शिवचरण चौहान आज मौसम का पूर्वानुमान लगाने के लिए मौसम विज्ञान केंद्र खुल गए हैं। भारत सहित अनेक देशों ने अंतरिक्ष में उपग्रह भेज रखे […]
Read moreTag: #जलवायुपरिवर्तन
ओज़ोन परत संरक्षण और जलवायु कार्यवाही को बढ़ाना
( विश्व ओज़ोन दिवस 16 सितम्बर पर विशेष ) डॉ. मौहम्मद अवैस ओज़ोन गैस ऑक्सीजन का एक अनुरूप है यह वायुमंडल में बहुत कम […]
Read moreजलवायु परिवर्तन और जल संकट पर प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण ही एकमात्र समाधान
विकास परसराम मेश्राम जल संकट केवल हमारे देश की ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की समस्या है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, आज दुनिया की 26 […]
Read moreहमारे अस्तित्व से जुड़ा है जल प्रबंधन
भारत को 6 जलक्षेत्रों (इसे मैं जल राज्य कहूंगा) में विभाजित किया है और सीमाओं का निर्धारण कर डिजिटल मैप विकसित किए हैं। इन 6 जल क्षेत्रों को 37 बेसिन, 117 कैचमेंट एरिया, 588 सबकैचमेंट एरिया, 3854 वाटरशेड, 49618 सब-वाटरशेड और कुल 3 लाख 21 हजार 324 माइक्रोवाटरशेड में बांटकर हर एक का जमीनी चिन्हांकन करके उसका एक यूनिक नेशनल कोड जारी किया है।
Read moreढहते पहाड़ से बिगड़ता प्राकृतिक संतुलन
भूस्खलन अर्थात ऊँचाई से कीचड़, मलबा और चट्टानों का तेजी से नीचे आना . इससे जनजीवन ठहर सा जाता है .सडक और रेलवे लाइने बाधित होती हैं .
Read moreसी ई ई डब्लू और इंडिया क्लाइमिट कोलाबोरेटिव ः जलवायु परिवर्तन जोखिम
सी ई ई डब्लू और इंडिया क्लाइमिट कॉलब्रेशन द्वारा भारत के हर जिले की जलवायु परवर्तन के प्रति संवेदनशीलता और संभावित प्राकृतिक आपदा पर यह शानदार रिपोर्ट हर देशवासी को पढ़ना चाहिए क्योंकि यह स्थानीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन से उपज रहे संकट के निदान के तलाशने में सहायक है
Read moreजलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक खेती
जलवायु परिवर्तन पर कृषि वैज्ञानिकों ने चेताया है कि अगर हम इसी तरह से खेती-बाड़ी करते रहें तो दुनिया में केवल 60 वर्षों तक ही खेती की जा सकती है। ऐसी स्थिति में कृषि को भविष्य के लिए संजोने रखने हेतू प्राकृतिक खेती ही सबसे उत्तम विकल्प है।
Read moreआत्मनिर्भर विकास लक्ष्यऔर कोंकणी साहित्य
1992 में ब्राजील के रियो डी जनेरियो में संचालित पृथ्वी शिखर सम्मेलन (Earth Summit) में ‘एजेंडा 21’ शीर्षक के तहत 178 से अधिक देशों द्वारा अपनाई गई 21वीं सदी की घोषणा, मानव गतिविधियों के कारण होने वाले पर्यावरण (Environment) और पारिस्थितिकी (Ecology) के विनाश का मुकाबला करने का एक निर्णायक कदम माना जा सकता है।उसी सम्मेलन ने जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर एक सम्मेलन की मेजबानी की, जिसे जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) के रूप में जाना जाता है।
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