पंकज चतुर्वेदी वहां कम बारिश होती है, इलाके की जमीन के भीतर के पानी में नमक ज्यादा है, यह बात वहां का समाज सदियों पहले […]
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पानी बचाना है तो बचाएं पारंपरिक जल-प्रणालियाँ
सन् 1944 में गठित ‘फेमिन इनक्वायरी कमीशन’ ने साफ निर्देश दिए थे कि आने वाले सालों में संभावित पेयजल संकट से जूझने के लिए तालाब ही कारगर होंगे । कमीशन की रिर्पाट तो लाल बस्ते में कहीं दब गई और देश की आजादी के बाद इन पुश्तैनी तालाबों की देखरेख
करना तो दूर, उनकी दुर्दशा करना शुरू कर दिया ।