हिमालय में नदी को केवल उसके आज के बहते जल से पहचानना एक गंभीर नियोजन भूल हो सकती है। नदी का वर्तमान चैनल उसका पूरा प्राकृतिक अधिकार क्षेत्र नहीं होता। हजारों वर्षों में नदी अपना रास्ता बदलती है, किनारों को काटती है, नए चैनल बनाती है और अचानक बाढ़ के समय पुराने रास्तों में वापस प्रवेश कर सकती है। इसी तरह पहाड़ी नाले अपने मुहाने पर बार-बार पत्थर, बोल्डर, बजरी, रेत और मिट्टी जमा करके पंखे के आकार का भू-भाग—मलबा-पंख (debris/alluvial fan) बनाते हैं।

अजय सहाय ऐसी जमीन अक्सर अपेक्षाकृत समतल होती है, इसलिए हिमालय में होटल, बाजार, स्कूल, सड़क और कॉलोनी बनाने के लिए आकर्षक दिखाई देती है। […]

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नेपाल की ताजा त्रासदी भारतीय उपमहाद्वीप में हिमालय की गोद में बसे राज्यों में गल रहे ग्लेशियर और उससे बन रही झीलों को ले कर बड़ी चेतावनी हैं । इंसभी की निगरानी और उनको फटने से रोकने के लिए त्वरित ढोस योजनाओं की जरूरत है । यह लेख इन्हीं वैज्ञानिक तथ्यों पर है 

हिमालय की चेतावनी: पिघलती बर्फ, प्रदूषित झीलें पंकज चतुर्वेदी नेपाल की इस ताज़ा आपदा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हिमालय अब और अधिक मानवीय […]

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भूमि पुनर्बहाली के कारगर प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र सम्मान

© UNEP/Todd Brown ब्राज़ील में मवेशी पालन और फ़सल बहाली से जुड़ी एक परियोजना सेराडो की रक्षा में मदद कर रही है, जो दुनिया की सबसे […]

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क्यों कामयाब नहीं है नमामि गंगे परियोजना गंगा की  निर्मलता को नारों नहीं संकल्प की जरूरत

पंकज चतुर्वेदी आस्था के केंद्र बनारस में गंगा और उससे मिलने वाली  सहायक धाराओं – वरुणा  और असि में  पारंपरिक देशी मछलियों  का मरना, उनकी […]

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क्या प्रदूषण से खराब हो रहा है हमारा भोजन ?

रोहित कौशिक      प्रदूषण हमारी जिंदगी पर कई तरह से प्रभाव डाल रहा है। एक तरफ आद्यौगिक इकाइयां पर्यावरण और जल को प्रदूषित कर रही […]

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बढती हरियाली, घटते जंगल हर हरियाली जंगल नहीं होती

पंकज चतुर्वेदी दिल्ली में बगैर किसी अनुमति के हर घंटे औसतन पांच पेड़ काटे जा रहे हैं, वह भी बगैर किसी वैधानिक अनुमति के। दिल्ली […]

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समाज को उजाड़ कर बस ना पाएगी लोकतक झील

पंकज चतुर्वेदी देश को मणिपुर की चिंता तब ही होती है जब वहाँ से कोई हिंसा की बात हो लेकिन इस राज्य का अस्तित्व और […]

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