पंकज चतुर्वेदी धरती के बढ़ते तापमान का सबसे प्रत्यक्ष और चिंताजनक असर आज हिमालय के ग्लेशियरों पर दिखाई दे रहा है। दुनिया का तीसरा ध्रुव […]
Read moreCategory: Rivers and Lakes (नदियाँ और झीलें)
2026 की गंगा बाढ़ के बाद एक बुनियादी प्रश्न उठता है—क्या गंगा में पानी असामान्य रूप से अधिक आया, या हमने पिछले 30–50 वर्षों में नदी के फैलने की प्राकृतिक जगह को भी लगातार कम किया है? इसका उत्तर केवल आंखों से देखकर या वर्तमान राजस्व नक्शे से नहीं मिल सकता। इसके लिए 1970–80 के दशक से 2026 तक गंगा के सक्रिय बाढ़-मैदान में हुए भूमि-उपयोग परिवर्तन का उपग्रह आधारित वैज्ञानिक ऑडिट आवश्यक है।
अजय सहाय सबसे पहले एक तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है। पूरी गंगा के सक्रिय बाढ़-मैदान में पिछले 30–50 वर्षों में ठीक कितनी कॉलोनियां, कितने किलोमीटर […]
Read moreमानसून है तो बाढ़ भी जरुरी है !
पंकज चतुर्वेदी प्यास और पानी के लिए पलायन के कारण कुख्यात बुंदेलखंड में महाराज छत्रसाल द्वारा स्थापित छतरपुर शहर के सबसे बड़े तालाब किशोर सागर […]
Read moreभारत की नदियों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
पंकज चतुर्वेदी भारत की नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं हैं, बल्कि कृषि, पेयजल, बिजली उत्पादन, जैव-विविधता, परिवहन और करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार हैं। गंगा, […]
Read more“प्रकृति की सीमा तोड़ता विकास: मंदाकिनी–शिप्रा का जलप्रलय हमें क्या सिखा रहा है?”
अजय सहाय चित्रकूट की मंदाकिनी नदी का अगस्त 2026 में अचानक विकराल हो जाना केवल एक स्थानीय बाढ़ की घटना मानकर भुला देना बड़ी भूल […]
Read moreहिमालय में नदी को केवल उसके आज के बहते जल से पहचानना एक गंभीर नियोजन भूल हो सकती है। नदी का वर्तमान चैनल उसका पूरा प्राकृतिक अधिकार क्षेत्र नहीं होता। हजारों वर्षों में नदी अपना रास्ता बदलती है, किनारों को काटती है, नए चैनल बनाती है और अचानक बाढ़ के समय पुराने रास्तों में वापस प्रवेश कर सकती है। इसी तरह पहाड़ी नाले अपने मुहाने पर बार-बार पत्थर, बोल्डर, बजरी, रेत और मिट्टी जमा करके पंखे के आकार का भू-भाग—मलबा-पंख (debris/alluvial fan) बनाते हैं।
अजय सहाय ऐसी जमीन अक्सर अपेक्षाकृत समतल होती है, इसलिए हिमालय में होटल, बाजार, स्कूल, सड़क और कॉलोनी बनाने के लिए आकर्षक दिखाई देती है। […]
Read moreनेपाल की ताजा त्रासदी भारतीय उपमहाद्वीप में हिमालय की गोद में बसे राज्यों में गल रहे ग्लेशियर और उससे बन रही झीलों को ले कर बड़ी चेतावनी हैं । इंसभी की निगरानी और उनको फटने से रोकने के लिए त्वरित ढोस योजनाओं की जरूरत है । यह लेख इन्हीं वैज्ञानिक तथ्यों पर है
हिमालय की चेतावनी: पिघलती बर्फ, प्रदूषित झीलें पंकज चतुर्वेदी नेपाल की इस ताज़ा आपदा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हिमालय अब और अधिक मानवीय […]
Read moreक्यों कामयाब नहीं है नमामि गंगे परियोजना गंगा की निर्मलता को नारों नहीं संकल्प की जरूरत
पंकज चतुर्वेदी आस्था के केंद्र बनारस में गंगा और उससे मिलने वाली सहायक धाराओं – वरुणा और असि में पारंपरिक देशी मछलियों का मरना, उनकी […]
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