जब दिल्ली में यमुना लबालब होती है तो यहाँ के नाले- कारखाने उसमें इतना जहर घोलते हैं कि नदी सारे रास्ते हाँफती है और जब पानी का संकट खड़ा होता है तो नदी की याद आती है । यह हाल केवल दिल्ली का नहीं, देश के लगभग सभी बड़े शहरों का है । अपने तालाबों पर मिट्टी डाल कर कंक्रीट से तन गया बैंगलुरु तो ’केपटाउन’ की तरह जल-शून्य की चेतावनी से बहाल है और अभी पंद्रह दिन में जब मानसून आएगा तो शहर जल भराव के चलते ठिठक जाएगा ।
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कैसे पुनर्जीवित हो हिंडन
रिवर से सीवर बन गई, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रमुख और यमुना की महत्वपूर्ण सहायक नदी हिंडन को फिर से जीवन देने के लिए नागरिक […]
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हिंडन जल बिरादरी इंसान के लालच, लापरवाही ने हिंडन को ‘हिडन’ बना दिया है लेकिन जब नदी अपना रौद्र रूप दिखाती है तब मानव जाति […]
Read moreपानी की बर्बादी ना रोकी तो बेपानी हो जायगा देश
पंकज चतुर्वेदी जाम्बा, करनाल से कैथल जाने वाले मुख्य मार्ग पर एक संपन्न गांव है। कोई 1250 की आबादी वाले पूरे गांव में 242 घर […]
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Read moreकहीं सिक्किम की नई तबाही की इबारत न लिख दे तीस्ता पर बांध
पंकज चतुर्वेदी जलवायु परिवर्तन की तगड़ी मार से बेहाल सर्वाधिक हिमनद झीलों (ग्लेशियर लेक) वाले राज्य सिक्किम में कोई सवा साल पहले आई भीषण तबाही […]
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