Category: Climate Change (जलवायु परिवर्तन)

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लद्दाख: जलवायु संकट की दहलीज़ पर

लद्दाख जलवायु संकट के कगार पर है; हमें तत्काल कार्रवाई की जरूरत है ताकि इस ऊँचे दर्रों की भूमि को बचाया जा सके

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मौसम पूर्वानुमान में अल-नीनो की भूमिका

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक सन 1953 से 2023 के बीच कुल 22 ला नीना साल दर्ज किए गए हैं, जिसमें से सिर्फ दो बार यानी साल 1974 और 2000 के मॉनसून सीजन में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि बाकी सालों के मॉनसून में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

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क्या ऐसी होती है स्मार्ट सिटी?

एक पहाड़ी शहर का सालाना बजट 100 करोड़ भी नहीं है और उसके सिर पर 2500 करोड़ की परियोजना का वजन डाल  दिया गया  । स्मार्ट सिटी के लिए गठित समिति की बैठकें  या नहीं होना या फिर बहुत काम होना, बैठक में सांसद आदि का काम शामिल होने की बात  इस रिपोर्ट में कही गई है जिससे परियोजना में जन प्रतिनिधियों के सुझाव कम ही शामिल हुए।

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पर्यावरण की अनदेखी से बढ़ते भूस्खलन

केरल के वायनाड में तीव्र भूस्खलन ने मुंडक्कई, चूरलमाला कस्बों का अस्तित्व मिटा दिया

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ढहते पहाड़  से बिगड़ता प्राकृतिक संतुलन

भूस्खलन अर्थात ऊँचाई से कीचड़, मलबा और चट्टानों का तेजी से नीचे आना . इससे जनजीवन ठहर सा जाता है .सडक और रेलवे लाइने बाधित होती हैं .

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सी ई ई डब्लू  और इंडिया क्लाइमिट कोलाबोरेटिव ः जलवायु परिवर्तन जोखिम

सी ई ई डब्लू  और इंडिया क्लाइमिट कॉलब्रेशन  द्वारा भारत के हर जिले की जलवायु परवर्तन के प्रति संवेदनशीलता और संभावित प्राकृतिक  आपदा पर यह शानदार रिपोर्ट  हर देशवासी को पढ़ना चाहिए  क्योंकि यह  स्थानीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन से उपज रहे संकट के  निदान के तलाशने  में सहायक है 

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जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक खेती

जलवायु परिवर्तन पर कृषि वैज्ञानिकों ने चेताया है कि अगर हम इसी तरह से खेती-बाड़ी करते रहें तो दुनिया में केवल 60 वर्षों तक ही खेती की जा सकती है। ऐसी स्थिति में कृषि को भविष्य के लिए संजोने रखने हेतू प्राकृतिक खेती ही सबसे उत्तम विकल्प है।

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आत्मनिर्भर विकास लक्ष्यऔर कोंकणी साहित्य

1992 में ब्राजील के रियो डी जनेरियो में संचालित पृथ्वी शिखर सम्मेलन (Earth Summit) में ‘एजेंडा 21’ शीर्षक के तहत 178 से अधिक देशों द्वारा अपनाई गई 21वीं सदी की घोषणा, मानव गतिविधियों के कारण होने वाले पर्यावरण (Environment) और पारिस्थितिकी (Ecology) के विनाश का मुकाबला करने का एक निर्णायक कदम माना जा सकता है।उसी सम्मेलन ने जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर एक सम्मेलन की मेजबानी की, जिसे जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) के रूप में जाना जाता है।

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