प्रकृति के संरक्षण से ही बचेगा जीवन.

   बदलते हुए समय में हम प्रकृति और पर्यावरण का महत्व तो समझ गए हैं लेकिन गंभीरता के साथ प्रकृति को संरक्षित करने के प्रयास […]

Read more

हर साल एक फीसदी घट रहा है असम

पंकज चतुर्वेदी यदि असम सरकार के जल संसाधन विभाग के आंकड़ों को भरोसेमंद माने तो  सन 1950 से अभी तक राज्य की 427,000 हैक्टेयर भूमि […]

Read more

जलवायु संकट: हर दिशा से ख़तरे के संकेत

© Unsplash/Michael Held पुर्तगाल की पहाड़ियों पर धधकती जंगल की आग. (फ़ाइल फ़ोटो) जलवायु और पर्यावरण संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को चेतावनी […]

Read more

झूम खेती के संकट से निकलने का रास्ता कैसे खोज रहे हैं मणिपुर के किसान?

बढ़ती आबादी, भूमि पर बढ़ते दबाव और बदलते पर्यावरण के बीच मणिपुर के किसानों के लिए झूम खेती अब पहले जितनी प्रभावी नहीं रही है। […]

Read more

धरती तप रही है : बढ़ती गर्मी और मानव जीवन पर मंडराता खतरा।

सुनील कुमार महला  आज धरती का तापमान लगातार बढ़ता ही चला जा रहा है। वास्तव में, कहना ग़लत नहीं होगा कि वैश्विक तापमान में लगातार […]

Read more

हरित भविष्य की राह: प्रकृति संरक्षण का संकल्प।(28 जुलाई विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर विशेष आलेख)

प्रतिवर्ष 28 जुलाई को जैव विविधता के संरक्षण, विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित किए जाने,पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने तथा आने वाली पीढ़ियों […]

Read more

पिछले दिनों  गुजरात के नवसारी सहित कई शहरों में अचानक इतनी बरसात हुई कि शहर दरिया बन गए , जिस देश में अल नीनो असर के कारण कम बरसात की संभावना थी, वहाँ दस हजार किलोमीटर के बादल डेरा डाले हैं ।  पैसिफिक डिकेडल ऑसीलेशन किस तरह मानसून को भयावह बना रहा है , यह लेख इसी वैज्ञानिक मसले पर है।

महा-बादलों की ज़द में भारत: गुजरात जल-प्रलय से देश के ख़तरे की घंटी पंकज चतुर्वेदी प्रशांत महासागर की अगाध गहराइयों में घटने वाली समुद्री तापीय […]

Read more

अभी एक हफ्ते भी बरसात हुई नहीं और मीडिया ने इसे विध्वंश करने वाला, तबाही लाने वाला जैसे शब्दों से नवाज दिया । असल मने हमारी सोच मानसून को ले कर व्यापक होन चाहिए । यह लेख इसी विषय पर है ।

मानसून को खलनायक न बनाएं पंकज चतुर्वेदी सुपर अल नीनो के चलते जो देश अभी एक हफ्ते पहले तक  सूखे, कमजोर अर्थ व्यवस्था, संभावित बिजली संकट […]

Read more