है । प्राकृतिक आपदा से जूझने के लिए देश […]

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