देवेन्द्रराज सुथार
परिवहन क्षेत्र में तकनीकी विकास ने सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग करके पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों की ओर ध्यान आकर्षित किया है। सौर ऊर्जा से चलने वाले वाहनों का विकास न केवल टिकाऊ परिवहन के लिए बल्कि बढ़ते वाहन प्रदूषण और ईंधन की खपत के विकल्प के रूप में भी महत्वपूर्ण है। भारत की पहली सौर ऊर्जा से चलने वाली इलेक्ट्रिक कार ‘वेव ईवा’ को वायवे मोबिलिटी ने लॉन्च किया है। यह कार भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में क्रांति लाने वाली मानी जा रही है, क्योंकि यह पर्यावरण-अनुकूल, किफायती और टिकाऊ परिवहन का उदाहरण है। वेव ईवा के सोलर पैनल इसे अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों से अलग बनाते हैं, क्योंकि यह प्रतिदिन 10 किलोमीटर तक मुफ्त ड्राइविंग क्षमता प्रदान करती है।
यह कार न केवल भारत में इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र को नई दिशा देगी, बल्कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन की बढ़ती मांग को भी पूरा करेगी। वेव ईवा की प्रमुख विशेषताओं में इसका कॉम्पैक्ट डिज़ाइन, 250 किलोमीटर की रेंज और 3.25 लाख रुपये की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत शामिल हैं। ग्राहक बैटरी सब्सक्रिप्शन प्लान के साथ या बिना प्लान के इसे खरीद सकते हैं। वेव ईवा को पहली बार ऑटो एक्सपो 2023 में प्रदर्शित किया गया था और इसके नवाचार और टिकाऊ तकनीक की काफी सराहना की गई। यह कार तीन वैरिएंट्स- नोवा, स्टेला और वेगा में उपलब्ध होगी।
इसकी डिलीवरी 2026 में शुरू होने की संभावना है और शुरुआती कीमतें पहले 25,000 ग्राहकों के लिए ही लागू होंगी। यह कार चर्चा में इसलिए है क्योंकि यह भारत में सौर ऊर्जा के उपयोग को परिवहन क्षेत्र में प्रभावी ढंग से लागू करने का पहला उदाहरण है। बढ़ते वाहन प्रदूषण और ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच वेव ईवा एक हरित, स्वच्छ और किफायती विकल्प प्रस्तुत करती है। इसका लॉन्च भारत में सौर ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
वाहनों से होने वाला प्रदूषण भारत समेत पूरे विश्व के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। पेट्रोल और डीजल जैसे जीवाश्म ईंधन से चलने वाले वाहन कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसों का उत्सर्जन करते हैं, जिससे ग्लोबल वार्मिंग, वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं। भारत में शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के चलते वाहनों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के गिरते स्तर और स्वास्थ्य पर पड़ते प्रतिकूल प्रभावों ने एक स्वच्छ, हरित और टिकाऊ परिवहन प्रणाली की आवश्यकता को पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक बना दिया है। सौर ऊर्जा से चलने वाले वाहन (जिनमें ऊर्जा के लिए सौर पैनल का उपयोग होता है)
इस समस्या का समाधान प्रस्तुत करते हैं। सौर ऊर्जा एक अक्षय स्रोत है, जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि दीर्घकालिक दृष्टि से किफायती भी है। इस प्रकार के वाहन परिवहन में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देते हैं और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करते हैं।
उल्लेखनीय है कि सौर ऊर्जा वाहनों की अवधारणा 20वीं शताब्दी में विकसित हुई। 1955 में पहली बार सौर ऊर्जा से चलने वाला वाहन ‘सनमोबाइल’ प्रदर्शित किया गया। यह केवल एक मॉडल था, लेकिन इसने सौर ऊर्जा तकनीक को परिवहन क्षेत्र में लागू करने की संभावना को साबित किया। इसके बाद सौर ऊर्जा से चलने वाले वाहनों के डिजाइन और निर्माण में सुधार किया गया। वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा से चलने वाले वाहनों के विकास में जापान, जर्मनी और नीदरलैंड जैसे देशों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन देशों ने न केवल सौर ऊर्जा वाहनों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया है ।
बल्कि सौर ऊर्जा आधारित परिवहन को प्रोत्साहन देने के लिए नीतियां भी बनाई हैं। सौर ऊर्जा परिवहन के क्षेत्र में नीदरलैंड एक प्रेरणादायक उदाहरण है। यहां सौर ऊर्जा से चलने वाले वाहनों के साथ-साथ सौर ऊर्जा पर आधारित सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया गया है। नीदरलैंड में ‘सोलर रोड’ जैसी परियोजनाएं (जो सड़कों पर सौर पैनल लगाकर ऊर्जा उत्पन्न करती हैं) एक अनूठी पहल हैं। इसी प्रकार जापान और जर्मनी जैसे देश सौर ऊर्जा आधारित वाहनों के विकास में अग्रणी हैं। जापान ने सौर ऊर्जा से चलने वाले वाहनों के लिए उन्नत बैटरी तकनीक विकसित की है, जबकि जर्मनी ने सौर ऊर्जा से चलने वाले इलेक्ट्रिक बसों और ट्रेनों पर ध्यान केंद्रित किया है।
