रोहित कौशिक देश की महत्वपूर्ण नदी यमुना का प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन गया है। यमुना के प्रदूषण को लेकर समय-समय पर कई अध्ययन […]
Read moreCategory: Polution (प्रदूषण)
क्यों कामयाब नहीं है नमामि गंगे परियोजना गंगा की निर्मलता को नारों नहीं संकल्प की जरूरत
पंकज चतुर्वेदी आस्था के केंद्र बनारस में गंगा और उससे मिलने वाली सहायक धाराओं – वरुणा और असि में पारंपरिक देशी मछलियों का मरना, उनकी […]
Read moreक्या प्रदूषण से खराब हो रहा है हमारा भोजन ?
रोहित कौशिक प्रदूषण हमारी जिंदगी पर कई तरह से प्रभाव डाल रहा है। एक तरफ आद्यौगिक इकाइयां पर्यावरण और जल को प्रदूषित कर रही […]
Read moreयुद्ध, जलवायु संकट और खेती का भविष्य
पवन नागर वर्तमान समय में दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहाँ एक ओर विज्ञान और तकनीक नई ऊँचाइयों को छू रहे हैं, […]
Read moreशहरों की झीलों में माइक्रोप्लास्टिक का बढ़ता प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय बन गया है, जिसके मानव स्वास्थ्य और जलीय जीवन पर विनाशकारी प्रभाव पड़ रहे हैं। शोधों से पता चला है कि ये छोटे प्लास्टिक कण विभिन्न स्रोतों से झीलों तक पहुँच रहे हैं, और जलवायु परिवर्तन इस समस्या की गंभीरता को और बढ़ा रहा है। यह लेख इसी विषय पर हाल ही मे हुए शोध पर केंद्रित है ।
झीलों को बीमार कर रहा है माइक्रोप्लास्टिक पंकज चतुर्वेदी अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘एनवायर्नमेंटल साइंस: एडवांसेज’ के ताजे अंक में श्रीनगर की डल झील में माइक्रोप्लास्टिक […]
Read moreपीलीभीत से चल कर पूर्वाञ्चल में गंगा में मिलने वाली गोमती नदी पर संकट का अर्थ है मध्य भारत के बड़े हिस्से में जल-जनजीवन- खेती- पर भयावह असर । गोमती की दिक्कत है कि उसकी अधिकांश सहायक नदियां सूख गई, जबकि गोमती की विशालता उसकी सखी-सहेलियों पर ही निर्भर है । यह लेख इसी मसले पर है ।
सहायक नदियों के सूखने से गोमती सूखता आंचल पंकज चतुर्वेदी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को अपने आंचल में समेटे बहने वाली गोमती […]
Read moreहरित भविष्य की राह: प्रकृति संरक्षण का संकल्प।(28 जुलाई विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर विशेष आलेख)
प्रतिवर्ष 28 जुलाई को जैव विविधता के संरक्षण, विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित किए जाने,पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने तथा आने वाली पीढ़ियों […]
Read moreबढ़ते पर्यटकों के आंकड़ों से भले ही लेह-लद्दाख मुस्कुरा रहा हो, एलकीं बढ़ती भीड़ से वहाँ के पर्यावरण को हो रहे स्थाई नुकसान ने “धरती के स्वर्ग ” के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है । यह लेख लेह-लद्दाख में उभर रही पर्यावरणीय समस्याओं का अध्ययन है ।
संकट में ‘शांग्री-ला‘: अनियंत्रित पर्यटन और लद्दाख का सुलगता पर्यावरण पंकज चतुर्वेदी लेह प्रशासन बड़े गर्व से बताया रहा है कि पिछले साल की तुलना […]
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