Category: Article (लेख)

यमुना नदी

नदी

सरिता, नदी, तरंगिनि, तटिनी और न जाने क्या क्या नामों से हम प्रकृति के इस जलप्रवाह रूप को जानते है। नदियां अपने आप में चिंतन का विषय हैं।

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लोक कवि घाघः  घाघ कहें सुन भड्डरी लोगों के कंठ में आज भी जिंदा हैं 

लोक कवि घाघ आज भी  लोगों के कंठ में जिंदा हैं। आज भी लोग घाघ की कहावतें बात बात में सुनाते  और समझाते हैं। घाघ लोक ज्योतिषी थे

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मौसम पूर्वानुमान में अल-नीनो की भूमिका

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक सन 1953 से 2023 के बीच कुल 22 ला नीना साल दर्ज किए गए हैं, जिसमें से सिर्फ दो बार यानी साल 1974 और 2000 के मॉनसून सीजन में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि बाकी सालों के मॉनसून में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

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वनों की आग से बढ़ता पर्यावरणीय खतरा

वनों की आग ने एक बार फिर से आपदा प्रबंधन, पर्यावरणीय सुरक्षा, बहुमूल्य वनस्पति एवं वन्यजीवों के संरक्षण जैसे बहुत से प्रश्नों पर विचार करने को विवश कर दिया है।

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पर्यावरण की अनदेखी से बढ़ते भूस्खलन

केरल के वायनाड में तीव्र भूस्खलन ने मुंडक्कई, चूरलमाला कस्बों का अस्तित्व मिटा दिया

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लोकवादी गांधी की पर्यावरणीय दृष्टि

गांधी की पर्यावरणीय दृष्टि, पर्यावरण की लोक-संरक्षण परंपरा से संबद्ध या प्रभावित है। आख़िर, भौतिकता निरपेक्ष सादगीपूर्ण उनका जीवन भी किसी अंतिम जन के रहन-सहन का ही अनुकरण था।

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शीघ्र निस्तारित हों पर्यावरणीय अपराध

आंकड़ों के अनुसार 1986 से 2023 के बीच जलवायु परिवर्तन से जुड़े लगभग 2,666 मामले दायर हुए हैं। इनमें से 70 फीसदी मामले 2015 के बाद दर्ज किए गए। पिछले तीन दशकों में अमेरिका में जलवायु परिवर्तन से संबंधित सबसे ज्यादा 1,745 मामले दायर किए गए।

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पुरानी भारतीय पद्धतियों से प्लास्टिक मुक्ति की कल्पना होगी साकार

दुनिया के करीब 60 देशों ने प्लास्टिक की थैलियों और सिर्फ एक बार इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक के उत्पादन पर काबू पाने के लिए कानून बनाये है। ‘‘वनूआतू’’ नाम का छोटा सा देश एक बार इस्तेमाल होने वाले हर तरह के प्लास्टिक पर रोक लगाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। प्लास्टिक के कचरे की समस्या से निजात पाने के लिए प्लास्टिक की थैलियों के विकल्प के रूप में जूट या कपड़े से बने थैलों का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा किया जाना चाहिए। साथ ही प्लास्टिक कचरे का समुचित इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

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प्रकृति से प्रेम कर ही बचाई जा सकती है धरती

खिलते हुए फूल, सुहानी हवा, पेड़-पौधे, जीव-जन्तु, ऊंचाई से गिरते झरनें, बहता हुआ पानी, नदियां व पहाड़, सूरज, चांद और तारे-ये सब प्रकृति के ही अवयव हैं। प्रकृति के ये अवयव अनेक तौर-तरीकों से हमें प्यार करने के लिए प्रेरित करते हैं।

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जीवनदायिनी गंगा को संजीवनी मिलना बहुत जरूरी

सीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार, 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में से 31 में नदियों का प्रवाह प्रदूषित है।

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हिंदू कालेज में एक पेड़ मां के नाम अभियान

एक पेड़ मां के नाम ऐसा अभियान है जिसमें इन दोनों से एक साथ जुड़ाव महसूस होता है। हिंदू कालेज में अभियान का शुभारंभ करते हुए प्राचार्य प्रो अंजू श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना की महाविद्यालय इकाई ने इस अभियान से जुड़कर पर्यावरण और प्रकृति के क्षेत्र में प्रशंसनीय कार्य किया है।

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कार्यपालिका के सामने लाचार-असहाय न्यायपालिका

छतरपुर के तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने के लिये मप्र जबलपुर उच्च न्यायालय ने दायर जनहित याचिका क्रमांक 6373/2011 में सुनवाई बाद तब के मुख्य न्यायाधीश श्री ए एम खानवेलकर की डिवीजन बेंच ने छतरपुर जिले के सभी तालाबों से अतिक्रमण हटाने का 7 अक्टूबर 2014 को आदेश दिया था।

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स्थानीय पर्यावरणीय समस्याएँ और सकारात्मक कार्य

स्थानीय पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान केवल सरकार और बड़े संगठनों की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।

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मानसून में मन के आंसू

क्या जल बिना जीवन संभव है? क्या जंगल बिना मंगल संभव है? और क्या समाज की संपन्नता के बिना व्यक्ति की संपन्नता संभव है? सत्ता को समाज के आंसू दिखते भी हैं या नहीं? समाज को अपने आंसू पोछना सीखना होगा।

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