विदित हो सन् 2016 में केंद्र सरकार द्वारा गठित चितले कमेटी ने साफ कहा था कि नदी में बढती गाद का एकमात्र निराकरण यही है कि नदी के पानी को फैलने का पर्याप्त स्थान मिले।
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बिना विस्थापन के जल संकट होगा दूर
सन 2007 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इस परियोजना में पन्ना नेशनल पार्क के हिस्से को शामिल करने पर आपत्ति जताई। हालांकि इसमें कई और पर्यावरणीय संकट हैं लेकिन सन 2010 जाते-जाते सरकार में बैठे लोगों ने प्यासे बुंदेलखंड को एक चुनौतीपूर्ण प्रयोग के लिए चुन ही लिया।
Read moreगाद से गहराता नदियों का संकट
गाद हर एक नदी का स्वाभाविक उत्पाद है लेकिन उसका भली भांति प्रबंधन अनिवार्य है । गाद जैसे ही नदी के बीच जमती है तो नदी का प्रवाह बदल जाता है ।
Read moreगंगा सागर द्वीप के गुम होने का खतरा
जैसे जैसे धरती का तापमान बढ़ रहा है और ग्लेशियर पिघलने से समुद्र का जल स्तर ऊँचा हो रहा है,
गंगा सागर की जमीन खिसकती जा रही है ।
दिल्ली को बीमारी बाँट रही है हिंडन
हिंडन नदी भले ही उत्तर प्रदेश में बहती हो और उसके जहरीले जल ने तट परबसे गांव-गांव में तबाही तो मचा ही रखी है, लेकिन अब दिल्ली भी इसके प्रकोप से अछूती नहीं है।
Read moreअपनी जल निधियाँ डुबाने से डूब रहा है चैन्नई
कूवम शब्द ‘कूपम ’ से बना है- जिसका अर्थ होता हैं कुआँ। कूवम नदी 75 से ज्यादा तालाबों के अतिरिक्त जल को अपने में सहजे कर तिरूवल्लूर जिले में कूपम नामक स्थल से उदगमित होती है। दो सदी पहले तक इसका उद्गम धरमपुरा जिले था, भौगोलिक बदलाव के कारण इसका उदगम स्थल बदल गया।
Read moreनारों से नहीं इरादों से बचेगी यमुना नदी
सन 1993 से अभी तक दिल्ली में यमुना के हालात सुधारने के नाम पर दिल्ली सरकार ने 5400 करोड़ का खर्चा हुआ, इसमें से 700 करोड़ की राशी सन 2015 के बाद खर्च की गई ।
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