© UNEP/Todd Brown ब्राज़ील में मवेशी पालन और फ़सल बहाली से जुड़ी एक परियोजना सेराडो की रक्षा में मदद कर रही है, जो दुनिया की सबसे जैव विविध उष्णकटिबंधीय सवाना घासभूमियों में से एक है.
संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम कन्वेंशन (UNCCD) की प्रमुख ने बुधवार को भूमि बहाली के तीन सफल कार्यक्रमों को ‘विश्व पुनर्बहाली फ्लैगशिप’ पुरस्कार का विजेता घोषित किया. उन्होंने कहा कि ये प्रयास ऐसे समय में बेहद अहम हैं, जब दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत भूमि क्षरण व सूखे से प्रभावित है और तीन अरब से अधिक लोगों की आजीविका ख़तरे में है.
मंगोलिया में 17 से 28 अगस्त तक चल रहे संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण सम्मेलन में भूमि बहाली के तीन कार्यक्रमों को सम्मानित किया गया है. इन कार्यक्रमों का लक्ष्य 2030 तक लगभग 50 लाख हैक्टेयर भूमि बहाल करना है, जो क़रीब 70 लाख फ़ुटबॉल मैदानों के बराबर क्षेत्र है.
UNCCD की प्रमुख यास्मीन फ़ौआद ने कहा, “ये कार्यक्रम दिखाते हैं कि भूमि बहाली कारगर है. प्रकृति में निवेश से लोगों व समुदायों की सहनसक्षमता बढ़ती है, आजीविका को सहारा मिलता है और ठोस लाभ होते हैं.”
उन्होंने कहा कि भूमि क्षरण, सूखा और पारिस्थितिकी तंत्र की हानि अब केवल पर्यावरण की समस्या नहीं रहे हैं. ये खाद्य और जल सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक स्थिरता के लिए भी बड़ी चुनौती बन गए हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने 2030 तक दुनिया भर में एक अरब हैक्टेयर क्षतिग्रस्त भूमि बहाल करने का लक्ष्य रखा है.
विश्व पुनर्बहाली फ्लैगशिप के विजेता कार्यक्रमों की अब तक की कुछ उपलब्धियाँ:
ब्राज़ील: दुनिया के सबसे जैव विविध सवाना की बहाली
सेराडो, ब्राज़ील के कुल भूभाग का लगभग एक चौथाई हिस्सा है और दुनिया की सबसे जैव विविध उष्णकटिबंधीय सवाना घासभूमि है. लेकिन भूमि के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और जलवायु परिवर्तन के कारण इसकी आधे से अधिक प्राकृतिक वनस्पति नष्ट हो चुकी है. इससे आदिवासी समुदायों, खाद्य उत्पादन और पानी की उपलब्धता पर असर पड़ा है.
‘ब्राज़ील सेराडो सवाना पुनर्बहाली’ पहल के तहत 180 से अधिक साझीदार ब्राज़ील के नौ राज्यों में भूमि बहाल करने के लिए प्राकृतिक पुनर्बहाली, सीधे बीज बोने और स्थानीय प्रजातियों के साथ कृषि-वनीकरण जैसे उपाय अपना रहे हैं.
अब तक 27 हज़ार हैक्टेयर से अधिक भूमि पर बहाली का काम शुरू हो चुका है और 150 से अधिक स्थानीय पौधों की प्रजातियों के बीज इस्तेमाल किए गए हैं.
इस पहल का लक्ष्य 2030 तक 20 लाख हैक्टेयर भूमि बहाल करना है.
सऊदी अरब: शुष्क भूमि को फिर से हरा-भरा बनाने की मुहिम
सऊदी अरब ने 2100 तक चरागाहों, जंगलों, रेगिस्तानी इलाक़ों, शहरों और तटीय क्षेत्रों में चार करोड़ हैक्टेयर भूमि बहाल करने और 10 अरब पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा है.
देश के ‘राष्ट्रीय हरित कार्यक्रम’ के तहत अब तक 10 लाख हैक्टेयर क्षतिग्रस्त भूमि की बहाली शुरू हो चुकी है और 15 करोड़ 90 लाख पेड़ लगाए गए हैं.
इन प्रयासों में वनीकरण, प्राकृतिक बहाली, नियंत्रित चराई, स्थानीय वन्यजीवों को फिर से बसाना, वर्षा जल संग्रह और पानी की कमी वाले इलाक़ों में साफ़ किए गए अपशिष्ट जल का इस्तेमाल शामिल है.
कार्यक्रम का लक्ष्य 2030 तक 25 लाख हैक्टेयर भूमि बहाल करना और 21 करोड़ 50 लाख पेड़ लगाना है. इससे एक लाख 87 हज़ार तक रोज़गार के अवसर पैदा होने और शहरों की वायु गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है.
सहेल: भूमि बहाली से खाद्य सुरक्षा को सहारा
सहेल क्षेत्र में हिंसक टकराव, भूमि क्षरण, सूखा और जलवायु परिवर्तन से लोगों और पर्यावरण पर दबाव बढ़ रहा है. लेकिन 2018 से चल रही ‘सहेल एकीकृत सहनसक्षमता पहल’ के तहत 3 लाख 35 हज़ार हैक्टेयर से अधिक भूमि बहाल की गई है और कृषि उत्पादन बेहतर हुआ है. इससे 40 लाख से अधिक लोगों की खाद्य सुरक्षा और आजीविका को सहारा मिला है.
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के नेतृत्व में यह पहल बुर्किना फ़ासो, चाड, माली, मॉरिटानिया और निजेर में चल रही है.
अब तक के आकलन के अनुसार, कार्यक्रम से जुड़े 75 प्रतिशत इलाक़ों में मिट्टी और वनस्पति की स्थिति बेहतर हुई है. वहीं, भोजन की कमी वाले मौसम में मानवीय सहायता की ज़रूरत वाले परिवारों की संख्या लगभग 11 प्रतिशत घटी है.
इस पहल का लक्ष्य 2030 तक 4 लाख 70 हज़ार हैक्टेयर भूमि बहाल करना, जैव विविधता बढ़ाना और दो करोड़ टन तक कार्बन डाइऑक्साइड को वातावरण से हटाकर भूमि में संचित करना है.
साभार: यूएन समाचार