© UN India/Blassy Boben संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ़्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के कार्यकारी सचिव साइमन स्टील, नई दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए.
संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने स्वच्छ ऊर्जा को अगली औद्योगिक क्रान्ति का आधार बताते हुए कहा है कि नवीकरणीय ऊर्जा का तेज़ विस्तार भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और लोगों के जीवन स्तर को मज़बूत कर सकता है. लेकिन इसके लिए बिजली ग्रिड, बैटरी भंडारण और विद्युतीकरण में अधिक निवेश की आवश्यकता होगी.
20 से 22 जुलाई तक भारत की यात्रा के दौरान, संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ़्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के कार्यकारी सचिव साइमन स्टील ने देश को एक “सौर महाशक्ति” और वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण भागीदार बताया.
नई दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा, “वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा, बुनियादी ढाँचा और सेवाएँ अगली औद्योगिक क्रान्ति हैं. भारत के लिए ये वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में अपनी स्थिति मज़बूत करने का तेज़ रास्ता हैं.”
स्वच्छ ऊर्जा उपलब्धियाँ
भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी अब 50 प्रतिशत हो गई है. देश ने यह लक्ष्य निर्धारित समय से पाँच वर्ष पहले हासिल किया.
वर्ष 2014 के बाद से भारत की सौर ऊर्जा क्षमता पचास गुना से अधिक बढ़ी है, जबकि सौर उपकरणों के विनिर्माण की क्षमता में पचहत्तर गुना वृद्धि हुई है.
अन्तरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, 2025 में वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में भारत का योगदान दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा था. उत्पादन लागत के लिहाज़ से भारत दुनिया का सबसे प्रतिस्पर्धी सौर बाज़ार भी है.
साइमन स्टील ने यूएन न्यूज़ से कहा, “अगर भारत स्वच्छ ऊर्जा की ओर और तेज़ी से बढ़ता है, तो इससे अर्थव्यवस्था को अधिक लाभ होगा और करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य में सुधार आएगा.”
उन्होंने कहा कि बिजली ग्रिड, बैटरी भंडारण और विद्युतीकरण में निवेश से भारत को बड़े आर्थिक और सामाजिक लाभ मिल सकते हैं.
वैश्विक दक्षिण के लिए उदाहरण
साइमन स्टील ने कहा कि भारत का अनुभव दिखाता है कि जलवायु कार्रवाई और आर्थिक विकास साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं. यह वैश्विक दक्षिण के उन देशों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिन्हें उत्सर्जन घटाने के साथ-साथ ऊर्जा की उपलब्धता भी बढ़ानी है.
अन्तरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) के अनुसार, नवीकरणीय बिजली के विस्तार से भारत ने 2025 में जीवाश्म ईंधन की ख़रीद पर 18 अरब डॉलर बचाए.
उन्होंने कहा, “जलवायु कार्रवाई मज़बूत आर्थिक वृद्धि, ऊर्जा सुरक्षा और बेहतर जीवन स्तर का एक स्पष्ट और प्रमाणित मार्ग है.”
उन्होंने कहा, “यह धारणा पूरी तरह ग़लत साबित हो चुकी है कि जलवायु कार्रवाई आर्थिक वृद्धि की क़ीमत पर होती है. वास्तव में, सच इसके बिल्कुल विपरीत है.”
हालाँकि, उन्होंने ज़ोर दिया कि इन अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए विकासशील देशों को अधिक अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय और तकनीकी सहयोग की आवश्यकता होगी.
वैश्विक ऊर्जा की कमज़ोरी उजागर
साइमन स्टील ने कहा कि अमेरिका-ईरान युद्ध और उससे वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर पड़े दबाव ने, तेल व गैस पर निर्भरता के आर्थिक जोखिमों को और स्पष्ट कर दिया है.
उन्होंने कहा, “इस वर्ष जीवाश्म ईंधन की बढ़ती लागत ने दिखाया है कि नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेज़ी से बढ़ना कितना आवश्यक है.”
उनके अनुसार, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता से परिवारों, व्यवसायों और पूरी अर्थव्यवस्थाओं को भारी क़ीमत चुकानी पड़ती है. आयातित ईंधन पर निर्भर देश भू-राजनैतिक संकटों के दौरान आपूर्ति में बाधा और बढ़ती क़ीमतों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं.
भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 90 प्रतिशत आवश्यकता आयात से पूरी करता है. उन्होंने कहा, “तेल और गैस के आयात पर निर्भरता का अर्थ है कि संकट के समय आपूर्ति बाधित होती है और क़ीमतें बढ़ती हैं.”
वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में तेज़ी आई है. वर्ष 2025 में नवीकरणीय ऊर्जा ने दुनिया के सबसे बड़े बिजली स्रोत के रूप में कोयले को पीछे छोड़ दिया और स्वच्छ ऊर्जा में दो ट्रिलियन डॉलर से अधिक का निवेश हुआ.
लेकिन साइमन स्टील ने आगाह किया कि इस बदलाव की रफ़्तार अब भी पर्याप्त तेज़ नहीं है. कोयला, तेल व गैस पर लगातार निर्भरता वैश्विक ताप वृद्धि को बढ़ा रही है तथा जलवायु संकट को और गम्भीर बना रही है.
COP31: अब अमल की बारी
COP31 की तैयारियों के बीच, साइमन स्टील ने कहा कि अब ध्यान पहले से किए गए जलवायु वादों और तय लक्ष्यों को ज़मीन पर लागू करने पर होना चाहिए.
उन्होंने कहा, “इस वर्ष और आने वाले समय में कार्रवाई एजेंडा बेहद महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि दुनिया को पहले से तय संकल्पों और लक्ष्यों पर तेज़ी से अमल करना होगा.”
उन्होंने विद्युतीकरण को इस बदलाव का एक अहम हिस्सा बताया. उनके अनुसार, इससे अर्थव्यवस्थाओं को गति मिल सकती है, रोज़गार के अवसर बढ़ सकते हैं और लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो सकता है.
संयुक्त राष्ट्र जलवायु प्रक्रिया के तहत, पेरिस समझौते में किए गए राष्ट्रीय संकल्पों को ठोस परियोजनाओं में बदलने के प्रयास भी जारी हैं. इनमें संयुक्त राष्ट्र कार्बन बाज़ार को अमल में लाना शामिल है.
भीषण गर्मी और अनुकूलन
भीषण गर्मी, सूखे और वर्षा के बदलते रुझानों ने जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता और बढ़ा दी है.
साइमन स्टील ने कहा, “योरोप और एशिया के कुछ हिस्सों सहित दुनिया के कई क्षेत्रों में भीषण गर्मी की लहरों ने इस वर्ष पहले ही हज़ारों लोगों की जान ले ली है.”
उन्होंने कहा कि बढ़ते सूखे से फ़सलें प्रभावित हो रही हैं और खाद्य आपूर्ति व क़ीमतों पर भी दबाव बढ़ रहा है.
उन्होंने सरकारों से राष्ट्रीय अनुकूलन योजनाएँ तैयार करने और उन्हें लागू करने का आग्रह किया.
साथ ही, वैश्विक अनुकूलन लक्ष्य और बेलेम अनुकूलन संकेतकों पर प्रगति को इस वर्ष की अहम प्राथमिकताएँ बताया.
जलवायु वित्त अब भी अपर्याप्त
यूएन जलवायु प्रमुख ने कहा कि विकासशील देशों तक जलवायु वित्त अधिक तेज़ी और आसानी से पहुँचना चाहिए.
उन्होंने कहा, “जलवायु वित्त बढ़ रहा है, लेकिन पर्याप्त तेज़ी से नहीं. अधिक धन उन देशों तक पहुँचना चाहिए, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है.”
उन्होंने विकसित देशों से अपने वित्तीय वादे पूरे करने का आग्रह किया. इनमें 2035 तक हर वर्ष 300 अरब डॉलर उपलब्ध कराना शामिल है, जो विकासशील देशों के लिए सालाना 1.3 ट्रिलियन डॉलर जुटाने की व्यापक योजना का हिस्सा है.
उन्होंने विकास बैंकों और अन्तरराष्ट्रीय जलवायु कोषों के संसाधनों का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करने पर भी ज़ोर दिया.
‘दुनिया अब भी बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रही है’
साइमन स्टील ने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय जलवायु सहयोग के कारण वैश्विक तापमान में वृद्धि का अनुमान चार से पाँच डिग्री सेल्सियस से घटकर लगभग आधा रह गया है.
उन्होंने कहा, “यह दिखाता है कि हमने कितनी प्रगति की है. लेकिन तापमान वृद्धि का मौजूदा अनुमान अब भी बहुत अधिक है. यदि मानवता ने कार्रवाई की गति नहीं बढ़ाई, तो अर्थव्यवस्थाओं और आबादियों पर विनाशकारी असर पड़ेगा.”
उन्होंने कहा, “सबसे बड़ा जोखिम, विज्ञान एवं अरबों लोगों की वास्तविक परिस्थितियों की अनदेखी करते हुए बहुत धीमी गति से आगे बढ़ना है.”