तपती धरती और बढ़ता संकट: क्या हम चेतेंगे ? सुनील कुमार महला लगातार अंधाधुंध दोहन और प्रकृति के प्रति लापरवाही के कारण आज हमारी धरती(नीला […]
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आस्था और वास्तविकता के बीच गंगा
ऋषिकेश–हरिद्वार में स्नान योग्य जल पर वैज्ञानिक सवाल अजय सहाय ऋषिकेश और हरिद्वार, जो कि गंगा नदी के हिमालयी उद्गम क्षेत्र के सबसे पवित्र और […]
Read moreजल संकट से जल आत्मनिर्भरता तक: विश्व जल दिवस 2026 का विज़न
वैश्विक जल संकट केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं बल्कि अस्तित्व, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिरता से जुड़ा एक जटिल संकट बन चुका है। अजय सहाय विश्व […]
Read moreआईटी शहरों का विस्तार और भारत का बढ़ता जल संकट
शहरों में झीलों और तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन को अनिवार्य बनाना अजय सहाय 2003 के बाद भारत में आईटी आधारित शहरीकरण की तेज़ […]
Read moreपर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में पुनर्चक्रण की भूमिका
18 मार्च वैश्विक पुनर्चक्रण दिवस सुनील कुमार महला प्रतिवर्ष 18 मार्च को विश्वभर में वैश्विक पुनर्चक्रण दिवस (ग्लोबल रीसाइक्लिंग डे) मनाया जाता है। इस दिवस […]
Read moreभविष्य के संघर्षों का कारण: पानी की कमी और पलायन
1997 में पानी की उपलब्धता 575 घन किलोमीटर थी, लेकिन अब यह घटकर लगभग 500 घन किलोमीटर रह गई है विकास परसराम मेश्राम नेशनल इंस्टीट्यूट […]
Read moreधराली त्रासदी का नया सच: ग्लेशियर से टूटा हिमखंड बना विनाशकारी सैलाब
भू-वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालय दुनिया की सबसे युवा पर्वतमालाओं में से एक अजय सहाय 5 अगस्त 2025 को धराली (हर्षिल घाटी) में आई अचानक और […]
Read moreघटते तालाब, बढ़ता जल संकट: गाँव की जल-जीवन रेखा
तालाबों का भू-वैज्ञानिक, पर्यावरणीय, सामाजिक और कानूनी महत्व अजय सहाय भारत की पारंपरिक जल-संस्कृति में तालाब (पोंड/टैंक) हजारों वर्षों से ग्रामीण जल प्रबंधन का आधार […]
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