सुप्रीम कोर्ट ने कहा था-आप किसी शोर का सुनना चाहते हैं या नहीं, यह तय करने का आपको पूरा अधिकार लेकिन सड़क पर जोर जोर से बात करते लोग या साझा तिपहिया में बजते कानफोडू स्टीरियो आदि को इस आदेश की कतई परवाह नहीं ।
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दिल्ली को बीमारी बाँट रही है हिंडन
हिंडन नदी भले ही उत्तर प्रदेश में बहती हो और उसके जहरीले जल ने तट परबसे गांव-गांव में तबाही तो मचा ही रखी है, लेकिन अब दिल्ली भी इसके प्रकोप से अछूती नहीं है।
Read moreभूजल – हालत सुधरे, लेकिन खतरा बड़ा
देश का बड़ा हिस्सा पेय जल और खेती के लिए भू जल पर निर्भर है । जिस देश में भूजल ने हरित क्रांति को संवारा और जिसके चलते भारत एक खाद्य-सुरक्षित राष्ट्र बन गया, वहीं बहुमूल्य संसाधन अतिदोहन के चलते अब खतरे में हैं ।
Read moreअपनी जल निधियाँ डुबाने से डूब रहा है चैन्नई
कूवम शब्द ‘कूपम ’ से बना है- जिसका अर्थ होता हैं कुआँ। कूवम नदी 75 से ज्यादा तालाबों के अतिरिक्त जल को अपने में सहजे कर तिरूवल्लूर जिले में कूपम नामक स्थल से उदगमित होती है। दो सदी पहले तक इसका उद्गम धरमपुरा जिले था, भौगोलिक बदलाव के कारण इसका उदगम स्थल बदल गया।
Read moreनारों से नहीं इरादों से बचेगी यमुना नदी
सन 1993 से अभी तक दिल्ली में यमुना के हालात सुधारने के नाम पर दिल्ली सरकार ने 5400 करोड़ का खर्चा हुआ, इसमें से 700 करोड़ की राशी सन 2015 के बाद खर्च की गई ।
Read moreतकनीकी से नहीं आत्म नियंत्रण से थमेगा साँसों का जहर
शहरों में भीड़ कम हो, निजी वाहन कम हों , जाम न लगे, हरियाली बनी रहे – इसी से जहरीला धुंआ कम होगा । मशीने मानवीय भूल का निदान होती नहीं । हमें जरूरत है आत्म नियंत्रित ऐसी प्रक्रिया की जिससे वायु को जहर बनाने वाले कारक ही जन्म न लें ।
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