पर्यावरण के विध्वंस पर विकास की मुहर नहीं लग सकती
पंकज चतुर्वेदी विकास की अंधी दौड़ और पर्यावरण संरक्षण के बीच लंबे समय से चल रहे टकराव के बीच देश के सर्वोच्च न्यायालय का ताजा […]
Read moreA Portal Dedicate to Indian Climate Change and Ecology in Hindi
पंकज चतुर्वेदी विकास की अंधी दौड़ और पर्यावरण संरक्षण के बीच लंबे समय से चल रहे टकराव के बीच देश के सर्वोच्च न्यायालय का ताजा […]
Read moreयमुना नदी में प्रदूषण की स्थिति एक बार फिर से सुर्खियों में है। हाल ही में आई भारी बरसात के बाद भी यमुना साफ नहीं दिख रही है। जुलाई 2024 में यमुना में सफेदी की खबरें एक बार फिर से सामने आई हैं, जिससे पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।
Read moreकांजीरंगा उद्यान की खासियत यहां मिलने वाला एक सींग का गैंडा है। इस प्रजाति के सारी दुनिया में उपलब्ध गैंडों का दो-तिहाई इसी क्षेत्र में मिलता है।
Read moreपिछले साल हिमाचल प्रदेश से 45000 किलो प्लास्टिक कचरा एकत्रित किया गया था। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी प्रदेश में पूर्ण रूप से प्लास्टिक को बैन करने का निर्देश दिया था।
Read moreसी ई ई डब्लू और इंडिया क्लाइमिट कॉलब्रेशन द्वारा भारत के हर जिले की जलवायु परवर्तन के प्रति संवेदनशीलता और संभावित प्राकृतिक आपदा पर यह शानदार रिपोर्ट हर देशवासी को पढ़ना चाहिए क्योंकि यह स्थानीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन से उपज रहे संकट के निदान के तलाशने में सहायक है
Read moreदेश की नदियां इस समय बेहद संकट के दौर से गुजर रही हैं , केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने देश के सभी नदियों की स्थित पर नवंबर 2022 में एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की थी । यहाँ इस रिपोर्ट को देखा जा सकता है ।
Read moreगांधी की पर्यावरणीय दृष्टि, पर्यावरण की लोक-संरक्षण परंपरा से संबद्ध या प्रभावित है। आख़िर, भौतिकता निरपेक्ष सादगीपूर्ण उनका जीवन भी किसी अंतिम जन के रहन-सहन का ही अनुकरण था।
Read moreआंकड़ों के अनुसार 1986 से 2023 के बीच जलवायु परिवर्तन से जुड़े लगभग 2,666 मामले दायर हुए हैं। इनमें से 70 फीसदी मामले 2015 के बाद दर्ज किए गए। पिछले तीन दशकों में अमेरिका में जलवायु परिवर्तन से संबंधित सबसे ज्यादा 1,745 मामले दायर किए गए।
Read moreजलवायु परिवर्तन पर कृषि वैज्ञानिकों ने चेताया है कि अगर हम इसी तरह से खेती-बाड़ी करते रहें तो दुनिया में केवल 60 वर्षों तक ही खेती की जा सकती है। ऐसी स्थिति में कृषि को भविष्य के लिए संजोने रखने हेतू प्राकृतिक खेती ही सबसे उत्तम विकल्प है।
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