पानी की कमी के कारण फसलों की सिंचाई नहीं विकास परसराम मेश्राम रतलाम जिले के बजाना तहसील में स्थित घोड़ाखेडा, बगली, रामपुरिया और धावड़ादेह गांवों […]
Read moreMonth: January 2026
Categories
- Agriculture and Land (खेती और ज़मीन)
- Article (लेख)
- Climate Change (जलवायु परिवर्तन)
- Environment (पर्यावरण )
- Forest and Animals (जंगल और जानवर)
- Google Form (गूगल फॉर्म)
- ozone layer
- Plastic Pollution (प्लास्टिक प्रदूषण)
- Polution (प्रदूषण)
- Report (रिपोर्ट्स)
- Rivers and Lakes (नदियाँ और झीलें)
- Water (जल)
- अरावली न्याय की करे गुहार
- ओज़ोन की परत
- ओजोन परत संरक्षण
- ग्लोबल वार्मिंग
- जल भराव
- जलवायु त्रैमासिक पत्रिका
- डिजिटल प्रदूषण
- त्योहार
- पर्यटन
- पहाड़
- मौसम
- वायु प्रदूषण
- वृक्ष
Recent Posts
- आईआईटी खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने अठारह सौ इक्यासी से लेकर वर्ष दो हजार पच्चीस तक के छत्तीस हजार से अधिक भूकंपीय आंकड़ों का वैज्ञानिक और सांख्यिकीय विश्लेषण करके एक विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया है। इस अध्ययन से यह बात सामने आई है कि अंडमान के नीचे सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाओं के बीच लगातार जबरदस्त घर्षण और दबाव बढ़ रहा है। शोध के अनुसार, इस क्षेत्र में भविष्य में आठ या उससे अधिक तीव्रता के विनाशकारी भूकंप आने की आशंका बहुत अधिक है। ऐसे स्थान पर भारी निर्माण कार्य बड़ी तबाही ला सकते हैं , वैसे भी अंडमान निकोबार जलवायु परिवर्तन को ले लार बेहद संवेदनशील है – यह लेख इसी विषय
- जलविहीन होते जलाशय,आखिर क्यों…………………………..?
- अब दिखने लगा पर्यावरण पर बढ़ते तापमान का असर