अवलोकन से पता चलता है कि दिल्ली सर्वाधिक, अधिकतम जलवायु परिवर्तनशीलता वाले क्षेत्रों में आता है । राज्य में पहले से ही जल संसाधनों की कमी है । इनका अस्थायी और स्थानिक दोनों ही दृष्टि से अत्यधिक असमान वितरण है । जलवायु परिवर्तन जैसा ख़तरा इस प्रकार समय पर और सुसंगत प्रतिक्रिया और कार्रवाई की आवश्यकता है जो भेद्यता को कम करने और निर्माण में मदद करेगी । जलवायु परिवर्तन के इन प्रभावों को ध्यान में रखते हुए, दिल्ली सरकार ने परिवहन, शहरी नियोजन, जल, वन पर फोकस करते हुए एसएपीसीसी तैयार की हैऔर जैव विविधता, कृषि और बागवानी, स्वास्थ्य, ऊर्जा, जलवायु पर रणनीतिक ज्ञान सेक्टर बदले । यह रिपोर्ट इसी पर आधारित है ।
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- नेपाल में ग्लेशियर झील फटने से हुई तबाही ने भारत को सतर्क आकर दिया है । हिमालय पर्वत की गोद में बीएसई आठ राज्यों में ग्लेशियर के पिघलने- झीलें बनने ने चुनोटी खड़ी कर दी है । ऐसे में जरूरी है की हमारे देश में ग्लेशियर विकास प्राधिकरण की तरह कोई संस्था गठित हो, जो ग्लेशियर के खतरों को ले कर काम कर रही अलग अलग बहुत सी संसतहों के आँकड़े, आकलन यदि को एकीकृत रूप से निदान के साथ पेश कर सके । यह लेख इसी मुद्दे पर है ।