यह लेख नागालेंड में अमूर बाज के लिए एक इलाके को सायलेंट जॉन घोषित करने के शानदार पहल पर है , किस तरह एक विदेशी पक्षी हामरे पर्यावरण की रक्षा करता है और उसका आगमन जरूरी है , इस बात को समझने के बाद स्थानीय समाज ही अब इस पहल पर अमल करता है ।

मेहमान परिंदों के लिए खामोशी का पहरा

अक्तूबर का महीना आते ही नगालैंड के वोखा जिले का पांगती गांव आसमान की ओर देखने लगता है। हजारों किलोमीटर की थका देने वाली उड़ान […]

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जिस साबरमती को आदर्श बताया जा रहा है, पहले उसकी असलियत देख लेनी चाहिए।

यमुना रिवर फ्रन्ट  : नदी है नहीं, महज ज़मीन का सौदा

पंकज चतुर्वेदी दिल्ली सरकार ने यमुना किनारे पल्ला से कालिंदी कुंज तक करीब 52 किलोमीटर लंबा रिवर फ्रंट बनाने की योजना को आगे बढ़ाया है। […]

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महानगरों में अनिवार्य हो बायो-फेंसिंग : प्रकृति की सुरक्षा से ही सुरक्षित होगा भविष्य…

महानगरों में अनिवार्य हो बायो-फेंसिंग : प्रकृति की सुरक्षा से ही सुरक्षित होगा भविष्य…                        

डॉ. स्वप्निल व्यास          पर्यावरणविद, लेखक एवं प्राध्यापक इंदौर  तेजी से बढ़ते शहरीकरण, कंक्रीट के फैलते जंगल, घटते हरित क्षेत्र और प्रदूषित होते जलस्रोतों के […]

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समाज को उजाड़ कर बस ना पाएगी लोकतक झील

समाज को उजाड़ कर बस ना पाएगी लोकतक झील

पंकज चतुर्वेदी देश को मणिपुर की चिंता तब ही होती है जब वहाँ से कोई हिंसा की बात हो लेकिन इस राज्य का अस्तित्व और […]

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नदियों में घटते जल से खतरे में है भीतरकनिका का पर्यावरणीय तन्त्र

नदियों में घटते जल से खतरे में है भीतरकनिका का पर्यावरणीय तन्त्र

पंकज चतुर्वेदी खारास्रोता नदी में मीठे पानी की घटती क्षमता भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। आई आई टी हैदराबाद […]

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ग्लेशियर मॉडल में मौसम की चरम स्थितियों को शामिल करने से सामने आई चेतावनी: तेजी से पिघल रही है बर्फ, और खतरनाक गति से बढ़ रहा है समुद्र का जलस्तर

धीरज चतुर्वेदी वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए गए ग्लेशियरों के नए और उन्नत मॉडल दर्शाते हैं कि अल्पकालिक मौसम के उतार-चढ़ाव—विशेषकर अत्यधिक भीषण गर्मी और लू […]

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जैव विविधता का विनाश केवल वन्यजीवों का संकट नहीं है। यह हमारे भोजन, पानी, स्वास्थ्य और जीवन के भविष्य पर मंडराता खतरा है।

पृथ्वी पर छठे महाविलुप्ति संकट की आहट: मानवता के लिए कितना बड़ा खतरा?

जैव विविधता का विनाश केवल वन्यजीवों का संकट नहीं है। यह हमारे भोजन, पानी, स्वास्थ्य और जीवन के भविष्य पर मंडराता खतरा है। धीरेंद्र कुमार […]

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