आठ बहनों पर जलवायु परिवर्तन की तगड़ी मार :कम बरसात और अधिक तबाही –
पंकज चतुर्वेदी इस साल पूर्वोत्तर भारत में बारिश का हिसाब जितना चौंकाता है, तबाही का मंज़र उससे कहीं ज़्यादा डराता है। भारतीय मौसम विभाग के […]
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पंकज चतुर्वेदी इस साल पूर्वोत्तर भारत में बारिश का हिसाब जितना चौंकाता है, तबाही का मंज़र उससे कहीं ज़्यादा डराता है। भारतीय मौसम विभाग के […]
Read moreबंगलूरू के तालाब सदियों पुराने तालाब-शिल्प का बेहतरीन उदाहरण हुआ करते थे । बारिश चाहे जितनी कम हो या फिर बादल फट जाएं, एक-एक बूंद नगर में ही रखने की व्यवस्था थी । ऊंचाई का तालाब भरेगा तो उसके कोड़वे(निकासी) से पानी दूसरे तालाब को भरता था ।
Read more2014 में सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने गंगा को निर्मल और अविरल बनाने को खासा महत्व दिया था और इसके लिए नमामि गंगे योजना की घोषणा की थी। योजना पर काम अक्टूबर 2016 में आए आदेश के बाद से शुरु हो सका था। वित्त वर्ष 2014-15 से लेकर 2020-2021 तक इस नमामि गंगे योजना के तहत पहले 20 हजार करोड़ रुपए खर्च करने का रोडमैप तैयार किया गया था जो कि बाद में बढ़ाकर 30 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया।
Read moreविदित हो सन् 2016 में केंद्र सरकार द्वारा गठित चितले कमेटी ने साफ कहा था कि नदी में बढती गाद का एकमात्र निराकरण यही है कि नदी के पानी को फैलने का पर्याप्त स्थान मिले।
Read moreसत्तर दिन की बर्फबारी 15 दिन में सिमटने से दिसंबर और जनवरी में हुई लगभग 80-90 प्रतिशत कम बर्फबारी की भरपाई तो हो नहीं सकती । उसके बाद
गर्मी शुरू हो जाने से साफ जाहिर है कि जो थोड़ी सी बर्फ पहाड़ों पर आई है , वह जल्दी ही पिघल जाएगी । अर्थात आने वाले दिनों में एक तो ग्लेशियर पर निर्भर नदियों में अचानक बाढ़ या आसक्ति है और फिर अप्रेल में गर्मी आते-आते वहाँ पानी का अकाल हो सकता है ।
इस साधारण सी तकनीक का गाँव तक पहुंचने के रास्ते में बस एक ही व्यवधान है – ताकतवर अंतर्राष्ट्रीय कीटनाशक लाबी, जिसका अरबों का उत्पाद यह बगैर खर्च का उपकरण एक झटके में बिकने से रोक सकता है ।
Read moreसन 2007 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इस परियोजना में पन्ना नेशनल पार्क के हिस्से को शामिल करने पर आपत्ति जताई। हालांकि इसमें कई और पर्यावरणीय संकट हैं लेकिन सन 2010 जाते-जाते सरकार में बैठे लोगों ने प्यासे बुंदेलखंड को एक चुनौतीपूर्ण प्रयोग के लिए चुन ही लिया।
Read moreयह भयावह है कि बकौल विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) दुनिया में 36 प्रतिशत कुत्ते के काटने से होने वाले रैबीज़ से मौत के मामले भारत में होते हैं। जो कि 18,000 से 20,000 है । रेबीज़ से मौतों में से 30 से 60 प्रतिशत मामलों में पीड़ित की उम्र 15 साल से कम होती है।
Read moreएक सींग वाला गैंडा दुनिया में संकटग्रस्त प्राणी घोषित है। इसकी संख्या सारे संसार में बामुश्किल 4000 होगी और इनमें से 88 प्रतिशत असम में ही हैं। कोई 2613 काजीरंगा पार्क में हैं तो पवित्र अभ्यारण में 107 और ओराङ्ग राष्ट्रीय उधयं में 125 गैंडे हैं। मानस संरक्षित वन में भी लगभग 45 एक सींग के गैंडे हैं ।
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