पंकज चतुर्वेदी नेपाल की धरती पर हाल ही में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर पूरी दुनिया को झकझोर कर रख […]
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ग्लेशियरों का पिघलना कई खतरों का संकेत
रोहित कौशिक इस दौर में मानवीय गतिविधियों और बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। ग्लेशियर और बर्फ की चादरें हमारी […]
Read more14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी के साथ से त्योहारों का मौसम शुरू हो रहा है असल में आने वाले चार महीने पर्व के नाम पर प्रदूषण के […]
Read moreहिमालय में विकास की नई परिभाषा: निर्माण के साथ प्रकृति का पुनर्जीवन..
अजय सहाय हिमालय में अब विकास का अर्थ केवल सड़क, पुल, सुरंग, बाँध, जलविद्युत परियोजना, होटल और शहरों का विस्तार नहीं हो सकता। बदलती जलवायु […]
Read moreक्या अब प्राकृतिक आपदाओं से लड़ने के लिए स्थायी और पूर्णकालिक आपदा प्रबंधन सेवा बनाने का समय आ गया है?
अजय सहाय प्रतिनियुक्ति नहीं, समर्पित कैडर; केवल राहत नहीं, विज्ञान और तकनीक आधारित 24×7 सुरक्षा तंत्र बाढ़, भूस्खलन, बादल फटना, हिमनदीय झील विस्फोट, चक्रवात, भूकंप, […]
Read moreजलवायु परिवर्तन के कारण भयावह हो रहा है अल नीनो पंकज चतुर्वेदी जलवायु परिवर्तन ने अल नीनो को पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली बना दिया […]
Read moreनेपाल में ग्लेशियर झील फटने से हुई तबाही ने भारत को सतर्क आकर दिया है । हिमालय पर्वत की गोद में बीएसई आठ राज्यों में ग्लेशियर के पिघलने- झीलें बनने ने चुनोटी खड़ी कर दी है । ऐसे में जरूरी है की हमारे देश में ग्लेशियर विकास प्राधिकरण की तरह कोई संस्था गठित हो, जो ग्लेशियर के खतरों को ले कर काम कर रही अलग अलग बहुत सी संसतहों के आँकड़े, आकलन यदि को एकीकृत रूप से निदान के साथ पेश कर सके । यह लेख इसी मुद्दे पर है ।
पंकज चतुर्वेदी पिछले कुछ वर्षों में जब भी उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश या नेपाल के किसी दूरदराज गांव से अचानक आई बाढ़ की खबर आती है, […]
Read more“प्रकृति की सीमा तोड़ता विकास: मंदाकिनी–शिप्रा का जलप्रलय हमें क्या सिखा रहा है?”
अजय सहाय चित्रकूट की मंदाकिनी नदी का अगस्त 2026 में अचानक विकराल हो जाना केवल एक स्थानीय बाढ़ की घटना मानकर भुला देना बड़ी भूल […]
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