सरस्वती रमेश
बाजार में आप सब्जी खरीदने जायें या किराना, परचून की दुकान से कोई छोटा-मोटा सामान, दुकानदार आपको पॉलिथीन के बैग में सामान पकड़ा देता है। आप भी खुश रहते हैं कि घर से कोई थैला लेकर चलने की जरूरत ही नहीं। दरअसल, पॉलिथीन या सिंगल यूज प्लास्टिक से बने छोटे से लेकर बड़े आकार वाले बैग घर से थैला ले जाने की आदत ही छुड़ा दी है। लेकिन पॉलिथीन या सिंगल यूज प्लास्टिक से बने बैग या पैकेट्स का इस्तेमाल आज हमारी धरती के लिए बहुत बड़ा संकट बनता जा रहा है।
सिंगल यूज प्लास्टिक कितनी बड़ी समस्या बन गई है, आम आदमी कल्पना नहीं कर सकता। सही तरीके से निपटान ना हो पाने के कारण यह जहर उगल रहा है। यह जहर धरती के कोने कोने फैलता ही जा रहा है। धरती के अस्तित्व के लिए यह एक विकट समस्या बन गया है। नदियों का पानी प्रदूषित हो रहा है। हर वर्ष लाखों जीव- जंतुओं की मौत हो रही है। मछलियों के शरीर में प्लास्टिक के कण मिलने लगे हैं। सिर्फ मछलियों ही नहीं इंसानों के शरीर में भी माइक्रो प्लास्टिक कण मिल रहे हैं। महानगरों में जलभराव की बड़ी समस्या उभर रही है। इतना कुछ होने के बावजूद सरकारें अभी इस पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगाने की दिशा में गंभीर नजर नहीं आ रही हैं। ऐसी स्थिति के बीच कुछ लोग हैं जिन्हें कई साल पहले ही सिंगल यूज प्लास्टिक बेचैन करने लगा था। उन्हीं में से एक हैं शैल माथुर, जिन्हें लोग बड़ी बिंदी वाली मैम के नाम से भी बुलाते हैं।
उन्होंने एक छोटी लेकिन गंभीर पहल शुरू की। वे पेशे से मीडियाकर्मी हैं। लेकिन पिछले कई वर्षों से उन्होंने खुद को पर्यावरण बचाने की मुहिम से जोड़ लिया। इस बात में उनका विश्वास है कि बूंद-बूंद तालाब भर सकता है। इसी विश्वास के तहत उन्होंने दस साल पहले कुछ स्कूली बच्चों के साथ एक मुहिम की शुरुआत की। उन्होंने नोएडा सेक्टर 55-56 को सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलिथीन से मुक्त करने की ठान ली। शुरुआती दिनों में उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा। लेकिन वे अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति एवं संकल्प से जरा भी डिगी नहीं। आज उनकी मुहिम रंग दिखाने लगी है। उनके प्रयासों का नतीजा है कि पिछले कई साल से नोएडा अथॉरिटी ने इस सेक्टर को पॉलिथीन मुक्त घोषित कर रहा है। यह नोएडा का पहला ऐसा सेक्टर है, जिसे पॉलिथीन मुक्त घोषित किया गया है। अब उन्होंने इस काम के लिए टेकिंग रिस्पांसिबिलिटी फ़ॉर अर्थ एंड एनवायरनमेंट (ट्री) नाम की एक संस्था भी बना ली है ।
शुरुआत की चर्चा करते हुए शैल माथुर बताती हैं, “किसी भी काम को दूसरों से करवाने से पहले खुद पर लागू करना जरूरी है। मैंने पहले कूड़े का निपटान अपने घर से ही शुरू किया। रसोई के कचरे से खाद बनाना शुरू किया। सामान के साथ घर आई पन्नियों को स्टोर करने लगी। घर का राशन, दाल, चीनी सब्जी आदि खरीदने के लिए तरह-तरह के कपड़े के थैले और डिब्बे इस्तेमाल में लाने लगी। जिससे बाजार से कम से कम पन्नियां या पैकिंग में इस्तेमाल प्लस्टिक घर आये। अब मैं पिछले आठ साल से जीरो वेस्ट जनरेट कर रही हूं। मेरे घर से कोई कूड़ा नहीं निकलता।”
