इटली के पीडमॉन्ट इलाके में अल्बा की पहाड़ियों पर हर साल एक अक्टूबर को एक पुरानी परंपरा शुरू होती है। 'ट्रिफोलाऊ'

जब ट्रफल भी जलवायु परिवर्तन की चपेट में आ गए

धीरज चतुर्वेदी इटली के पीडमॉन्ट इलाके में अल्बा की पहाड़ियों पर हर साल एक अक्टूबर को एक पुरानी परंपरा शुरू होती है। ‘ट्रिफोलाऊ’ कहे जाने […]

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ह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि गोवा का अस्तित्व मैनग्रोव वनों के कारण है , जिसने वहाँ शहरी इलाके में खारे पानी को रोका हुआ है - साथ ही भूमि कटाव, जल- जीवन का आधार भी मैनग्रोव ही है । पिछले कुछ सालों में कथित विकास के नाम पर वहाँ मैनग्रोव को उजाड़ा जा रहा है और यह गोवा के अस्तित्व पर खतरे की चेतावनी है ।

उजड़ते मैनग्रोव वन से गोवा  में तबाही का खतरा

पंकज चतुर्वेदी गोवा अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, नदियों के सघन जाल और समृद्ध जैव-विविधता के लिए विश्व विख्यात है, लेकिन आज इसकी सबसे मजबूत ढाल […]

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महासागरों की कार्बन सोखने की क्षमता, जलवायु परिवर्तन के कारण हो रही कमज़ोर

© UNDP/TCAP समुद्री जलस्तर में वृद्धि की वजह से तुवालु समेत अन्य देशों पर अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है. 29 अक्टूबर 2026जलवायु और […]

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पर्वत तो धरती के लिए जल खजाना  हैं

पर्वत तो धरती के लिए जल खजाना  हैं

धीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी पहाड़ प्रकृति की प्राचीनतम संरचनाओं में से एक हैं, वे दृढ़ और राजसी हैं, वे आकाश के सामने खड़े हैं, इतने बड़े […]

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इस बार देश के बड़े हिस्से में बरसात अनियमित हुई है । अल नीनो असर के चलते कम बरसात हुई और कुछ देर में ही आती वर्ष हुई । इसके चलते देश के पानी का रिजर्व स्टॉक बहुत कम रह गया है। मप्र और महाराष्ट्र सरकार ने अभी से कुछ पबनियाँ लगा दी हैं ताकि आने वाले दिनों के लिए कुछ पानी बचाया जा सके। यह लेख आने वाले जल संकट पर हैं ।

सावधान! जल संकट सिर पर खड़ा है

पंकज चतुर्वेदी जलवायु परिवर्तन और प्रशांत महासागर में अल नीनो की सक्रियता के कारण इस बार मानसून के दौरान बारिश का वितरण अत्यंत असमान रहा […]

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जहरीली हवा की गिरफ्त में जिंदगी

रोहित कौशिक      यह दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि दिल्ली और एनसीआर की वायु गुणवत्ता एक बार फिर खराब श्रेणी में पहुंच गई है। हर साल […]

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यह लेख नागालेंड में अमूर बाज के लिए एक इलाके को सायलेंट जॉन घोषित करने के शानदार पहल पर है , किस तरह एक विदेशी पक्षी हामरे पर्यावरण की रक्षा करता है और उसका आगमन जरूरी है , इस बात को समझने के बाद स्थानीय समाज ही अब इस पहल पर अमल करता है ।

मेहमान परिंदों के लिए खामोशी का पहरा

अक्तूबर का महीना आते ही नगालैंड के वोखा जिले का पांगती गांव आसमान की ओर देखने लगता है। हजारों किलोमीटर की थका देने वाली उड़ान […]

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जिस साबरमती को आदर्श बताया जा रहा है, पहले उसकी असलियत देख लेनी चाहिए।

यमुना रिवर फ्रन्ट  : नदी है नहीं, महज ज़मीन का सौदा

पंकज चतुर्वेदी दिल्ली सरकार ने यमुना किनारे पल्ला से कालिंदी कुंज तक करीब 52 किलोमीटर लंबा रिवर फ्रंट बनाने की योजना को आगे बढ़ाया है। […]

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