Category: Rivers and Lakes (नदियाँ और झीलें)

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हमारे अस्तित्व से जुड़ा है जल प्रबंधन

भारत को 6 जलक्षेत्रों (इसे मैं जल राज्य कहूंगा) में विभाजित किया है और सीमाओं का निर्धारण कर डिजिटल मैप विकसित किए हैं। इन 6 जल क्षेत्रों को 37 बेसिन, 117 कैचमेंट एरिया, 588 सबकैचमेंट एरिया, 3854 वाटरशेड, 49618 सब-वाटरशेड और कुल 3 लाख 21 हजार 324 माइक्रोवाटरशेड में बांटकर हर एक का जमीनी चिन्हांकन करके उसका एक यूनिक नेशनल कोड जारी किया है।

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मौसम पूर्वानुमान में अल-नीनो की भूमिका

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक सन 1953 से 2023 के बीच कुल 22 ला नीना साल दर्ज किए गए हैं, जिसमें से सिर्फ दो बार यानी साल 1974 और 2000 के मॉनसून सीजन में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि बाकी सालों के मॉनसून में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

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अस्तित्व के लिए जूझती द्रव्यवती नदी

साल 1981 के जुलाई माह में आई बाढ़ में द्रव्यवती नदी का अस्तित्व बह गया था। बची-कुची कसर अतिक्रमण विकास और प्रदूषण ने पूरी करदी और द्रव्यवती कब अमानीशाह नाला में बदल गई पता नही चला। आज द्रव्यवती को लोग इसके नाम से नहीं बल्कि अमानीशाह के नाले के नाम से जानते हैं।

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भुला दी गई नदियों ने भयावह बना दिया वायनाड का दर्द

वायनाड – नीलगिरी पर्वतमाला के इन ऊंचे पहाड़ों से कभी एक नदी बहती थी । तेज गति वाली नदी जो गर्मी में भले उदास सी दिखती लेकिन बरसात के छह महीने तेज वेग में नीचे की तरफ जाती और पश्चिमी घाट की नदियों के संजाल में मिल जाती ।

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राजधानी दिल्ली में यमुना आईसीयू में यमुना सफाई के दावे कागजी

यमुना नदी में प्रदूषण की स्थिति एक बार फिर से सुर्खियों में है। हाल ही में आई भारी बरसात के बाद भी यमुना साफ नहीं दिख रही है। जुलाई 2024 में यमुना में सफेदी की खबरें एक बार फिर से सामने आई हैं, जिससे पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।

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सी पी सी बीः संकट में देश की नदियाँ

देश की नदियां इस समय बेहद संकट के दौर से गुजर रही हैं , केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने  देश के सभी नदियों की स्थित पर नवंबर 2022 में एक विस्तृत  रिपोर्ट  जारी की थी । यहाँ इस रिपोर्ट को देखा जा सकता है ।

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फिर पानी के प्रति इतनी बेपरवाही क्यों ?

पानी पीने के अलावा शौच, स्नान, कपड़े धोना, खाना बनाना, साफ-सफाई करना और अपने वाहनों को धोना आदि कामों में इस्तेमाल  किया जाता है। पानी के बगैर जिंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती ।

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मानसून जीवन पर्व है

भारतीय मानसून का संबंध मुख्यतया  गरमी के दिनों  में होने वाली वायुमंडलीय परिसंचरण में परिवर्तन से है। गरमी की शुरूआत होने से सूर्य उत्तरायण हो जाता है। सूर्य के उत्तरायण के साथ -साथ अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र का भी उत्तरायण होना प्रारंभ हो जाता है इसके प्रभाव से पश्चिमी जेट स्ट्रीम हिमालय के उत्तर में प्रवाहित होने लगती है। इस तरह तापमान बढने से निम्न वायुदाब निर्मित होता है।

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