पवन नागर वर्तमान समय में दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहाँ एक ओर विज्ञान और तकनीक नई ऊँचाइयों को छू रहे हैं, […]
Read moreCategory: Forest and Animals (जंगल और जानवर)
भारत: आन्ध्र प्रदेश में मैन्ग्रोव बने तटीय सुरक्षा कवच…
© UNDP India/Samuel Bathula पानी के किनारे उभरी जड़ों वाली मैन्ग्रोव पेड़ों की एक कतार. 4 अगस्त 2026 जलवायु और पर्यावरण भारत के आन्ध्र प्रदेश राज्य के […]
Read moreहर साल एक फीसदी घट रहा है असम
पंकज चतुर्वेदी यदि असम सरकार के जल संसाधन विभाग के आंकड़ों को भरोसेमंद माने तो सन 1950 से अभी तक राज्य की 427,000 हैक्टेयर भूमि […]
Read moreहरित भविष्य की राह: प्रकृति संरक्षण का संकल्प।(28 जुलाई विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर विशेष आलेख)
प्रतिवर्ष 28 जुलाई को जैव विविधता के संरक्षण, विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित किए जाने,पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने तथा आने वाली पीढ़ियों […]
Read moreविश्व वर्षावन दिवस (22 जून): महत्व, उद्देश्य, थीम और संरक्षण के उपाय।
वर्षावनों के संरक्षण तथा पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 22 जून को विश्व वर्षावन दिवस (वर्ल्ड रेन फोरेस्ट डे) मनाया जाता […]
Read moreचमगादड़ अक्सर डर या अंधविश्वास का विषय रहे हैं, लेकिन वास्तव में ये हमारे पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के सबसे महत्वपूर्ण नायकों में से एक हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसम, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में उनकी भूमिका को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है । यह लेख इस विषय पर हाल के शोध पर आधारित है ।
पारिस्थितिकी के अदृश्य नायक पर जलवायु परिवर्तन का प्रहार पंकज चतुर्वेदी प्रकृति के जटिल ताने-बाने में हर जीव की भूमिका पूर्व-निर्धारित है, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण […]
Read moreयह कहना अतिषियोक्ति नहीं होगा कि गोवा का अस्तित्व मैनग्रोव वनों के कारण है , जिसने वहाँ शहरी इलाके में खारे पानी को रोका हुआ है – साथ ही भूमि कटाव, जल- जीवन का आधार भी मैनग्रोव ही है । पिछले कुछ सालों में कथित विकास के नाम अपर वहाँ मैनग्रोव को उजाड़ा जा रहा है और यह गोवा के अस्तित्व पर खतरे कि चेतावनी है । यह लेख इसी विषय पर है ।
उजड़ते मैनग्रोव वन से गोवा में तबाही का खतरा पंकज चतुर्वेदी गोवा अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, नदियों के सघन जाल और समृद्ध जैव-विविधता के लिए विश्व […]
Read moreमिथुन क्या है और अरुणाचल के जंगलों में इसे लेकर तनाव क्यों बढ़ रहा है?
ढोल मिथुनों का शिकार करने लगे हैं क्योंकि उनके आम शिकारों को इंसानों ने खत्म कर दिया है। इन हमलों में मिथुन खोने वाले किसान […]
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