भारत का हरित पथ

संरक्षण से जलवायु कार्रवाई तक परिचय इक्कीसवीं सदी में विकास और पर्यावरण के बीच संबंध नीति-विमर्श के हाशिए से उठ…

ग्रामीण भारत में प्लास्टिक कचरे का हिसाब करना क्यों जरूरी है?

ग्रामीण भारत में हर साल लाखों टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है, जिसका आकलन नहीं होता। ऐसे में ग्रामीण स्तर…

बेमौसम बारिश का कहर: किसानों की मेहनत पर प्रकृति की मार ।

उत्तर भारत के कई हिस्सों में बेमौसम मौसम का कहर देखने को मिल रहा है। सुनील कुमार महला भारत विश्व…

पर्यावरण संरक्षण: एक चुनौती

पर्यावरणविद व रिपोर्टर हिर्देश जोशी ने महत्वपूर्ण जानकारी व सुझाव दिए हिंडन जल बिरादरी के “पर्यावरण संरक्षण: एक चुनौती” विषय…

कम उपभोग, ज्यादा संरक्षण: यही है शून्य अपशिष्ट का मंत्र

30 मार्च ‘अंतरराष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस’ सुनील कुमार महला हर वर्ष 30 मार्च को ‘अंतरराष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस’ मनाया जाता…

झेलम का मौन: उत्तर भारत की जल सुरक्षा पर मंडराता संकट

साल 2026 के मार्च का पहला सप्ताह एक ऐसी खामोशी लेकर आया है जिसने पर्यावरणविदों और नीति-निर्धारकों की नींद उड़ा…

विश्व मौसम विज्ञान संगठन की ताज़ा रिपोर्ट-2026

तपती धरती और बढ़ता संकट: क्या हम चेतेंगे ? सुनील कुमार महला लगातार अंधाधुंध दोहन और प्रकृति के प्रति लापरवाही…

आस्था और वास्तविकता के बीच गंगा

ऋषिकेश–हरिद्वार में स्नान योग्य जल पर वैज्ञानिक सवाल अजय सहाय ऋषिकेश और हरिद्वार, जो कि गंगा नदी के हिमालयी उद्गम…

वन प्रबंधन के लिए समुदाय व शासन में बेहतर समन्वय की जरूरत

झारखंड में सामुदायिक वन अधिकार के तहत ग्रामसभाएं जंगल के संरक्षण और प्रबंधन की जिम्मेदारी निभा रही हैं। इससे जंगल…

जल संकट से जल आत्मनिर्भरता तक: विश्व जल दिवस 2026 का विज़न

वैश्विक जल संकट केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं बल्कि अस्तित्व, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिरता से जुड़ा एक जटिल संकट बन…

मार्च में दिसंबर की दस्तक : बिखरता ऋतुचक्र

इस विचित्र कोहरे के पीछे के वैज्ञानिक कारणों को समझना अनिवार्य पंकज चतुर्वेदी भारतीय कैलेंडर में मार्च का महीना उस…