वैज्ञानिक विश्लेषण, BOD–DO संतुलन और जल संकट की चुनौती अजय सहाय गंगोत्री ग्लेशियर, जो उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित है, गंगा नदी का प्रमुख […]
Read moreTag: #जलसंकट
शहरी बाढ़ बनाम वर्षा जल प्रबंधन
वैश्विक सर्वोत्तम मॉडल के साथ भारत के लिए वैज्ञानिक समाधान अजय सहाय वर्ष 2025 में भारत के विभिन्न महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, […]
Read moreपानी बचाने की क्रांति
भारतीय अनुभव और वैश्विक तकनीकों का मेल अजय सहाय भारत में सरकारी तालाबों की भूमिका वर्ष 2047 तक ‘जल आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति […]
Read moreछोटी-छोटी आदतें, बड़ी जल क्रांति
भारत में जल बचत का वैज्ञानिक मॉडल अजय सहाय छोटी-छोटी आदतों से पूरे भारत में जल बचत की क्रांति संभव है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की […]
Read moreसर्दियों में सूखते जलस्रोत
जलवायु परिवर्तन, वाष्पीकरण और भूगर्भीय फ्रैक्चर का वैज्ञानिक सत्य अजय सहाय आज के समय में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण सर्दियों के मौसम (Winter […]
Read moreपानी पंचायत
जल संकट समाधान की जनसहभागिता आधारित क्रांति और जल आत्मनिर्भर भारत 2047 का मार्गदर्शक मॉडल अजय सहाय पानी पंचायत की अवधारणा भारत के ग्रामीण क्षेत्रों […]
Read moreमौत का कारण बनता पानी
मौत का कारण बनता पानी रवीन्द्र व्यास दुनिया की महान सभ्यताओं का विकास नदी और सरोवरों के तट पर हुआ । कहीं गांव और शहर […]
Read moreजल निधियों को उजाड़ने से प्यासे हैं शहर
जब दिल्ली में यमुना लबालब होती है तो यहाँ के नाले- कारखाने उसमें इतना जहर घोलते हैं कि नदी सारे रास्ते हाँफती है और जब पानी का संकट खड़ा होता है तो नदी की याद आती है । यह हाल केवल दिल्ली का नहीं, देश के लगभग सभी बड़े शहरों का है । अपने तालाबों पर मिट्टी डाल कर कंक्रीट से तन गया बैंगलुरु तो ’केपटाउन’ की तरह जल-शून्य की चेतावनी से बहाल है और अभी पंद्रह दिन में जब मानसून आएगा तो शहर जल भराव के चलते ठिठक जाएगा ।
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