भूस्खलन अर्थात ऊँचाई से कीचड़, मलबा और चट्टानों का तेजी से नीचे आना . इससे जनजीवन ठहर सा जाता है .सडक और रेलवे लाइने बाधित होती हैं .
Read moreCategory: Climate Change (जलवायु परिवर्तन)
सी ई ई डब्लू और इंडिया क्लाइमिट कोलाबोरेटिव ः जलवायु परिवर्तन जोखिम
सी ई ई डब्लू और इंडिया क्लाइमिट कॉलब्रेशन द्वारा भारत के हर जिले की जलवायु परवर्तन के प्रति संवेदनशीलता और संभावित प्राकृतिक आपदा पर यह शानदार रिपोर्ट हर देशवासी को पढ़ना चाहिए क्योंकि यह स्थानीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन से उपज रहे संकट के निदान के तलाशने में सहायक है
Read moreजलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक खेती
जलवायु परिवर्तन पर कृषि वैज्ञानिकों ने चेताया है कि अगर हम इसी तरह से खेती-बाड़ी करते रहें तो दुनिया में केवल 60 वर्षों तक ही खेती की जा सकती है। ऐसी स्थिति में कृषि को भविष्य के लिए संजोने रखने हेतू प्राकृतिक खेती ही सबसे उत्तम विकल्प है।
Read moreआत्मनिर्भर विकास लक्ष्यऔर कोंकणी साहित्य
1992 में ब्राजील के रियो डी जनेरियो में संचालित पृथ्वी शिखर सम्मेलन (Earth Summit) में ‘एजेंडा 21’ शीर्षक के तहत 178 से अधिक देशों द्वारा अपनाई गई 21वीं सदी की घोषणा, मानव गतिविधियों के कारण होने वाले पर्यावरण (Environment) और पारिस्थितिकी (Ecology) के विनाश का मुकाबला करने का एक निर्णायक कदम माना जा सकता है।उसी सम्मेलन ने जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर एक सम्मेलन की मेजबानी की, जिसे जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) के रूप में जाना जाता है।
Read moreमानसून को जलवायु परिवर्तन के परिपेक्ष्य में समझना होगा
मानसून शब्द असल में अरबी शब्द ‘मौसिम’ से आया है, जिसका अर्थ होता है मौसम। अरब सागर में बहने वाली मौसमी हवाओं के लिए अरबी मल्लाह इस षब्द का इस्तेमाल करते थे।
Read moreमानसून में मन के आंसू
क्या जल बिना जीवन संभव है? क्या जंगल बिना मंगल संभव है? और क्या समाज की संपन्नता के बिना व्यक्ति की संपन्नता संभव है? सत्ता को समाज के आंसू दिखते भी हैं या नहीं? समाज को अपने आंसू पोछना सीखना होगा।
Read moreखतरे में धरती
महात्मा गांधी विश्व में मुक्ति के महानतम और अलीक योद्धा रहे हैं। वह हर तरह के अभिशाप और विकार से मुक्ति के हिमायती थे। आज धरती प्रदूषण से मुक्ति की आकांक्षी है। गांधी का कहना था कि धरती सबकी जरूरतें पूरी कर सकती है, सबका लालच नहीं। उन्होंने कहा था- The earth, the land, the air and the water are not an inheritance from our forefathers but an loan from our children. So we have to handover to them at least as it was handed over to us.
क्या महात्मा के इस अमृत वाक्य में धरती को बचाने का मंत्र निहित नहीं है?
अरावली के उजड़ने से गहरा रही है जलवायु परिवर्तन की मारः पंकज चतुर्वेदी
अध्ययन के परिणामों से पता चला है कि 1975 से 2019 के बीच अरावली की 3676 वर्ग किमी भूमि बंजर हो गई । इस अवधी में अरावली के वन क्षेत्र में 5772। 7 वर्ग किमी (7। 63 प्रतिशत) की कमी आई है । यदि यही हाल रहे तो 2059 तक कुल 16360। 8 वर्ग किमी (21। 64 प्रतिशत) वन भूमि पर कंक्रीट के जंग उगे दिखेंगे ।
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