भारत को 6 जलक्षेत्रों (इसे मैं जल राज्य कहूंगा) में विभाजित किया है और सीमाओं का निर्धारण कर डिजिटल मैप विकसित किए हैं। इन 6 जल क्षेत्रों को 37 बेसिन, 117 कैचमेंट एरिया, 588 सबकैचमेंट एरिया, 3854 वाटरशेड, 49618 सब-वाटरशेड और कुल 3 लाख 21 हजार 324 माइक्रोवाटरशेड में बांटकर हर एक का जमीनी चिन्हांकन करके उसका एक यूनिक नेशनल कोड जारी किया है।
Read moreMonth: August 2024
मौसम पूर्वानुमान में अल-नीनो की भूमिका
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक सन 1953 से 2023 के बीच कुल 22 ला नीना साल दर्ज किए गए हैं, जिसमें से सिर्फ दो बार यानी साल 1974 और 2000 के मॉनसून सीजन में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि बाकी सालों के मॉनसून में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।
Read moreवनों की आग से बढ़ता पर्यावरणीय खतरा
वनों की आग ने एक बार फिर से आपदा प्रबंधन, पर्यावरणीय सुरक्षा, बहुमूल्य वनस्पति एवं वन्यजीवों के संरक्षण जैसे बहुत से प्रश्नों पर विचार करने को विवश कर दिया है।
Read moreक्या ऐसी होती है स्मार्ट सिटी?
एक पहाड़ी शहर का सालाना बजट 100 करोड़ भी नहीं है और उसके सिर पर 2500 करोड़ की परियोजना का वजन डाल दिया गया । स्मार्ट सिटी के लिए गठित समिति की बैठकें या नहीं होना या फिर बहुत काम होना, बैठक में सांसद आदि का काम शामिल होने की बात इस रिपोर्ट में कही गई है जिससे परियोजना में जन प्रतिनिधियों के सुझाव कम ही शामिल हुए।
Read moreअस्तित्व के लिए जूझती द्रव्यवती नदी
साल 1981 के जुलाई माह में आई बाढ़ में द्रव्यवती नदी का अस्तित्व बह गया था। बची-कुची कसर अतिक्रमण विकास और प्रदूषण ने पूरी करदी और द्रव्यवती कब अमानीशाह नाला में बदल गई पता नही चला। आज द्रव्यवती को लोग इसके नाम से नहीं बल्कि अमानीशाह के नाले के नाम से जानते हैं।
Read moreभुला दी गई नदियों ने भयावह बना दिया वायनाड का दर्द
वायनाड – नीलगिरी पर्वतमाला के इन ऊंचे पहाड़ों से कभी एक नदी बहती थी । तेज गति वाली नदी जो गर्मी में भले उदास सी दिखती लेकिन बरसात के छह महीने तेज वेग में नीचे की तरफ जाती और पश्चिमी घाट की नदियों के संजाल में मिल जाती ।
Read moreपर्यावरण की अनदेखी से बढ़ते भूस्खलन
केरल के वायनाड में तीव्र भूस्खलन ने मुंडक्कई, चूरलमाला कस्बों का अस्तित्व मिटा दिया
Read moreअधर में लटका जेनेटिक सरसों का मसला
अनुमान है कि अगले साल 2025 -26 में यह मांग 34 मिलियन टन तक पहुँच जाएगी । हमारे खाद्य तेल के बाजार में सरसों के तेल की भागीदारी कोई 40 फीसदी है
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