© Unsplash/Jerry Zhang गैस की एक नाज़ुक ढाल के रूप में ओज़ोन परत, पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाती है.
जलवायु निगरानी सेवा की गुरुवार को जारी नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष पश्चिमी योरोप में जून का महीना अब तक का सबसे गर्म रहा. वहीं, वैश्विक स्तर पर यह अब तक का दूसरा सबसे गर्म जून महीना दर्ज किया गया.
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) में जलवायु सूचना प्रमुख जॉन कैनेडी ने कहा, “जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी तापलहरों का आना अपेक्षित है.”
उन्होंने कहा, “1976 की ऐतिहासिक तापलहर के बाद से पिछले 50 वर्षों में योरोप का औसत तापमान लगभग दो डिग्री बढ़ चुका है. योरोप दुनिया का सबसे तेज़ी से गर्म हो रहा महाद्वीप है और यहाँ अत्यधिक तापमान की घटनाएँ भी लगातार बढ़ रही हैं.”
योरोप की कॉपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा के मासिक अपडेट के अनुसार, जून में समुद्र की सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने से गर्मी और तेज़ हुई.
वैश्विक स्तर पर भी ध्रुवीय क्षेत्रों से बाहर के महासागरों की सतह का औसत तापमान जून में अब तक के सबसे ऊँचे स्तर पर रहा. यह जून 2024 में दर्ज पिछले रिकॉर्ड से केवल 0.01 डिग्री सेल्सियस अधिक था. सेवा के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशान्त महासागर में मज़बूत अल-नीनो परिस्थितियों का बनना भी इसकी एक वजह रही.
मौतें, सूखा और आग
रिकॉर्ड तोड़ तापलहर का लोगों के स्वास्थ्य पर गम्भीर असर पड़ा है और गर्मी से जुड़ी मौतें भी हुई हैं.
योरोप के बड़े हिस्सों में सूखे जैसी परिस्थितियाँ बनी रहीं. अत्यधिक गर्मी और शुष्क मौसम ने जंगलों में आग की घटनाएँ बढ़ाईं व पूर्वी योरोप के कुछ क्षेत्रों में सूखे का ख़तरा और गहरा कर दिया.
WMO के अनुसार, पश्चिमी योरोप के कुछ हिस्सों में जुलाई में भी भीषण गर्मी जारी है. इसके साथ कुछ स्थानों पर तेज़ तूफ़ान आ रहे हैं, जबकि फ़्रांस व आइबेरियाई प्रायद्वीप सहित कई क्षेत्रों में सूखे की स्थिति बिगड़ रही है और जंगलों में आग लगने का जोखिम बढ़ गया है.
‘ख़ामोश जानलेवा ख़तरा’
जब शरीर जितनी गर्मी बाहर निकाल पाता है, उससे अधिक गर्मी सोख लेता है, तो ताप तनाव (heat stress) की स्थिति पैदा होती है. अत्यधिक गर्मीको अक्सर “ख़ामोश जानलेवा ख़तरा” कहा जाता है, क्योंकि कई देशों में इससे होने वाली मौतों और स्वास्थ्य समस्याओं के मामले पूरी तरह दर्ज नहीं हो पाते.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, पिछले चार वर्षों में योरोप में गर्मी से जुड़ी दो लाख से अधिक मौतें हुई हैं. वहीं, WMO का अनुमान है कि वर्ष 2000 से 2019 के बीच दुनिया भर में हर साल लगभग चार लाख 89 हज़ार लोगों की मौत गर्मी से सम्बन्धित कारणों से हुई.
WHO-WMO के संयुक्त जलवायु एवं स्वास्थ्य कार्यालय में स्वास्थ्य सलाहकार लैचलन मैकाइवर ने बताया कि बुज़ुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, खुले में काम करने वाले श्रमिकों, बेघर लोगों और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को सबसे अधिक ख़तरा होता है. हालाँकि, तापमान बहुत अधिक हो और लम्बे समय तक बना रहे, तो ताप तनाव किसी को भी प्रभावित कर सकता है.
गर्म होती रातें
चिन्ता केवल दिन के बढ़ते तापमान की नहीं, बल्कि रात में तापमान के ऊँचा बने रहने की भी है.
योरोप और एशिया के कुछ हिस्सों में उस रात को “उष्णकटिबन्धीय रात” कहा जाता है, जब तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं जाता. तापलहरों के दौरान, विशेष रूप से शहरों में, ऐसी गर्म रातें अधिक आम हो जाती हैं.
WMO-WHO के संयुक्त जलवायु एवं स्वास्थ्य कार्यालय में तकनीकी सलाहकार आर्मेल कैस्टेलन ने कहा, “तापलहर से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को समझने के लिए, दोपहर के अधिकतम तापमान से अधिक अहम यह हो सकता है कि रात में तापमान कितना नीचे गिरता है.”
उन्होंने कहा, “अगर दिन में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने के बाद रात में गिरकर 18 डिग्री हो जाए, तो शरीर को गर्मी से उबरने का अवसर मिलता है. लेकिन दिन का तापमान 36 डिग्री हो और रात भर 25 डिग्री से ऊपर बना रहे, तो स्वास्थ्य के लिए ख़तरा कहीं अधिक होता है.”
गर्मी से निपटने की कार्य योजनाएँ
WMO संयुक्त राष्ट्र की उन 10 विशिष्ट संस्थाओं में शामिल है, जो महासचिव की ‘चरम गर्मी पर कार्रवाई की पुकार’ पहल को समर्थन दे रही हैं. इस पहल का उद्देश्य बेहतर वैज्ञानिक जानकारी, पूर्व चेतावनी प्रणालियों, जन-जागरूकता एवं समन्वित कार्रवाई के ज़रिए गर्मी के प्रभावों को कम करना और अन्तरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना है.
संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी, उसके सदस्य एवं साझीदार समय पर चेतावनियाँ जारी करने और समन्वित कार्य योजनाएँ लागू करने के लिए काम कर रहे हैं. इसका उद्देश्य लोगों की जान बचाना और अर्थव्यवस्था, पारिस्थितिकी तंत्र, बुनियादी ढाँचे तथा श्रम उत्पादकता को होने वाले नुक़सान को कम करना है.
देशों और समुदायों को अत्यधिक गर्मी से निपटने में मदद करने के लिए, संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य और मौसम एजेंसियों ने इस सप्ताह गर्मी एवं स्वास्थ्य कार्य योजनाओं पर नया मार्गदर्शन जारी किया.
सर्वाधिक गर्म स्थान
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) नियमित रूप से तापमान के नए रिकॉर्ड की जानकारी संकलित कर रहा है. इनमें जून में योरोप के कई देशों में दर्ज रिकॉर्ड तोड़ तापमान भी शामिल हैं:
- डेनमार्क: दो स्थानों पर तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचा, जिससे 1975 में बना राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूट गया.
- फ़्रांस: 24 जून को देश का औसत तापमान 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने जुलाई 2019 और अगस्त 2003 के रिकॉर्ड तोड़ दिए. पुल्लुआउ शहर में तापमान 43.8 डिग्री तक पहुँचा, जबकि रात का तापमान 22 डिग्री रहना भी एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड था.
- नीदरलैंड्स: 26 जून को तापमान 39.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड था.
- स्पेन: 23 और 24 जून को कई स्थानों पर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया. बिलबाओ में तापमान 42.7 डिग्री तक पहुँचा, जो शहर में अब तक का सर्वाधिक तापमान था.
- स्विट्ज़रलैंड: बासेल में तापमान 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो शहर का नया रिकॉर्ड था.