ढोल मिथुनों का शिकार करने लगे हैं क्योंकि उनके आम शिकारों को इंसानों ने खत्म कर दिया है। इन हमलों में मिथुन खोने वाले किसान […]
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बेमौसम बारिश का कहर: किसानों की मेहनत पर प्रकृति की मार ।
उत्तर भारत के कई हिस्सों में बेमौसम मौसम का कहर देखने को मिल रहा है। सुनील कुमार महला भारत विश्व का एक प्रमुख कृषि प्रधान […]
Read moreखेती में मौसम का अलर्ट : छतरपुर के किसानों को कृषि विशेषज्ञों ने दी विशेष सावधानी बरतने की सलाह
बढ़ते तापमान से रबी फसलों में फूल झड़ने और उपज घटने का खतरा जनवरी माह चल रहा है और जिले के खेतों में रबी फसलें […]
Read moreजलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक खेती
जलवायु परिवर्तन पर कृषि वैज्ञानिकों ने चेताया है कि अगर हम इसी तरह से खेती-बाड़ी करते रहें तो दुनिया में केवल 60 वर्षों तक ही खेती की जा सकती है। ऐसी स्थिति में कृषि को भविष्य के लिए संजोने रखने हेतू प्राकृतिक खेती ही सबसे उत्तम विकल्प है।
Read moreपानी बचाना है तो बचाएं पारंपरिक जल-प्रणालियाँ
सन् 1944 में गठित ‘फेमिन इनक्वायरी कमीशन’ ने साफ निर्देश दिए थे कि आने वाले सालों में संभावित पेयजल संकट से जूझने के लिए तालाब ही कारगर होंगे । कमीशन की रिर्पाट तो लाल बस्ते में कहीं दब गई और देश की आजादी के बाद इन पुश्तैनी तालाबों की देखरेख
करना तो दूर, उनकी दुर्दशा करना शुरू कर दिया ।