Tag: #भारतकीनदियाँ

गंगा जल की वैज्ञानिक शुद्धता बैक्टीरियोफेज वायरसों की अद्वितीयता और आत्मशुद्धिकरण क्षमता का रहस्य

गंगा जल की वैज्ञानिक शुद्धता

बैक्टीरियोफेज वायरसों की अद्वितीयता और आत्मशुद्धिकरण क्षमता का रहस्य अजय सहाय गंगा नदी का जल धार्मिक आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ वैज्ञानिक रूप से […]

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गंगोत्री ग्लेशियर, जल गुणवत्ता और गंगा नदी का भविष्य

गंगोत्री ग्लेशियर, जल गुणवत्ता और गंगा नदी का भविष्य

वैज्ञानिक विश्लेषण, BOD–DO संतुलन और जल संकट की चुनौती अजय सहाय गंगोत्री ग्लेशियर, जो उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित है, गंगा नदी का प्रमुख […]

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नदियों की कहानी, समुदायों की ज़ुबानी

नदियों की कहानी, समुदायों की ज़ुबानी

पूर्वोत्तर जनस्मृति का डिजिटल अभिलेख वंदना मेनन सदियों से पूर्वोत्तर भारत की महान नदियां इस क्षेत्र की सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान को आकार देती रही […]

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इंद्रावती: लोकगाथा, लोकसाहित्य और बस्तर की जलसंस्कृति का जीवंत संगम

इंद्रावती: लोकगाथा, लोकसाहित्य और बस्तर की जलसंस्कृति का जीवंत संगम

छत्तीसगढ़ की इंद्रावती नदी डॉ. रुपेन्द्र कवि नदियाँ जब केवल जलधारा न रहकर संस्कृति की वाहक, लोक स्मृति की रक्षक और समूह-मानवता की चेतना बन […]

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नदी बचाओ, जीवन बचाओ: भारत की नदियों का भविष्य

नदी बचाओ, जीवन बचाओ

भारत की नदियों का भविष्य अजय सहाय नदी बचाओ, जीवन बचाओ: भारत की नदियों का भविष्य विषय पर जब हम बात करते हैं तो यह […]

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छोटी नदियों का सूखना: वर्टिकल और हॉरिज़ॉन्टल फ्रैक्चर की वैज्ञानिक गाथा

छोटी नदियों का सूखना

वर्टिकल और हॉरिज़ॉन्टल फ्रैक्चर की वैज्ञानिक गाथा अजय सहाय आज के समय में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण सर्दियों के मौसम (Winter Season) में […]

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जल बम के मुहाने  पर बैठा है दक्षिण एशिया

जल बम के मुहाने  पर बैठा है दक्षिण एशिया

जब जल पर जंग होगी ! पंकज चतुर्वेदी  ‘खून और आतंकवाद साथ नहीं चल सकता’- पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के विरुद्ध भारतीय नीति ने पानी की […]

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जल निधियों  को उजाड़ने से प्यासे हैं शहर

जल निधियों  को उजाड़ने से प्यासे हैं शहर

जब दिल्ली में यमुना लबालब होती है तो यहाँ के नाले- कारखाने उसमें इतना जहर घोलते हैं कि नदी सारे रास्ते हाँफती है और जब पानी का संकट खड़ा होता है तो नदी की याद आती है । यह हाल केवल दिल्ली का नहीं, देश के लगभग सभी बड़े शहरों का है । अपने तालाबों पर मिट्टी डाल कर कंक्रीट से तन  गया बैंगलुरु तो ’केपटाउन’ की तरह जल-शून्य की चेतावनी से बहाल है और अभी पंद्रह दिन में जब मानसून आएगा तो शहर जल भराव के चलते ठिठक जाएगा ।

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