घर के कचरे के निपटान के बाद आगे की पहल के बारे में वे कहती हैं, ” नोएडा सेक्टर 55-56 में एक वीकली मार्केट लगता है। मार्केट के दुकानदार पन्नी का इस्तेमाल करते थे। मैंने सबसे पहले हर हफ्ते उस मार्केट में जाकर एक-एक दुकानदारों को पॉलिथीन नाम के शैतान के बारे में बहुत प्यार से समझाना शुरू किया। उन्हें जागरूक बनाने की कोशिश की।
पहले तो उन लोगों ने इसका विरोध किया। वे मुझसे पूछते थे कि मैं होती कौन हूं मार्केट से पन्नी हटवाने वाली। इस काम के लिए नोएडा अथॉरिटी की तरफ से दिए गए पत्र या आर्डर दिखाने को बोलते थे। मेरे पास ऐसा कोई आधिकारिक पत्र या निर्देश नहीं थे। मेरा एक ही जवाब होता कि मैं कुछ भी नहीं हूं और ना ही किसी ने मुझे पन्नी उठाने का अधिकार दिया है। यह काम मैं पर्यावरण की भलाई के लिए कर रही हूं। आप सबका सहयोग चाहिए।”
अपनी मुहिम को आगे बढ़ाने में शैल जी को तरह-तरह की काफी परेशानियां झेलनी पड़ी। परेशानियों का ज़िक्र करते हुए वे बताती है, ” याद है मुझे पहली बार जब मैंने एक व्यक्ति को पॉलिथीन के नुकसान के बारे में समझाना शुरू किया तो उसने कुछ यूं देखा जैसे मैंने अजूबी बात कह दी हो। कुछ लोग मुस्कुराते थे। कुछ दुत्कारते थे और कुछ खिल्ली उड़ा कर आगे निकल जाते थे। कई बार मन व्यथित हुआ। कई बार मन में आशंकाएं भी उठी। मगर मन कभी हारा नहीं।”
शैल जी का नरम रवैया देख कुछ दुकानदारों ने बस यूं ही हां में हां मिला दी। उन्हें लगा ऐसे तो कितने लोग आते हैं और कुछ दिन आकर चले जाते हैं। यह भी चली जायेगी। मगर शैल जी ने एक बार जाना शुरू किया तो आज तक न छोड़ा।
आप कोई भी काम करें उसकी सफलता-असफलता बहुत हद तक आपकी कार्यशैली पर निर्भर करती है।
अपनी कार्यशैली के बारे में वे कहती हैं, “हर रविवार मुझे उसी मार्केट में जाना था। उन्हीं लोगों से मिलना था। इसलिए सोच लिया कोई कुछ भी कहे, मगर किसी से ना तो मुझे झगड़ा करना है और ना ही मन में कोई बैर पालना है। मेरे मन में एक बात हमेशा रहती कि मेरी वजह से किसी को कोई नुकसान न उठाना पड़े। इसलिए मार्केट के दौरान जब्त पन्नियों को हम बाद में वापस कर देते थे। कई बार दुकानदार कहते थे कि आपने हमारी एक किलो पन्नी ली है जबकि हमारे रिकॉर्ड के मुताबिक कम रहती थी। फिर भी मैं उन्हें अपनी जेब से पैसे देती थी। ”
जब पन्नियां जब्त होनी शुरू हुई तो दुकानदार सस्ता और टिकाऊ विकल्प तलाशने लगे। खोड़ा के कुछ बच्चे अपने परिवार के साथ मिलकर पेपर से लिफाफे बना मार्किट में सप्लाई करने लगे। इससे कुछ लोगों को रोजगार भी मिला। मगर पेपर से बने लिफाफे में भारी सामान नहीं दिया जा सकता था। तब शैल जी ने अपने खर्च पर कपड़े का थैला उपलब्ध कराया। रेगुलर आने वाले सारे ग्राहकों को पहली बार थैला मुफ्त में दिया गया। और उनसे आगे थैला लेकर मार्केट आने का अनुरोध किया गया। शैल जी अबतक कपड़े से बने दस हजार से ज्यादा थैले मुफ्त में बांट चुकी हैं।
आप कोई सकारात्मक काम करें और आप पर व्यक्तिगत लांछन न लगे ऐसा आमतौर पर होता नहीं। शैल जी को भी इस समस्या से जूझना पड़ा। वे कहती हैं, ” कई बार मेरे ऊपर झूठा आरोप लगा, अपशब्द भी कहे गए। मुझे दलाल कहा गया, एजेंट कहा गया। यहां तक की धंधे वाली भी कहा गया। मुझ पर पन्नियां जब्त कर बेचने का आरोप लगा। हतोत्साहित करने वाले अक्सर कहते , “अरे मैडम इस छोटे से प्रयास से धरती का क्या भला हो जाएगा।”
