कर्नाटक के आदिवासियों के लिए स्वास्थ्य और जीवनयापन के मुद्दे, जंगलों से उनके गहरे रिश्ते और विस्थापन के इतिहास में निहित हैं। इसलिए स्वास्थ्य का […]
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बैगा समुदाय: जंगल हमारे बिना नहीं, हम जंगल के बिना नहीं
जंगल और उसकी संरचना को और बेहतर बनाने में क्या योगदान चंद्र प्रताप सिंह, प्रेमलाल बैगा छत्तीसगढ़ के जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में विशेष रूप से कमजोर […]
Read moreतबाही अकेले अरावली तक ही नहीं रुकती
“ हर कोई शिखर पर पहुंचना चाहता है, लेकिन पहाड़ की चोटी पर कोई विकास नहीं होता। घाटी में ही हम हरी-भरी घास और उपजाऊ […]
Read moreकॉमन्स और स्वशासन: समुदायों की भागीदारी क्यों जरूरी है
सामुदायिक संसाधनों पर चर्चा और जागरुकता बनाए रखने के लिए ग्राम-सभाओं को सशक्त बनाना और उनके एजेंडे को कॉमन्स और समुदाय की जरूरतों पर केंद्रित […]
Read moreजल-जंगल-जमीन से जुड़ी शब्दावली में क्या-क्या शामिल है?
वन और पर्यावरण से जुड़े अधिकारों के विभिन्न पहलुओं से संबंधित महत्वपूर्ण शब्द, जो भारतीय वन अधिकार और अन्य कानूनों को समझने में मददगार हैं। […]
Read moreसरकारी आंकड़े जंगलों के क्षेत्रफल के साथ गुणवत्ता की भी बात क्यों नहीं करते?
जंगल से जुड़े सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण करती पर्यावरण जानकार, देबादित्यो सिन्हा और हृदयेश जोशी की एक बातचीत । हृदयेश जोशी सरकार द्वारा जारी नए […]
Read moreफिर भेडिये , फिर बहराईच !
बहराइच के गाँव-गाँव से भेडियों की दहशत की खबरे पंकज चतुर्वेदी 27 सितम्बर को जंगल महकमे ने घोषणा कर दी कि उत्पात मचाने वाले भेडिये […]
Read moreहाथी क्यों न रहा साथी ?
‘द क्रिटिकल नीड आफ एलेफेंट ’ उब्लूडब्लूएफ-इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में इस समय कोई 50 हजार हाथी बचे हैं इनमें से साठ फीसदी का आसरा भारत है। देश के 14 राज्यों में 32 स्थान हाथियों के लिए संरक्षित हैं।
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