विशेष संपादकीय लेख | जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं पंकज चतुर्वेदी बाढ़ का बढ़ता दायरा: कारण, विभीषिका और बचाव के उपाय: इस बार भले ही […]
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झाग-मुक्त नदियाँ, स्वच्छ भविष्य
यमुना से लेकर ब्राज़ील तक जल-रसायन प्रदूषण की वैश्विक चुनौती और भारत का Vision 2047 अजय सहाय दिल्ली की यमुना नदी में इन दिनों झाग […]
Read moreझाग छुपाने से नहीं सुधरेगी यमुना
यमुना में झाग की समस्या पंकज चतुर्वेदी फिर छठ पर्व आया और फिर यमुना की स्वच्छता की याद आई । दुर्भाग्य है कि यमुना दिल्ली […]
Read moreनदियों के संरक्षण और स्वच्छता में स्त्रियों की भूमिका
नदियों के निकट की उर्वर भूमि, जल की निरंतर उपलब्धता, प्राकृतिक संपदा और संसाधन डॉ विभा नायक, दिल्ली विश्वविद्यालय नदियाँ किसी भी संस्कृति का प्राण […]
Read moreगंगा–यमुना का जीवित इकाई दर्ज़ा
25 वर्षों की न्यायिक, नीतिगत और पर्यावरणीय यात्रा अजय सहाय गंगा और यमुना नदियाँ भारतीय संस्कृति, सभ्यता, आस्था, कृषि और जीवनरेखा की प्रतीक मानी जाती […]
Read moreऐसी दिल्ली को तो डूबना ही था
बमुश्किल एक घंटे की बरसात में ही दिल्ली ठिठक गई पंकज चतुर्वेदी इस बार बीते डेढ़ महीने में राजधानी दिल्ली पर कुल चार बार ठीकठाक […]
Read moreजल निधियों को उजाड़ने से प्यासे हैं शहर
जब दिल्ली में यमुना लबालब होती है तो यहाँ के नाले- कारखाने उसमें इतना जहर घोलते हैं कि नदी सारे रास्ते हाँफती है और जब पानी का संकट खड़ा होता है तो नदी की याद आती है । यह हाल केवल दिल्ली का नहीं, देश के लगभग सभी बड़े शहरों का है । अपने तालाबों पर मिट्टी डाल कर कंक्रीट से तन गया बैंगलुरु तो ’केपटाउन’ की तरह जल-शून्य की चेतावनी से बहाल है और अभी पंद्रह दिन में जब मानसून आएगा तो शहर जल भराव के चलते ठिठक जाएगा ।
Read moreरिवर फ्रन्ट से यमुना की नहीं व्यापारियों की सेहत सुधरेगी
पंकज चतुर्वेदी रामनवमी की सुबह से ही दिल्ली में यमुना पर सफेद झाग छाए थे । थोड़ा करीब से देखा तो पानी निपट काला था […]
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