वह अपने जीवनकाल में कम-से-कम एक पेड़ अवश्य लगाएगा और उसका पालन-पोषण करेगा, तो कुछ ही वर्षों में यह पूरी भारत भूमि पुनः हरी-भरी और समृद्ध हो सकती है।
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रंग बिरंगी तितलियों पर संकट!
रंग बिरंगी तितलियाँ विलुप्त होने की कगार पर, जीव वैज्ञानिकों ने आशंका जाहिर की है। रात की जगमग रोशनी तितलियों के लिए खतरनाक साबित हो रही है।
Read moreपानी की किल्लत से कराह रही दिल्ली
दिल्ली को सालाना ही पीने के पानी की किल्लत से दो – चार होना पड़ता है। पीने के पानी के लिए पानी के टेंकर पर लंबी – लंबी लाइन लगानी पड़ती हैं।
Read moreनदी
सरिता, नदी, तरंगिनि, तटिनी और न जाने क्या क्या नामों से हम प्रकृति के इस जलप्रवाह रूप को जानते है। नदियां अपने आप में चिंतन का विषय हैं।
Read moreलोक कवि घाघः घाघ कहें सुन भड्डरी लोगों के कंठ में आज भी जिंदा हैं
लोक कवि घाघ आज भी लोगों के कंठ में जिंदा हैं। आज भी लोग घाघ की कहावतें बात बात में सुनाते और समझाते हैं। घाघ लोक ज्योतिषी थे
Read moreमौसम पूर्वानुमान में अल-नीनो की भूमिका
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक सन 1953 से 2023 के बीच कुल 22 ला नीना साल दर्ज किए गए हैं, जिसमें से सिर्फ दो बार यानी साल 1974 और 2000 के मॉनसून सीजन में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि बाकी सालों के मॉनसून में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।
Read moreवनों की आग से बढ़ता पर्यावरणीय खतरा
वनों की आग ने एक बार फिर से आपदा प्रबंधन, पर्यावरणीय सुरक्षा, बहुमूल्य वनस्पति एवं वन्यजीवों के संरक्षण जैसे बहुत से प्रश्नों पर विचार करने को विवश कर दिया है।
Read moreपर्यावरण की अनदेखी से बढ़ते भूस्खलन
केरल के वायनाड में तीव्र भूस्खलन ने मुंडक्कई, चूरलमाला कस्बों का अस्तित्व मिटा दिया
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