न तो इंसान सुरक्षित हैं, न ही कुत्ते पंकज चतुर्वेदी बकौल विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) दुनिया में 36 प्रतिशत कुत्ते के काटने से होने वाले […]
Read moreTag: # विश्व स्वास्थ्य संगठन
Categories
- Agriculture and Land (खेती और ज़मीन)
- Article (लेख)
- Climate Change (जलवायु परिवर्तन)
- Environment (पर्यावरण )
- Forest and Animals (जंगल और जानवर)
- Google Form (गूगल फॉर्म)
- ozone layer
- Plastic Pollution (प्लास्टिक प्रदूषण)
- Polution (प्रदूषण)
- Report (रिपोर्ट्स)
- Rivers and Lakes (नदियाँ और झीलें)
- Water (जल)
- अरावली न्याय की करे गुहार
- ओज़ोन की परत
- ओजोन परत संरक्षण
- ग्लोबल वार्मिंग
- जल भराव
- जलवायु त्रैमासिक पत्रिका
- डिजिटल प्रदूषण
- त्योहार
- पर्यटन
- पहाड़
- मौसम
- वायु प्रदूषण
- वृक्ष
Recent Posts
- नेपाल में ग्लेशियर झील फटने से हुई तबाही ने भारत को सतर्क आकर दिया है । हिमालय पर्वत की गोद में बीएसई आठ राज्यों में ग्लेशियर के पिघलने- झीलें बनने ने चुनोटी खड़ी कर दी है । ऐसे में जरूरी है की हमारे देश में ग्लेशियर विकास प्राधिकरण की तरह कोई संस्था गठित हो, जो ग्लेशियर के खतरों को ले कर काम कर रही अलग अलग बहुत सी संसतहों के आँकड़े, आकलन यदि को एकीकृत रूप से निदान के साथ पेश कर सके । यह लेख इसी मुद्दे पर है ।
- “प्रकृति की सीमा तोड़ता विकास: मंदाकिनी–शिप्रा का जलप्रलय हमें क्या सिखा रहा है?”
- हिमालय का अलार्म: 100 मिमी बारिश और 100 किमी तक मलबे का सफर—क्या हमारी हिमालयी आपदा नीति तैयार है?