वेटलैंड का वैज्ञानिक और पारिस्थितिक महत्व अजय सहाय वेटलैंड्स अर्थात् आर्द्रभूमियाँ, पारिस्थितिक तंत्र का ऐसा महत्वपूर्ण भाग हैं जो न केवल जैव विविधता के लिए […]
Read moreCategory: Article (लेख)
नील गाय
नील गाय – नील गाय या रोजा या फिर घोड़परास खेती के लिए खतरा पंकज चतुर्वेदी दो राज्यों के बीच फैले बुंदेलखंड में सड़कें बहुत […]
Read more“वेटलैंड और मियावाकी जैव विविधता: जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध प्रकृति की ढाल”
वेटलैंड और मियावाकी जैव विविधता अजय सहाय वर्तमान जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती के संदर्भ में जब पृथ्वी का औसत तापमान 1.5°C से ऊपर जाने […]
Read moreपक्षियों की 500 प्रजातियां विलुप्ति की कगार पर
पक्षियों की 500 प्रजातियां विलुप्ति की कगार पर पक्षियों की 500 से ज्यादा प्रजातियां अगले सौ वर्षों में विलुप्त हो सकती हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी […]
Read moreताकि सारे साल पानीदार रहे समाज !
ताकि सारे साल पानीदार रहे समाज ! पंकज चतुर्वेदी इस साल मौसम ने चौंका दिया ! बैसाख में सावन की झड़ी लगा दी और अब […]
Read moreमौत का कारण बनता पानी
मौत का कारण बनता पानी रवीन्द्र व्यास दुनिया की महान सभ्यताओं का विकास नदी और सरोवरों के तट पर हुआ । कहीं गांव और शहर […]
Read moreबढ़ती उम्र के साथ बढ़ती बीमारियाँ
बढ़ती उम्र के साथ बढ़ती बीमारियाँ पंकज चतुर्वेदी विश्व स्वास्थ्य संगठन के आँकड़े बताते हैं कि बीते पाँच दशकों के दौरान भारत में इंसान की […]
Read moreसमय के साथ कम हो चली है झींगुरों की झांय-झांय !
समय के साथ कम हो चली है झींगुरों की झांय-झांय ! सुनील कुमार महला जून के इस महीने में इन दिनों में यह लेखक पहाड़ी […]
Read more