Author: indiaclimatechange

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क्या ऐसी होती है स्मार्ट सिटी?

एक पहाड़ी शहर का सालाना बजट 100 करोड़ भी नहीं है और उसके सिर पर 2500 करोड़ की परियोजना का वजन डाल  दिया गया  । स्मार्ट सिटी के लिए गठित समिति की बैठकें  या नहीं होना या फिर बहुत काम होना, बैठक में सांसद आदि का काम शामिल होने की बात  इस रिपोर्ट में कही गई है जिससे परियोजना में जन प्रतिनिधियों के सुझाव कम ही शामिल हुए।

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अस्तित्व के लिए जूझती द्रव्यवती नदी

साल 1981 के जुलाई माह में आई बाढ़ में द्रव्यवती नदी का अस्तित्व बह गया था। बची-कुची कसर अतिक्रमण विकास और प्रदूषण ने पूरी करदी और द्रव्यवती कब अमानीशाह नाला में बदल गई पता नही चला। आज द्रव्यवती को लोग इसके नाम से नहीं बल्कि अमानीशाह के नाले के नाम से जानते हैं।

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भुला दी गई नदियों ने भयावह बना दिया वायनाड का दर्द

वायनाड – नीलगिरी पर्वतमाला के इन ऊंचे पहाड़ों से कभी एक नदी बहती थी । तेज गति वाली नदी जो गर्मी में भले उदास सी दिखती लेकिन बरसात के छह महीने तेज वेग में नीचे की तरफ जाती और पश्चिमी घाट की नदियों के संजाल में मिल जाती ।

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पर्यावरण की अनदेखी से बढ़ते भूस्खलन

केरल के वायनाड में तीव्र भूस्खलन ने मुंडक्कई, चूरलमाला कस्बों का अस्तित्व मिटा दिया

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अधर  में लटका जेनेटिक सरसों  का मसला

अनुमान  है कि अगले  साल  2025 -26 में यह मांग 34 मिलियन टन तक पहुँच जाएगी । हमारे खाद्य तेल के बाजार में सरसों के तेल की भागीदारी कोई 40 फीसदी है

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ढहते पहाड़  से बिगड़ता प्राकृतिक संतुलन

भूस्खलन अर्थात ऊँचाई से कीचड़, मलबा और चट्टानों का तेजी से नीचे आना . इससे जनजीवन ठहर सा जाता है .सडक और रेलवे लाइने बाधित होती हैं .

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राजधानी दिल्ली में यमुना आईसीयू में यमुना सफाई के दावे कागजी

यमुना नदी में प्रदूषण की स्थिति एक बार फिर से सुर्खियों में है। हाल ही में आई भारी बरसात के बाद भी यमुना साफ नहीं दिख रही है। जुलाई 2024 में यमुना में सफेदी की खबरें एक बार फिर से सामने आई हैं, जिससे पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।

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बाढ़ के कारण जानवरों का कब्रगाह बना कांजीरंगा

कांजीरंगा उद्यान की खासियत यहां मिलने वाला एक सींग का गैंडा है। इस प्रजाति  के सारी दुनिया में उपलब्ध गैंडों का  दो-तिहाई इसी क्षेत्र में मिलता है।

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