Author: indiaclimatechange

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लोक कवि घाघः  घाघ कहें सुन भड्डरी लोगों के कंठ में आज भी जिंदा हैं 

लोक कवि घाघ आज भी  लोगों के कंठ में जिंदा हैं। आज भी लोग घाघ की कहावतें बात बात में सुनाते  और समझाते हैं। घाघ लोक ज्योतिषी थे

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सारस क्रेन की जनसंख्या: स्थिति, चुनौतियाँ और संरक्षण का महत्व – शोध

सारस क्रेन की जनसंख्या में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई। जनसंख्या गणना इस प्रकार थी: 2021 – 164, 2022 – 275, 2023 – 487, और 2024 – 605।

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हमारे अस्तित्व से जुड़ा है जल प्रबंधन

भारत को 6 जलक्षेत्रों (इसे मैं जल राज्य कहूंगा) में विभाजित किया है और सीमाओं का निर्धारण कर डिजिटल मैप विकसित किए हैं। इन 6 जल क्षेत्रों को 37 बेसिन, 117 कैचमेंट एरिया, 588 सबकैचमेंट एरिया, 3854 वाटरशेड, 49618 सब-वाटरशेड और कुल 3 लाख 21 हजार 324 माइक्रोवाटरशेड में बांटकर हर एक का जमीनी चिन्हांकन करके उसका एक यूनिक नेशनल कोड जारी किया है।

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मौसम पूर्वानुमान में अल-नीनो की भूमिका

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक सन 1953 से 2023 के बीच कुल 22 ला नीना साल दर्ज किए गए हैं, जिसमें से सिर्फ दो बार यानी साल 1974 और 2000 के मॉनसून सीजन में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि बाकी सालों के मॉनसून में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

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वनों की आग से बढ़ता पर्यावरणीय खतरा

वनों की आग ने एक बार फिर से आपदा प्रबंधन, पर्यावरणीय सुरक्षा, बहुमूल्य वनस्पति एवं वन्यजीवों के संरक्षण जैसे बहुत से प्रश्नों पर विचार करने को विवश कर दिया है।

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क्या ऐसी होती है स्मार्ट सिटी?

एक पहाड़ी शहर का सालाना बजट 100 करोड़ भी नहीं है और उसके सिर पर 2500 करोड़ की परियोजना का वजन डाल  दिया गया  । स्मार्ट सिटी के लिए गठित समिति की बैठकें  या नहीं होना या फिर बहुत काम होना, बैठक में सांसद आदि का काम शामिल होने की बात  इस रिपोर्ट में कही गई है जिससे परियोजना में जन प्रतिनिधियों के सुझाव कम ही शामिल हुए।

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अस्तित्व के लिए जूझती द्रव्यवती नदी

साल 1981 के जुलाई माह में आई बाढ़ में द्रव्यवती नदी का अस्तित्व बह गया था। बची-कुची कसर अतिक्रमण विकास और प्रदूषण ने पूरी करदी और द्रव्यवती कब अमानीशाह नाला में बदल गई पता नही चला। आज द्रव्यवती को लोग इसके नाम से नहीं बल्कि अमानीशाह के नाले के नाम से जानते हैं।

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भुला दी गई नदियों ने भयावह बना दिया वायनाड का दर्द

वायनाड – नीलगिरी पर्वतमाला के इन ऊंचे पहाड़ों से कभी एक नदी बहती थी । तेज गति वाली नदी जो गर्मी में भले उदास सी दिखती लेकिन बरसात के छह महीने तेज वेग में नीचे की तरफ जाती और पश्चिमी घाट की नदियों के संजाल में मिल जाती ।

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पर्यावरण की अनदेखी से बढ़ते भूस्खलन

केरल के वायनाड में तीव्र भूस्खलन ने मुंडक्कई, चूरलमाला कस्बों का अस्तित्व मिटा दिया

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अधर  में लटका जेनेटिक सरसों  का मसला

अनुमान  है कि अगले  साल  2025 -26 में यह मांग 34 मिलियन टन तक पहुँच जाएगी । हमारे खाद्य तेल के बाजार में सरसों के तेल की भागीदारी कोई 40 फीसदी है

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ढहते पहाड़  से बिगड़ता प्राकृतिक संतुलन

भूस्खलन अर्थात ऊँचाई से कीचड़, मलबा और चट्टानों का तेजी से नीचे आना . इससे जनजीवन ठहर सा जाता है .सडक और रेलवे लाइने बाधित होती हैं .

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राजधानी दिल्ली में यमुना आईसीयू में यमुना सफाई के दावे कागजी

यमुना नदी में प्रदूषण की स्थिति एक बार फिर से सुर्खियों में है। हाल ही में आई भारी बरसात के बाद भी यमुना साफ नहीं दिख रही है। जुलाई 2024 में यमुना में सफेदी की खबरें एक बार फिर से सामने आई हैं, जिससे पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।

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बाढ़ के कारण जानवरों का कब्रगाह बना कांजीरंगा

कांजीरंगा उद्यान की खासियत यहां मिलने वाला एक सींग का गैंडा है। इस प्रजाति  के सारी दुनिया में उपलब्ध गैंडों का  दो-तिहाई इसी क्षेत्र में मिलता है।

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प्लास्टिक कचरे का हब हिमाचल प्रदेश

पिछले साल हिमाचल प्रदेश से 45000 किलो प्लास्टिक कचरा एकत्रित किया गया था। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी प्रदेश में पूर्ण रूप से प्लास्टिक को बैन करने का निर्देश दिया था।

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