संरक्षण से जलवायु कार्रवाई तक परिचय इक्कीसवीं सदी में विकास और पर्यावरण के बीच संबंध नीति-विमर्श के हाशिए से उठ कर राष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया के […]
Read moreTag: #पर्यावरण
ग्रामीण भारत में प्लास्टिक कचरे का हिसाब करना क्यों जरूरी है?
ग्रामीण भारत में हर साल लाखों टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है, जिसका आकलन नहीं होता। ऐसे में ग्रामीण स्तर के आंकड़ों को जोड़कर एक […]
Read moreबेमौसम बारिश का कहर: किसानों की मेहनत पर प्रकृति की मार ।
उत्तर भारत के कई हिस्सों में बेमौसम मौसम का कहर देखने को मिल रहा है। सुनील कुमार महला भारत विश्व का एक प्रमुख कृषि प्रधान […]
Read moreपर्यावरण संरक्षण: एक चुनौती
पर्यावरणविद व रिपोर्टर हिर्देश जोशी ने महत्वपूर्ण जानकारी व सुझाव दिए हिंडन जल बिरादरी के “पर्यावरण संरक्षण: एक चुनौती” विषय पर आयोजित कार्यक्रम इंडिया हैबिटैट […]
Read moreशुक्र है, ‘फोर्टिफाइड’ चावल बांटने पर रोक लगी
एक बड़ी आबादी के लिए यह पोषण नहीं था और इससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर संकट मंडरा रहा था सरकार ने अप्रैल 2022 में राशन […]
Read moreकम उपभोग, ज्यादा संरक्षण: यही है शून्य अपशिष्ट का मंत्र
30 मार्च ‘अंतरराष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस’ सुनील कुमार महला हर वर्ष 30 मार्च को ‘अंतरराष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस’ मनाया जाता है। वास्तव में इस दिवस […]
Read moreझेलम का मौन: उत्तर भारत की जल सुरक्षा पर मंडराता संकट
साल 2026 के मार्च का पहला सप्ताह एक ऐसी खामोशी लेकर आया है जिसने पर्यावरणविदों और नीति-निर्धारकों की नींद उड़ा दी पंकज चतुर्वेदी कश्मीर की […]
Read moreविश्व मौसम विज्ञान संगठन की ताज़ा रिपोर्ट-2026
तपती धरती और बढ़ता संकट: क्या हम चेतेंगे ? सुनील कुमार महला लगातार अंधाधुंध दोहन और प्रकृति के प्रति लापरवाही के कारण आज हमारी धरती(नीला […]
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