Tag: #जंगल

एक जगह कुछ साल खेती कर, फिर दूसरी जगह चला जाता था ताकि जंगल खुद को दोबारा तैयार कर सकें। | चित्र साभार: चंद्र प्रताप सिंह

बैगा समुदाय: जंगल हमारे बिना नहीं, हम जंगल के बिना नहीं

जंगल और उसकी संरचना को और बेहतर बनाने में क्या योगदान चंद्र प्रताप सिंह, प्रेमलाल बैगा छत्तीसगढ़ के जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में विशेष रूप से कमजोर […]

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तबाही अकेले अरावली तक ही नहीं रुकती

तबाही अकेले अरावली तक ही नहीं रुकती

“ हर कोई शिखर पर पहुंचना चाहता है, लेकिन पहाड़ की चोटी पर कोई विकास नहीं होता। घाटी में ही हम हरी-भरी घास और उपजाऊ […]

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कॉमन्स और स्वशासन: समुदायों की भागीदारी क्यों जरूरी है

कॉमन्स और स्वशासन: समुदायों की भागीदारी क्यों जरूरी है

सामुदायिक संसाधनों पर चर्चा और जागरुकता बनाए रखने के लिए ग्राम-सभाओं को सशक्त बनाना और उनके एजेंडे को कॉमन्स और समुदाय की जरूरतों पर केंद्रित […]

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जल-जंगल-जमीन से जुड़ी शब्दावली में क्या-क्या शामिल है?

जल-जंगल-जमीन से जुड़ी शब्दावली में क्या-क्या शामिल है?

वन और पर्यावरण से जुड़े अधिकारों के विभिन्न पहलुओं से संबंधित महत्वपूर्ण शब्द, जो भारतीय वन अधिकार और अन्य कानूनों को समझने में मददगार हैं। […]

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सरकारी आंकड़े जंगलों के क्षेत्रफल के साथ गुणवत्ता की भी बात क्यों नहीं करते?

सरकारी आंकड़े जंगलों के क्षेत्रफल के साथ गुणवत्ता की भी बात क्यों नहीं करते?

जंगल से जुड़े सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण करती पर्यावरण जानकार, देबादित्यो सिन्हा और हृदयेश जोशी की एक बातचीत । हृदयेश जोशी सरकार द्वारा जारी नए […]

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फिर भेडिये , फिर बहराईच !

फिर भेडिये , फिर बहराईच !

बहराइच के गाँव-गाँव से  भेडियों की दहशत की खबरे पंकज चतुर्वेदी 27 सितम्बर को जंगल महकमे ने घोषणा कर दी कि उत्पात मचाने वाले भेडिये  […]

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फोटो - गूगल

हाथी क्यों न रहा साथी ?

‘द क्रिटिकल नीड आफ एलेफेंट ’ उब्लूडब्लूएफ-इंडिया की  रिपोर्ट बताती है कि  दुनिया में इस समय कोई 50 हजार हाथी बचे हैं इनमें से साठ फीसदी का आसरा  भारत है।  देश  के 14 राज्यों में 32 स्थान हाथियों के लिए संरक्षित हैं।

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