जलवायु परिवर्तन और लुप्त होता अमरनाथ शिवलिंग अमरनाथ यात्रा: आस्था, प्रकृति और हमारी बढ़ती जिम्मेदारी पंकज चतुर्वेदी करोड़ों हिंदुओं की गहरी आस्था का केंद्र अमरनाथ […]
Read moreCategory: Climate Change (जलवायु परिवर्तन)
योरोप में भीषण गर्मी ने 1970 के दशक के रिकॉर्ड तोड़े
© Unsplash/Jerry Zhang गैस की एक नाज़ुक ढाल के रूप में ओज़ोन परत, पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाती है. 10 जुलाई 2026 जलवायु और […]
Read moreभीषण गर्मी से योरोप की परिवहन व्यवस्था संकट में, हालात बदतर होने की आशंका
© Adobe Stock/Napol भीषण गर्मी से परिवहन बुनियादी ढाँचा प्रभावित हो सकता है, क्योंकि सड़कों, हवाई पट्टियों और रेल पटरियों के मुड़ने या विकृत होने का […]
Read moreठंडक की चाहत में तपती धरती
पंकज चतुर्वेदी समय से पहले अब गर्मी आना सामान्य बात हो गई हैं और जैसे-जैसे पारा चढ़ना शुरू होता है, देश के मध्यम और उच्च […]
Read moreबढ़ते पर्यटकों के आंकड़ों से भले ही लेह-लद्दाख मुस्कुरा रहा हो, एलकीं बढ़ती भीड़ से वहाँ के पर्यावरण को हो रहे स्थाई नुकसान ने “धरती के स्वर्ग ” के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है । यह लेख लेह-लद्दाख में उभर रही पर्यावरणीय समस्याओं का अध्ययन है ।
संकट में ‘शांग्री-ला‘: अनियंत्रित पर्यटन और लद्दाख का सुलगता पर्यावरण पंकज चतुर्वेदी लेह प्रशासन बड़े गर्व से बताया रहा है कि पिछले साल की तुलना […]
Read moreUNEP – तापलहर के वातावरण में ठंडक हासिल करने के नौ नुस्ख़े
24 जून 2026 जलवायु और पर्यावरण तापलहरें लगातार अधिक तेज़ और ख़तरनाक हो रही हैं, जिससे हर वर्ष लाखों लोगों की जान जाती है. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण […]
Read moreआईआईटी धनबाद (आईआईटी-आईएसएम) के पर्यावरण विज्ञान इंजीनियरिंग विभाग के एक नवीनतम और व्यापक शोध ने इस कड़वी हकीकत को वैज्ञानिक प्रामाणिकता के साथ देश के सामने रखा है। इस अध्ययन के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि पिछले 50 वर्षों के भीतर गंगा नदी बेसिन की करीब 18 लाख छोटी जलधाराएं (स्ट्रीम्स) पूरी तरह से विलीन हो चुकी हैं। यह लेख इस भयावह स्थति से गंगा को उबारने के सुझाव पर हैं ।
गंगा की सूखती असंख्य धाराएं पंकज चतुर्वेदी भारतीय उपमहाद्वीप के भू-पारिस्थितिकी और जनजीवन की नियंता रही गंगा नदी का अस्तित्व आज एक अभूतपूर्व और अदृश्य […]
Read moreहवामान परीवर्तन और कृषि संकट के जलती आग में झुलसती खेती
यह लेख लिखते समय मैं बेहद व्याकुल और बेचैन था। “हवामान परिवर्तन की आग में झुलसती खेती” विषय पर लिखते हुए अचानक मेरी माँ का […]
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