केवल परिवहन के लिए ही नहीं, बल्कि हरित विकास के लिए भी एक मजबूत आधार है। यह ऊर्जा स्रोत पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में मदद करता है। हरित विकास का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाना है। सौर ऊर्जा इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक है क्योंकि यह ऊर्जा स्रोत न केवल प्रदूषण मुक्त है बल्कि ऊर्जा उत्पादन की लागत को भी कम करता है। भारत में वाहन प्रदूषण एक बड़ी समस्या है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, वाहनों से निकलने वाला धुआं शहरी इलाकों में वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण है।
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे महानगरों में बढ़ता वाहन प्रदूषण स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रहा है। सौर ऊर्जा से चलने वाले वाहन इस समस्या का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करते हैं। इन वाहनों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये शून्य उत्सर्जन वाहन (ज़ीरो एमिशन व्हीकल्स) होते हैं। सौर ऊर्जा के उपयोग से न केवल जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होती है, बल्कि वायु प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को भी कम किया जा सकता है।
सौर ऊर्जा से चलने वाले परिवहन के कई लाभ हैं, जो इसे आधुनिक परिवहन प्रणाली के लिए एक आकर्षक और टिकाऊ विकल्प बनाते हैं। यह पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सौर ऊर्जा वाहनों का उपयोग कार्बन उत्सर्जन को कम करता है, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार होता है और ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को कम करने में सहायता मिलती है। पारंपरिक ईंधन के मुकाबले सौर ऊर्जा का उपयोग दीर्घकालिक रूप से सस्ता साबित होता है। वाहन चार्जिंग के लिए आवश्यक ऊर्जा मुफ्त में प्राप्त होती है, जिससे ईंधन की लागत में भारी कमी आती है। इसके अलावा सौर ऊर्जा का उपयोग ऊर्जा सुरक्षा को भी प्रोत्साहित करता है। यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करता है और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है, जो आर्थिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
सौर ऊर्जा वाहनों के विकास में सबसे बड़ी समस्या इन वाहनों की उच्च प्रारंभिक लागत है। सौर ऊर्जा वाहनों के निर्माण में उपयोग होने वाली उन्नत तकनीक और सामग्री के कारण इनकी कीमत पारंपरिक वाहनों की तुलना में अधिक होती है। इसके अलावा सौर ऊर्जा का भंडारण एक अन्य प्रमुख चुनौती है। मौजूदा बैटरी तकनीक सीमित ऊर्जा भंडारण की क्षमता प्रदान करती है, जो लंबी दूरी की यात्रा के लिए अनुपयुक्त हो सकती है। साथ ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी भी इन वाहनों की स्वीकार्यता में एक बड़ी बाधा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन और सरकारी सब्सिडी के माध्यम से सौर ऊर्जा वाहनों की लागत को कम किया जा सकता है, जिससे यह अधिक किफायती बन सके। उन्नत लिथियम-आयन और सॉलिड-स्टेट बैटरियों का विकास ऊर्जा भंडारण क्षमता को बढ़ाने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही सरकार और निजी क्षेत्र के सहयोग से चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है, जिससे इन वाहनों का उपयोग अधिक सुविधाजनक हो सके। इन प्रयासों से सौर ऊर्जा वाहनों की संभावनाएं और उनकी स्वीकार्यता बढ़ने की उम्मीद है।
भारत में सौर ऊर्जा आधारित परिवहन की संभावनाएं अत्यधिक उज्ज्वल हैं। देश में बढ़ती ऊर्जा मांग, पर्यावरणीय चिंताएं और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता ने सौर ऊर्जा वाहनों के विकास को गति दी है। भारतीय सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक और सौर ऊर्जा वाहनों को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई फ़ेम योजना और राष्ट्रीय सौर मिशन जैसी पहलें इस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं। ये योजनाएं वित्तीय सहायता, सब्सिडी और प्रोत्साहन प्रदान करके हरित परिवहन को बढ़ावा देती हैं। इसके साथ ही भारत के पास सौर ऊर्जा के लिए प्रचुर संसाधन उपलब्ध हैं। लंबे समय तक धूप वाले क्षेत्रों की उपस्थिति सौर ऊर्जा वाहनों को चार्ज करने के लिए अनुकूल है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सौर ऊर्जा वाहनों के उपयोग की संभावनाएं हैं, जो परिवहन को अधिक टिकाऊ और किफायती बना सकते हैं।
भारतीय बाजार में बढ़ती जागरूकता और उन्नत तकनीक की उपलब्धता भी इस क्षेत्र को बल प्रदान कर रही है। सस्ती और प्रभावी बैटरी तकनीकों का विकास सौर ऊर्जा वाहनों को और अधिक व्यावहारिक बना रहा है। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक और निजी क्षेत्र द्वारा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर ध्यान केंद्रित करने से इन वाहनों की स्वीकार्यता बढ़ रही है। वेव ईवा जैसी कारें इस बात का प्रमाण हैं कि तकनीकी नवाचार और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ कैसे जोड़ा जा सकता है। भारत में जहां बढ़ते वाहन प्रदूषण और ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकता है, सौर ऊर्जा वाहनों का विकास और उपयोग हरित विकास के लिए एक आवश्यक कदम है।