विकास और आपदा के बीच 5–7 मीटर का संतुलन अजय सहाय हिमालय में 5 से 7 मीटर चौड़ी ऑल-वेदर सड़क निर्माण का प्रश्न केवल विकास […]
Read moreMonth: September 2025
हिमालय पार करता मानसून
भारतीय आपदाएँ, वैश्विक जलवायु और जल आत्मनिर्भरता की दिशा अजय सहाय हिमालय और मानसून का संबंध केवल भारतीय उपमहाद्वीप तक सीमित नहीं है बल्कि यह […]
Read moreहिमालय में क्लाउडबर्स्ट की बदलती प्रकृति
रात से दिन तक बढ़ती घटनाएँ और जलवायु परिवर्तन का वैज्ञानिक सच अजय सहाय हिमालयी क्षेत्रों में क्लाउडबर्स्ट (मेघफटन) को प्राचीन काल से एक सामान्य […]
Read moreसमेकित विकास से बचाया जा सकता है निकोबार का पर्यावरण
हिन्द महासागर में 572 द्वीपों का समूह अंडमान निकोबार पंकज चतुर्वेदी क्या विकास के प्रतिमान में आदिम लोगों के नैसर्गिक पर्यावास, जीवन शैली , बोली-भाषा को संरक्षित करने की कोई नीति […]
Read moreकहकशां नहीं, कहर है बारिश का
प्रकृति का उग्र चेहरा सुनील कुमार महला मानव की इच्छाओं का कोई अंत नहीं है और आज मानव अपनी इच्छाओं, लालच और सुविधाओं की अंधी […]
Read moreछोटी नदियों ने मचाई बड़ी तबाही
देहरादून के करीब बादल फटने ने चेता दिया है कि छोटी नदियों का अस्तित्व अनिवार्य है पंकज चतुर्वेदी देहरादून जोली ग्रांट हवाई अड्डे से ऋषिकेश […]
Read moreकीटों की घटती प्रजातियाँ
इकोसिस्टम को खतरा ! सुनील कुमार हाल ही में एक प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक में एक खबर पढ़ी।खबर थी कि-‘पिछले 150 वर्षों में लाखों कीट प्रजातियां […]
Read moreजलकुंभी संकट
भारत की आर्द्रभूमियों पर सबसे बड़ा आक्रांता पौधा और उसका वैज्ञानिक-कानूनी समाधान अजय सहाय भारत में जलकुंभी (Eichhornia crassipes) का संकट पिछले 120 वर्षों से […]
Read more