इन सारी प्रतिकूल स्थितियों के बावजूद शैल जी ने मुहिम जारी रखी। उनके साथ जब विद्या रावत जी जुड़ीं तो उन्हें एक मजबूत साथ भी मिल गया। अब तक कितने लोग आए गए मगर विद्या जी हर वक्त उनके साथ खड़ी रहीं। अब बहुत सारे लोग उनके प्रयास की सराहना करते हैं। बाद में सरकार की तरफ से भी पॉलिथीन को लेकर थोड़ी सख्ती हुई। हालांकि यह सख्ती कागजों पर अधिक दिखी। शैल जी को तब और खुशी मिली जब नोएडा ऑथोरिटी ने उन्हें पॉलिथीन जब्त करने का लेटर दिया और ट्री संस्था से जुड़े पांच स्कूली बच्चों को अथॉरिटी की सीईओ ऋतु माहेश्वरी ने पूरे नोएडा का स्वच्छता का ब्रांड अम्बेसडर घोषित किया। दरअसल, बच्चे उनकी बहुत बड़ी स्ट्रेंथ हैं। मार्केट में निगरानी करते वक्त अगर कोई भी ग्राहक हाथ में पन्नी में सामान ले जाता दिखे तो ये बच्चे उसे दौड़कर पकड़ लेते हैं। उससे पन्नी जब्त कर उसे कागज से बना लिफाफा पकड़ा दिया जाता है। ये शैल जी की परिश्रम का ही नतीजा है कि आज तक उस सेक्टर में किसी दुकानदार या रेहड़ी वाले का पॉलीथिन को लेकर चालान नहीं हुआ।
अपनी मुहिम के विस्तार के लिए उन्होंने अब नोएडा सेक्टर 55 के वीकली मार्केट से आगे भी जाना शुरू कर दिया है। वे बड़े से बड़े मार्केट चली जाती हैं। या किसी भी कार्यक्रम में जाकर वहां रखी सारी सिंगल यूज प्लास्टिक बोतल, डिस्पोजल आदि जब्त कर लेती हैं। और वहां कुछ कांच की ग्लास या पत्तल रख आती हैं। अब लोग उनसे न तो सवाल पूछते और न ही बहस करते हैं। उन्हें बड़ी-बड़ी संस्थाओं द्वारा करवाये जा रहे कार्यक्रम में कार्यक्रम को जीरो वेस्ट बनाने के लिए बुलाया जाने लगा है। अब तक उन्होंने अनेक बड़े आयोजनों को सफलता पूर्वक जीरो वेस्ट करवाया है। हालांकि नोएडा अथॉरिटी समेत कई ऐसी संस्थाएं हैं जो उन्हें अपने किसी कार्यक्रम में बुलाने से कतराती है। क्योंकि इच्छाशक्ति के अभाव में वे सिंगल यूज़ प्लास्टिक से मुक्त नहीं हो पा रहे और शैल अपनी उपस्थिति में सिंगल यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल होने नहीं देती।
इस छोटे प्रयास की बदौलत उनके पास कई टन पॉलीथिन इक्कठा हो गई थी जिसे फैक्टरी में गलाकर प्लास्टिक की कुर्सियों का रूप दिया गया और उन्हें वीकली मार्किट में सहयोग करने वाले दुकानदारों में बांट दिया गया।
दुकानदारों को साथ लेने और उनसे भाईचारे वाला रिश्ता बनाने के लिए उन्होंने एक खास तरीका अपनाया है। वे दुकानदारों के साथ त्योहार या खास दिन सेलिब्रेट करती हैं।अपनी तरफ से उन्हें केक, पेस्ट्री, शरबत आदि चीजें देती हैं। यह सब करते हुए ध्यान रखती हैं कि सेलिब्रेशन में कहीं कोई कूड़ा न निकले। शर्बत बांटने के लिए कांच की ग्लासों का प्रयोग किया जाता है और समोसे आदि के लिए पत्तलों का प्रयोग किया जाता है। अब आसपास की मार्किट में उन्हें अधिकतर दुकानदार भाई जानते हैं। उनसे आग्रह भी करते हैं कि जिस तरह सेक्टर 55 की मार्किट को पॉलीथिन मुक्त किया है वैसे ही हमारी मार्किट में भी मुहिम चलाइये। कुछ दुकानदार खुश होते हैं कि पन्नी इस्तेमाल न् करने से बाजार स्वच्छ रहता है और कम कचरा निकलता है। साथ ही पैसे बचते हैं।
मुहिम की कामयाबी दूसरे लोगों , दूसरी संस्थाओं के लिए प्रेरक है। सच है असली बदलाव तो जमीन पर उतरकर काम करने से ही होगा। बड़ी बिंदी वाली शैल माथुर एवं उनकी संस्था ट्री ने सचमुच एक अच्छा उदाहरण पेश किया है।