अगर पानी साफ तौर पर दिखाई दे, सबके लिए आसानी से उपलब्ध हो, और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाए, तो हमारे शहर कैसे […]
Read moreMonth: February 2026
कचरे पर कड़ा रुख: न्यायपालिका के निर्देश और ज़मीनी सच्चाई
ठोस कचरे का प्रबंधन आज के समय की एक बहुत बड़ी आवश्यकता बन चुका है सुनील कुमार महला ठोस कचरे का प्रबंधन आज के समय […]
Read moreखेतों की मेढ़ पर खड़ा ‘ग्लोबल वार्मिंग’ का सच
साल 2026 की यह फरवरी डराने वाली है, सूरज की तपिश ने समय से पहले ही मार्च के अंत वाले रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पंकज […]
Read moreएनजीटी में होने चाहिए 51 सदस्य, हैं महज 5
साफ है कि सरकार कथित विकास के नाम पर पर्यावरण पर बुलडोजर चलाते रहना चाहती है पंकज चतुर्वेदी बुदेलखंड में छतरपुर शहर के सबसे बड़े […]
Read moreगंगा जल गुणवत्ता का वैज्ञानिक विश्लेषण
सरकारी मानकों के अनुसार फीकल कोलिफॉर्म, BOD और वास्तविक स्वच्छता की सच्चाई अजय सहाय गंगा नदी की स्वच्छता को समझने के लिए हमें भावनाओं से […]
Read moreहाथी क्यों हो रहा है हिंसक
पिछले एक महीने में छत्तीसगढ़ के कोरबा, बलरामपुर, जशपुर आदि में जंगली हाथियों के गाँव-बस्ती पर हमले की 50 से अधिक घटनाएं हुई पंकज चतुर्वेदी […]
Read moreबुद्धा नाला: पंजाब से राजस्थान तक बहता जल संकट
कभी ताज़ा पानी देने वाला लुधियाना का बुद्धा नाला अब प्रदूषित जल और उद्योगों के कचरे से भर चुका है। यह दूषित जल पंजाब से […]
Read moreभविष्य के जलवायु समझौतों के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज: क्योटो प्रोटोकॉल
16 फरवरी 2005 को क्योटो प्रोटोकॉल आधिकारिक रूप से लागू हुआ था सुनील कुमार महला पर्यावरणीय दृष्टि से 16 फरवरी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना […]
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