पंकज चतुर्वेदी ‘आजादी के बाद भारत की सबसे बड़ी त्रासदी किसको कहा जा सकता है ?’ यदि इस सवाल का जवाब ईमानदारी से खोजा जाए […]
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अदालती तारीखों में बूढ़ा होता किशोर सागर
(धीरज चतुर्वेदी छतरपुर बुंदेलखंड) जब सारे देश में आजादी के 75 साल होने पर 68 हजार अमृत सरोवर बनाने का अभियान चल रहा था, तब […]
Read moreआखिर क्यों नहीं रहा हाथी मेरा साथी ?
पंकज चतुर्वेदी दीपवाली के ठीक एक दिन पहले मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ में एक साथ दस हाथियों के मारे जाने से दुनिया सन्न है । […]
Read moreतालाबों के सामुदायिक प्रबंधन का पाठ पढ़ाते हैं ‘ऐरी’
पंकज चतुर्वेदी वहां कम बारिश होती है, इलाके की जमीन के भीतर के पानी में नमक ज्यादा है, यह बात वहां का समाज सदियों पहले […]
Read moreदिल्ली में जहर हो चुका भू जल
पंकज चतुर्वेदी देश की राजधानी की आबादी बढ़ती जा रही है और उसी गति से यहाँ पानी की मांग बढ़ यही है । यमुना से […]
Read moreभूस्खलन को हल्के में लेना भारी पड़ेगा पहाड़ को
पंकज चतुर्वेदी अब तो बरसात बंद हो गई है लेकिन उत्तराखंड के पहाड़ों का रूठना बंद नहीं हो रहा । एक तरफ प्रधानमंत्री का “10 […]
Read moreपरम्परा के नाम पर जीवन से खिलवाड़ क्यों ?
रोहित कौशिक दीपावली के दौरान होने वाले वायु प्रदूषण से वातावरण में हानिकारक गैसों एवं तत्वों की मात्रा आश्चर्यजनक रूप से बढ़ जाती है। दीपावली […]
Read moreआओ ! छठ के घाट साल भर संवारें
पंकज चतुर्वेदी दिल्ली की आबादी में इतने अधिक पूर्वांचली न होते और छठ पर्व की इतनी धूम न होती तो शायद लोगों को यमुना की […]
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