Category: Article (लेख)

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प्रकृति से प्रेम कर ही बचाई जा सकती है धरती

खिलते हुए फूल, सुहानी हवा, पेड़-पौधे, जीव-जन्तु, ऊंचाई से गिरते झरनें, बहता हुआ पानी, नदियां व पहाड़, सूरज, चांद और तारे-ये सब प्रकृति के ही अवयव हैं। प्रकृति के ये अवयव अनेक तौर-तरीकों से हमें प्यार करने के लिए प्रेरित करते हैं।

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जीवनदायिनी गंगा को संजीवनी मिलना बहुत जरूरी

सीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार, 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में से 31 में नदियों का प्रवाह प्रदूषित है।

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हिंदू कालेज में एक पेड़ मां के नाम अभियान

एक पेड़ मां के नाम ऐसा अभियान है जिसमें इन दोनों से एक साथ जुड़ाव महसूस होता है। हिंदू कालेज में अभियान का शुभारंभ करते हुए प्राचार्य प्रो अंजू श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना की महाविद्यालय इकाई ने इस अभियान से जुड़कर पर्यावरण और प्रकृति के क्षेत्र में प्रशंसनीय कार्य किया है।

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कार्यपालिका के सामने लाचार-असहाय न्यायपालिका

छतरपुर के तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने के लिये मप्र जबलपुर उच्च न्यायालय ने दायर जनहित याचिका क्रमांक 6373/2011 में सुनवाई बाद तब के मुख्य न्यायाधीश श्री ए एम खानवेलकर की डिवीजन बेंच ने छतरपुर जिले के सभी तालाबों से अतिक्रमण हटाने का 7 अक्टूबर 2014 को आदेश दिया था।

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स्थानीय पर्यावरणीय समस्याएँ और सकारात्मक कार्य

स्थानीय पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान केवल सरकार और बड़े संगठनों की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।

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मानसून में मन के आंसू

क्या जल बिना जीवन संभव है? क्या जंगल बिना मंगल संभव है? और क्या समाज की संपन्नता के बिना व्यक्ति की संपन्नता संभव है? सत्ता को समाज के आंसू दिखते भी हैं या नहीं? समाज को अपने आंसू पोछना सीखना होगा।

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स्त्रोत - गूगल

सावधान! कहर ढहाने वाली है लू

मार्च-24 में संयुक्त राष्ट्र के खाध्य और कृषि संगठन (एफ ए ओ ) ने भारत में एक लाख लोगों के बीच सर्वे कर एक रिपोर्ट में बताया है कि गर्मी/लू के कारण गरीब परिवारों को अमीरों की तुलना में पाँच फीसदी अधिक आर्थिक नुकसान होगा। चूंकि आर्थिक रूप से सम्पन्न लोग बढ़ते तापमान के अनुरूप अपने कार्य को ढाल लेते हैं , जबकि गरीब ऐसा नहीं कर पाते ।

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ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ निर्णायक जंग अभी बाकी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था-आप किसी शोर का सुनना चाहते हैं या नहीं, यह तय करने का आपको पूरा अधिकार लेकिन सड़क पर जोर जोर से बात करते लोग या साझा तिपहिया में  बजते कानफोडू स्टीरियो आदि  को इस आदेश की कतई  परवाह नहीं ।

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