भारत को 6 जलक्षेत्रों (इसे मैं जल राज्य कहूंगा) में विभाजित किया है और सीमाओं का निर्धारण कर डिजिटल मैप विकसित किए हैं। इन 6 जल क्षेत्रों को 37 बेसिन, 117 कैचमेंट एरिया, 588 सबकैचमेंट एरिया, 3854 वाटरशेड, 49618 सब-वाटरशेड और कुल 3 लाख 21 हजार 324 माइक्रोवाटरशेड में बांटकर हर एक का जमीनी चिन्हांकन करके उसका एक यूनिक नेशनल कोड जारी किया है।
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सी पी सी बीः संकट में देश की नदियाँ
देश की नदियां इस समय बेहद संकट के दौर से गुजर रही हैं , केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने देश के सभी नदियों की स्थित पर नवंबर 2022 में एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की थी । यहाँ इस रिपोर्ट को देखा जा सकता है ।
Read moreफिर पानी के प्रति इतनी बेपरवाही क्यों ?
पानी पीने के अलावा शौच, स्नान, कपड़े धोना, खाना बनाना, साफ-सफाई करना और अपने वाहनों को धोना आदि कामों में इस्तेमाल किया जाता है। पानी के बगैर जिंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती ।
Read moreजीवनदायिनी गंगा को संजीवनी मिलना बहुत जरूरी
सीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार, 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में से 31 में नदियों का प्रवाह प्रदूषित है।
Read moreछोटी नदियों को हड़पने से डूबते हैं शहर
छोटी नदियां अक्सर गाँव, कस्बों में बहुत कम दूरी में बहती हैं । कई बार एक ही नदी के अलग अलग गाँव में अलग-अलग नाम होते हैं । बहुत नदियों का तो रिकार्ड भी नहीं है । हमारे लोक समाज और प्राचीन मान्यता नदियों और जल को ले कर बहुत अलग थी, बड़ी नदियों से दूर घर-बस्ती हो ।
Read moreयमुना की बेपरवाही से प्यासी है दिल्लीः पंकज चतुर्वेदी
“रिवर” से “सीवर” बन गई दिल्ली में यमुना को नया जीवन देने के लिए आज से कोई 9 साल पहले राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण अर्थात एन जी टी ने एक आदेश दिया था कि दिल्ली मने नदी का जहां तक बहाव है अर्थात उसका फ्लड प्लैन या कछार है , उसका सीमांकन किया जाए ।
Read moreछोटी नदियों की सेहत सुधारे बगैर नहीं बचेगी गंगा-यमुना
2014 में सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने गंगा को निर्मल और अविरल बनाने को खासा महत्व दिया था और इसके लिए नमामि गंगे योजना की घोषणा की थी। योजना पर काम अक्टूबर 2016 में आए आदेश के बाद से शुरु हो सका था। वित्त वर्ष 2014-15 से लेकर 2020-2021 तक इस नमामि गंगे योजना के तहत पहले 20 हजार करोड़ रुपए खर्च करने का रोडमैप तैयार किया गया था जो कि बाद में बढ़ाकर 30 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया।
Read moreगाद से गहराता नदियों का संकट
विदित हो सन् 2016 में केंद्र सरकार द्वारा गठित चितले कमेटी ने साफ कहा था कि नदी में बढती गाद का एकमात्र निराकरण यही है कि नदी के पानी को फैलने का पर्याप्त स्थान मिले।
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