Tag: #जलवायुपरिवर्तन

वैज्ञानिक दृष्टि से नीम, पीपल, बरगद और जामुन का महत्व ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और आर्सेनिक संकट से जूझते भारत का हरित समाधान

वैज्ञानिक दृष्टि से नीम, पीपल, बरगद और जामुन का महत्व

ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और आर्सेनिक संकट से जूझते भारत का हरित समाधान अजय सहाय नीम, पीपल, बरगद और जामुन जैसे परंपरागत वृक्ष वर्तमान वैश्विक […]

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उत्तराखंड की नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी उच्च न्यायालय और ट्रिब्यूनल के सख्त फैसले, नदियों-नालों के किनारे विकास पर रोक और आपदा से बचाव का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

उत्तराखंड की नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी

उच्च न्यायालय और ट्रिब्यूनल के सख्त फैसले, नदियों-नालों के किनारे विकास पर रोक और आपदा से बचाव का वैज्ञानिक दृष्टिकोण अजय सहाय उत्तराखंड की संवेदनशील […]

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हिमालयी आपदाएँ और पुनर्वास की ज़रूरत सुरक्षित कॉलोनियों की ओर वैज्ञानिक कदम

हिमालयी आपदाएँ और पुनर्वास की ज़रूरत

सुरक्षित कॉलोनियों की ओर वैज्ञानिक कदम अजय सहाय हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे हिमालयी राज्यों में जलवायु परिवर्तन के कारण पिछले कुछ वर्षों से […]

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बाढ़ मुक्त भारत का विज़न विज्ञान, संविधान और अंतरराष्ट्रीय मॉडल की राह

बाढ़ मुक्त भारत का विज़न

विज्ञान, संविधान और अंतरराष्ट्रीय मॉडल की राह अजय सहाय भारत के वर्तमान परिदृश्य में हिमालयी क्षेत्र में लगातार हो रही भारी वर्षा, मानसून की अनियमितता, […]

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हिमाचल की त्रासदी, वैश्विक चेतावनी जलवायु खतरों को कब समझेंगे?

हिमाचल की त्रासदी, वैश्विक चेतावनी

जलवायु खतरों को कब समझेंगे? रोहित पराशर हाल ही में हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं में भारी नुकसान देखने को मिला है और पर्यावरण असंतुलन […]

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हिमालयी चारधाम यात्रा और आपदाएँ शून्य तीर्थयात्री दिवस, चरम वर्षा और जलवायु परिवर्तन की चुनौती

हिमालयी चारधाम यात्रा और आपदाएँ

शून्य तीर्थयात्री दिवस, चरम वर्षा और जलवायु परिवर्तन की चुनौती हिमालय के चार धाम—बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—के साथ अमरनाथ और वैष्णो देवी जैसे प्रमुख […]

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नकली बादल असलियत नहीं जानते

नकली बादल असलियत नहीं जानते

नकली बादल से झील भरने के लिए देश-विदेश की कम्पनियाँ बुला लीं। पंकज चतुर्वेदी जयपुर से कोई 32 किलोमीटर दूर जमवा रामगढ़ की झील कभी […]

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पिघलते हिमालय और बनते वेटलैंड्स जैव विविधता, आपदा और जल आत्मनिर्भरता की चुनौती

पिघलते हिमालय और बनते वेटलैंड्स

जैव विविधता, आपदा और जल आत्मनिर्भरता की चुनौती अजय सहाय हिमालयी क्षेत्र को विश्व की “तीसरी ध्रुवीय पट्टी” कहा जाता है क्योंकि यहाँ 9,575 से […]

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