Category: Forest and Animals (जंगल और जानवर)

256 मौतें, एक सवाल: आखिर कब बचेंगे ओडिशा के गजराज?

पंकज चतुर्वेदी ओडिशा में 22 सितंबर 2026, मंगलवार को विधानसभा में जब राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने एक लिखित सवाल […]

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विदेशी आक्रामक प्रजातियों से पैदा हो रहे हैं कई खतरे

रोहित कौशिक      प्रकृति में जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों का विशेष महत्व है। यह जैवविविधता ही प्रकृति की असली ताकत है। पौधों और जीवों के माध्यम […]

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काजीरंगा को द्वीप मत बनाइए

पंकज चतुर्वेदी असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिज़र्व को लेकर पिछले कुछ महीनों से जो बहस चल रही है, वह केवल एक संरक्षित […]

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बढती हरियाली, घटते जंगल हर हरियाली जंगल नहीं होती

पंकज चतुर्वेदी दिल्ली में बगैर किसी अनुमति के हर घंटे औसतन पांच पेड़ काटे जा रहे हैं, वह भी बगैर किसी वैधानिक अनुमति के। दिल्ली […]

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युद्ध, जलवायु संकट और खेती का भविष्य

पवन नागर वर्तमान समय में दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहाँ एक ओर विज्ञान और तकनीक नई ऊँचाइयों को छू रहे हैं, […]

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भारत: आन्ध्र प्रदेश में मैन्ग्रोव बने तटीय सुरक्षा कवच…

© UNDP India/Samuel Bathula पानी के किनारे उभरी जड़ों वाली मैन्ग्रोव पेड़ों की एक कतार. 4 अगस्त 2026 जलवायु और पर्यावरण भारत के आन्ध्र प्रदेश राज्य के […]

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हर साल एक फीसदी घट रहा है असम

पंकज चतुर्वेदी यदि असम सरकार के जल संसाधन विभाग के आंकड़ों को भरोसेमंद माने तो  सन 1950 से अभी तक राज्य की 427,000 हैक्टेयर भूमि […]

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हरित भविष्य की राह: प्रकृति संरक्षण का संकल्प।(28 जुलाई विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर विशेष आलेख)

प्रतिवर्ष 28 जुलाई को जैव विविधता के संरक्षण, विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित किए जाने,पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने तथा आने वाली पीढ़ियों […]

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