पंकज चतुर्वेदी दिल्ली में पूर्वाञ्चल प्रवासी छठ पर्व की तैयारी के लिए जब यमुना के तट पर गए तो वहाँ नदी को रसायनों से उपजे […]
Read moreCategory: जल भराव
“डूबते हुए प्यासे शहर”
श्री पंकज चतुर्वेदी जी की पुस्तक इस पुस्तक के बारे में लेखिका सुश्री भारती पाठक के विचार जल जीवन है | सिर्फ मनुष्य ही नहीं […]
Read moreबाढ़ खलनायक नहीं होती !
पंकज चतुर्वेदी साल के दस महीने लाख मिन्नतों के बाद जब आसमान से जीवनदाई बरसात का आशीष मिलता है तो भारत का बड़ा हिस्सा इससे […]
Read moreगुरूग्राम क्यों बन जाता है जल-ग्राम ?
पंकज चतुर्वेदी बीते तीन साल में सौ करोड़ खर्च हो गए लेकिन हर बारिश की फुहार के साथ दुनिया में मशहूर औधयोगिक शहर गुरुग्राम के […]
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