आपदाओं से सरकारों पर बढ़ता है वित्तीय बोझ देश हर साल पांच से छह उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का सामना करता है। इनमें से दो या तीन […]
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‘भारत में जलवायु परिवर्तन’
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव न केवल वैश्विक स्तर पर देखा जा रहा है, बल्कि यह स्थानीय पर्यावरणीय समस्याओं को भी जन्म दे रहा है। यह […]
Read moreजलवायु परिवर्तन और जल संकट पर प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण ही एकमात्र समाधान
विकास परसराम मेश्राम जल संकट केवल हमारे देश की ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की समस्या है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, आज दुनिया की 26 […]
Read moreहमारे अस्तित्व से जुड़ा है जल प्रबंधन
भारत को 6 जलक्षेत्रों (इसे मैं जल राज्य कहूंगा) में विभाजित किया है और सीमाओं का निर्धारण कर डिजिटल मैप विकसित किए हैं। इन 6 जल क्षेत्रों को 37 बेसिन, 117 कैचमेंट एरिया, 588 सबकैचमेंट एरिया, 3854 वाटरशेड, 49618 सब-वाटरशेड और कुल 3 लाख 21 हजार 324 माइक्रोवाटरशेड में बांटकर हर एक का जमीनी चिन्हांकन करके उसका एक यूनिक नेशनल कोड जारी किया है।
Read moreसी ई ई डब्लू और इंडिया क्लाइमिट कोलाबोरेटिव ः जलवायु परिवर्तन जोखिम
सी ई ई डब्लू और इंडिया क्लाइमिट कॉलब्रेशन द्वारा भारत के हर जिले की जलवायु परवर्तन के प्रति संवेदनशीलता और संभावित प्राकृतिक आपदा पर यह शानदार रिपोर्ट हर देशवासी को पढ़ना चाहिए क्योंकि यह स्थानीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन से उपज रहे संकट के निदान के तलाशने में सहायक है
Read moreलोकवादी गांधी की पर्यावरणीय दृष्टि
गांधी की पर्यावरणीय दृष्टि, पर्यावरण की लोक-संरक्षण परंपरा से संबद्ध या प्रभावित है। आख़िर, भौतिकता निरपेक्ष सादगीपूर्ण उनका जीवन भी किसी अंतिम जन के रहन-सहन का ही अनुकरण था।
Read moreशीघ्र निस्तारित हों पर्यावरणीय अपराध
आंकड़ों के अनुसार 1986 से 2023 के बीच जलवायु परिवर्तन से जुड़े लगभग 2,666 मामले दायर हुए हैं। इनमें से 70 फीसदी मामले 2015 के बाद दर्ज किए गए। पिछले तीन दशकों में अमेरिका में जलवायु परिवर्तन से संबंधित सबसे ज्यादा 1,745 मामले दायर किए गए।
Read moreजलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक खेती
जलवायु परिवर्तन पर कृषि वैज्ञानिकों ने चेताया है कि अगर हम इसी तरह से खेती-बाड़ी करते रहें तो दुनिया में केवल 60 वर्षों तक ही खेती की जा सकती है। ऐसी स्थिति में कृषि को भविष्य के लिए संजोने रखने हेतू प्राकृतिक खेती ही सबसे उत्तम विकल्प है।
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