Category: Article (लेख)

आखिर बड्डाल में ‘क्लोरफेनापायर  कहाँ से आया  ?

हालांकि एट्रोपिन का इस्तेमाल ऑर्गेनोफॉस्फोरस विषाक्तता के लिए एक मारक है, लेकिन आश्चर्यजनक यह है कि किसी भी बीमार या…

यहां प्लास्टिक, वहां प्लास्टिक, आखिर कहां नहीं है प्लास्टिक ?

सुनील कुमार महला प्लास्टिक मनुष्य से लेकर धरती के समस्त जीवों, हमारे पर्यावरण और पारिस्थितिकी के लिए एक प्रकार से…

स्वच्छ जल की सुलभता: आज भी एक चुनौती !

सुनील कुमार महला, फ्रीलांस राइटर भौगोलिक दृष्टि से भारत विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है, जबकि जनसंख्या के दृष्टिकोण…

विश्व जल दिवस के निमित्‍त 23 मार्च को ‘क्‍या पानीदार रहेगी हमारी दुनिया?’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन

जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन के बढ़ते खतरों के बीच ‘सेवा-सुरभि’ संस्था द्वारा विश्व जल दिवस के अवसर पर ‘क्या…

प्लास्टिक कचरे को कम करना होगा

पंकज चतुर्वेदी पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के स्थानीय निकायों को ठोस कूड़े के निष्पादन में कोताही बरतने पर…

जलवायु परिवर्तन से गड़बड़ा सकती है  भारत  की अर्थव्यवस्था

पंकज चतुर्वेदी तमिलनाडु का धरमपुर रेशम के लिए मशहूर है । यहा हर साल लगभग 17 लाख टन रेशम कोकून…

बैलों से खेती: छोटे व सीमांत किसानों को प्रोत्साहन ।

सुनील कुमार महला राजस्थान सरकार की ओर से छोटे और सीमांत किसानों के लिए कुछ समय पहले ही एक शानदार…

भूमध्य सागर के सबसे गहरे बिंदु तक जा पहुंचा प्लास्टिक का ज़हर !

सुनील कुमार महला प्लास्टिक मानवजाति ही नहीं धरती के सभी प्राणियों के ‘जी का जंजाल’ बनता चला जा रहा है।…

वैश्विक गेहूं और चावल उत्पादन में वृद्धि एक अच्छा संकेत

सुनील कुमार महला इस साल यानी कि वर्ष 2025 में वैश्विक गेहूं और चावल उत्पादन में मामूली वृद्धि का अनुमान…